अपने तीर्थ को बचाने संत ने खुद को आग लगाई:18 दिन पहले CM हाउस के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी थी

भरतपुर2 महीने पहले

भरतपुर के डीग-कामां व नगर क्षेत्र में आदि बद्री और कनकाचल में माइनिंग को पूरी तरह खत्म करने के लिए 551 दिन चले संतों के आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को डीग स्थित पसोपा के पशुपतिनाथ मंदिर के 65 साल के महंत विजय दास ने खुद को आग लगा ली। वे 85 फीसदी झुलस गए। 23 जुलाई लगभग तड़के 3 बजे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान महंत विजय दास का निधन हो गया।

दरअसल, 4 जुलाई 2022 को आंदोलन से जुड़े बाबा हरिबोल दास ने खनन नहीं रुकने पर सीएम हाउस के बाहर आत्मदाह की चेतावनी दी। हरिबोल के साथ 14 साधु-संत आत्मदाह के लिए तैयार हो गए। इसमें बाबा विजय दास भी थे।

संतों का मानना है कि भरतपुर के डीग-कामां व नगर इलाके में पहाड़ियों की श्रृंखला है। ये पहाड़ियां ब्रज चौरासी कोस में आती हैं। संत समाज के मुताबिक ये पहाड़ियां तीर्थ स्थल हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण यहां लीलाएं करते थे। इसलिए संत लगातार यहां खनन रोकने की मांग कर रहा था।

कौन थे महंत विजय दासमहंत विजय दास
हरियाणा में फरीदाबाद जिले के बड़ाला गांव के रहने वाले थे। उनका जन्म 1957 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका जन्म का नाम मधुसूदन शर्मा था। 2009 में एक सड़क हादसे में मधुसूदन के बेटे और बहू की मौत हो गई। उस समय पोती दुर्गा 3 साल की थी। बेटे-बहू की मौत ने मधुसूदन को विचलित कर दिया। 2010 में वे पोती दुर्गा को लेकर बड़ाला से उत्तर प्रदेश में बरसाना के मान मंदिर आ गए।

मान मंदिर आकर मधुसूदन शर्मा संत रमेश बाबा के संपर्क में आए। संत रमेश बाबा से प्रभावित होकर मधुसूदन विजय दास हो गए। बाबा विजय दास ने अपनी पोती दुर्गा को गुरुकुल में डाल दिया। दुर्गा अब 16 साल की है और मान मंदिर आश्रम के स्कूल में पढ़ती है।

बाबा के अंतिम दर्शन करने कामां में मौजूद संत समाज, सांसद व अन्य।
बाबा के अंतिम दर्शन करने कामां में मौजूद संत समाज, सांसद व अन्य।

आदिबद्री व कनकांचल में पूरी तरह खनन बैन
भरतपुर के डीग-कामां व नगर इलाके में पहाड़ियों की श्रृंखला है। ये पहाड़ियां ब्रज चौरासी कोस में आती हैं। संत समाज के मुताबिक ये पहाड़ियां तीर्थ स्थल हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण यहां लीलाएं करते थे।

साल 2004 में उठी थी खनन को रोकने की मांग
आदिबद्री और कनकांचल में खनन को पूरी तरह बैन करने के लिए 2004 में आंदोलन शुरू हुआ था। आंदोलन बरसाना के मान मंदिर के संत रमेश बाबा के नेतृत्व में हुआ। साल 2007 में भरतपुर के बोलखेड़ा में संतों ने पहला बड़ा आंदोलन किया। इस आंदोलन की अगुवाई बाबा हरिबोल दास ने की। हरिबोल दास वही संत हैं, जिन्होंने 4 जुलाई 2022 को सीएम हाउस के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी थी।

2007 में राजस्थान में तत्कालीन भाजपा सरकार ने आदिबद्री और कनकांचल के पहाड़ों में 5232 हेक्टेयर इलाके में खनन रोकने और वन क्षेत्र घोषित करने की मांग मानने का आश्वासन दिया। साल 2009 में गहलोत सरकार ने दोनों मांगों का नोटिफिकेशन जारी किया। आदिबद्री और कनकांचल पहाड़ों के 75 प्रतिशत क्षेत्र में खनन को रोक दिया गया। 25 फीसदी हिस्से में खनन जारी रहा। संत समाज इस 25 फीसदी इलाके में भी खनन को बैन कराना चाहता था। यह इलाका भरतपुर के पहाड़ी और नगर तहसील में था।

महंत विजय दास का नाम मधुसूदन शर्मा था। वे हरियाणा के थे। बेटे बहू की मौत के बाद संत बन गए। 3 साल की पोती को लेकर मान मंदिर आए थे। अब पोती 16 साल की है।
महंत विजय दास का नाम मधुसूदन शर्मा था। वे हरियाणा के थे। बेटे बहू की मौत के बाद संत बन गए। 3 साल की पोती को लेकर मान मंदिर आए थे। अब पोती 16 साल की है।

2017 में फिर शुरू हुआ आंदोलन
कनकांचल और आदिबद्री पर्वतों पर खनन पूरी तरह बैन करने के लिए साल 2017 में फिर आंदोलन तेज हुआ। संत समाज के साथ हिंदू संगठन भी आंदोलन में शामिल हुए। यह आंदोलन करीब 45 दिनों तक चला। तत्कालीन बीजेपी सरकार की तरफ से अरुण चतुर्वेदी ने साधु संतों को आश्वासन दिया कि बाकी बचे 25 प्रतिशत भाग में खनन बंद कर दिया जाएगा। लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ।

पार्थिव देह को बरसाना के मान मंदिर की गोशाला ले जाया जाएगा। शाम को अंतिम संस्कार किया जाएगा। बाबा के अंतिम दर्शन के लिए भीड़ उमड़ रही है।
पार्थिव देह को बरसाना के मान मंदिर की गोशाला ले जाया जाएगा। शाम को अंतिम संस्कार किया जाएगा। बाबा के अंतिम दर्शन के लिए भीड़ उमड़ रही है।

2017 में बाबा विजय दास आदिबद्री और कनकांचल पर्वत खनन के विरोध में चले आंदोलन में कूदे। 2020 में बाबा विजय दास को भरतपुर के डीग कस्बे के पसोपा गांव के पशुपतिनाथ मंदिर में महंत बनाया गया। महंत विजय दास के पास मंदिर प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी थी।

ये हैं आदिबद्री और कनकांचल की पहाड़ियां जहां लीगल माइनिंग का विरोध किया जा रहा था। अब इस क्षेत्र को संरक्षित घोषित कर दिया गया है। इन्हीं पहाड़ों के लिए बाबा ने खुद को आग लगा ली थी।
ये हैं आदिबद्री और कनकांचल की पहाड़ियां जहां लीगल माइनिंग का विरोध किया जा रहा था। अब इस क्षेत्र को संरक्षित घोषित कर दिया गया है। इन्हीं पहाड़ों के लिए बाबा ने खुद को आग लगा ली थी।

2021 में पसोपा गांव में हुआ आंदोलन
खनन नहीं रुका तो साधु संतों ने नए सिरे से आंदोलन की रणनीति बनाई। डीग कस्बे के पसोपा गांव में 16 जनवरी 2021 को वनक्षेत्र घोषित करने और खनन पूरी तरह बंद करने को लेकर संतों ने धरना शुरू कर दिया गया। कई बार सरकार व प्रशासन को इस दौरान ज्ञापन दिए गए। लेकिन कोई खास कदम नहीं उठाया गया। पसोपा गांव में संतों का धरना 551 दिन चला।

भरतपुर के डीग कस्बे में पसोपा गांव का पशुपतिनाथ मंदिर। विजय दास बाबा इसी मंदिर के महंत थे।
भरतपुर के डीग कस्बे में पसोपा गांव का पशुपतिनाथ मंदिर। विजय दास बाबा इसी मंदिर के महंत थे।

बाबा हरिबोल दास के चेतावनी सही साबित हुई
4 जुलाई 2022 को आंदोलन से जुड़े बाबा हरिबोल दास ने खनन नहीं रुकने पर सीएम हाउस के बाहर आत्मदाह की चेतावनी दी। हरिबोल के साथ 14 साधु-संत आत्मदाह के लिए तैयार हो गए। इसमें बाबा विजय दास भी थे। चेतावनी के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। संभागीय आयुक्त सांवरमल वर्मा ने बाबा हरिबोल के साथ बैठक की। वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद सरकार की तरफ से मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने 18 जुलाई को बाबा हरिबोल व साधु संतों के साथ वार्ता की। बैठक में संतों ने दोनों पर्वतों के 25 प्रतिशत भाग में खनन को रोकने व एरिया को वन क्षेत्र घोषित करने की मांग पर विश्वेंद्र सिंह ने आश्वासन दिया।

लेकिन अगले ही दिन 19 जुलाई की सुबह करीब 6 बजे आंदोलनरत एक बाबा नारायण दास पसोपा में मोबाइल टावर पर चढ़ गए। बाबा हरि बोल ने कहा कि जब तक सरकार की तरफ से दोनों मांगों की सहमति का लेटर नहीं आ जाता तब तक नारायण दास नीचे नहीं उतरेंगे। बाबा नारायण दास के टावर पर चढ़ने के बाद मंत्री विश्वेंद्र सिंह, प्रशासन और साधु संतों के फिर वार्ता हुई।

20 जुलाई की दोपहर बाबा विजय दास ने लगाई खुद को आग

वार्ताओं का दौर चल रहा था। नारायण दास टावर पर थे। अचानक दोपहर 1 बजे पसोपा में बाबा विजय दास ने खुद को आग लगा ली। वे राधे-राधे कहते हुए दौड़े। आंदोलन के मद्देनजर मौके पर पुलिस जाप्ता मौजूद था। लेकिन घटना को रोका नहीं जा सका। 5-6 पुलिसकर्मियों ने बाबा पर कंबल डालकर आग बुझाई। घटना के बाद बाबा नारायण दास टावर से उतर आए। घटना के बाद मंत्री विश्वेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और संतों की मांगें पूरी होने का एक लेटर सौंप दिया।

बाबा के आत्मदाह के बाद अब राजस्थान की राजनीति गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा है कि सरकार सूचीबद्ध कर खनन के खिलाफ तरीके से कार्रवाई करे।
बाबा के आत्मदाह के बाद अब राजस्थान की राजनीति गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा है कि सरकार सूचीबद्ध कर खनन के खिलाफ तरीके से कार्रवाई करे।

अब राजनीति में गर्माहट

भरतपुर सांसद रंजिता कोली ने ट्वीट कर कहा कि 500 से ज्यादा दिन चले संतों के आंदोलन की सरकार ने अनदेखी की। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ट्वीट कर कहा कि प्रदेश में अवैध खनन को सरकार सूचीबद्ध कर खत्म करवाती तो यह स्थिति नहीं होती। सरकार नक्शों के आधार पर अवैध खनन सख्ती से रोके। जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट कर कहा कि बाबा विजय दास ने ब्रज चौरासी कोस इलाके को अवैध खनन से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। हठधर्मी राजस्थान सरकार ने उन्हें अग्निस्नान के लिए विवश किया।

खनन के खिलाफ आत्मदाह करने वाले संत की मौत:दिल्ली में एडमिट थे, परिवार में सिर्फ 16 साल की पोती; बरसाना में होगा अंतिम संस्कार

बाबा विजय दास के आत्मदाह के बाद सरकार ने तुरंत 551 दिन से धरना दे रहे संतों की मांगों को स्वीकार कर लिया। अब आदिबद्री और कनकांचल पर्वत खनन मुक्त होंगे।
बाबा विजय दास के आत्मदाह के बाद सरकार ने तुरंत 551 दिन से धरना दे रहे संतों की मांगों को स्वीकार कर लिया। अब आदिबद्री और कनकांचल पर्वत खनन मुक्त होंगे।
खबरें और भी हैं...