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जोड़तोड़ के जगत:भाजपा के पास 17 वोट थे, जीत को 19 चाहिए थे, 2 की जगह 11 जुटाए, जगत सिंह बने जिला प्रमुख

भरतपुर13 दिन पहले
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प्रोफाइल...जगत सिंह : उम्र 53 वर्ष, शिक्षा बीबीए, लक्ष्मणगढ़ (अलवर) और कामां (भरतपुर) से विधायक रह चुकेे हैं। - Dainik Bhaskar
प्रोफाइल...जगत सिंह : उम्र 53 वर्ष, शिक्षा बीबीए, लक्ष्मणगढ़ (अलवर) और कामां (भरतपुर) से विधायक रह चुकेे हैं।
  • राज्यमंत्री भजनलाल की बहू, विधायक जाहिदा और जोगेंदर अवाना के बेटा बेटी बन गए प्रधान

जिला प्रमुख और प्रधान चुनाव में नतीजे उम्मीद के अनुरूप रहे। जिला परिषद में भाजपा सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रही है। यहां पूर्व विदेश मंत्री कुं. नटवर सिंह के पुत्र और दो बार विधायक रह चुके जगत सिंह जिला प्रमुख बने हैं। जबकि जिले की 12 में से 4 उच्चैन में नदबई विधायक जोगेंदर अवाना के पुत्र हिमांशु अवाना और पहाड़ी में कामां विधायक जाहिदा के पुत्र साजिद निर्विरोध प्रधान बने हैं, कामां में जाहिदा की बेटी डॉ. शहनाज और वैर में गृह रक्षा राज्यमंत्री भजनलाल जाटव की बहू साक्षी चुनाव जीत गईं।

हालांकि अवाना को नदबई में प्रधान पद गंवाना पड़ा। यहां उनकी कोशिशों के बावजूद भाजपा की मुन्नीदेवी प्रधान बन गईं। जबकि बयाना में भाजपा टिकट पर चुनाव जीते मुकेश कोली निर्दलीय प्रधान बने हैं। कांग्रेस जिले की 12 में से 10 प्रधान ही बना पाई है। इनमें 8 जगह भुसावर, उच्चैन, पहाड़ी, वैर, नगर, सेवर, डीग और रूपवास में कांग्रेस के निर्विरोध प्रधान बने हैं।

इधर, जगत सिंह का जिला प्रमुख बनना तय था। लेकिन, कांग्रेस उन्हें वॉक ओवर नहीं देना चाहती थी। ऐनवक्त पर कामां के वार्ड 1 से पार्षद हलीमा का नामांकन भरवाया गया। लेकिन, कांग्रेस क्रॉस वोटिंग नहीं रोक पाई। जगत सिंह को 28 वोट मिले। उन्हें 19 वोट से विजयी घोषित किया गया। कांग्रेस के 14 सदस्य जीतने के बावजूद हलीमा को केवल 9 वोट ही मिल पाए। यानि 5 सदस्यों ने क्रॉस वोटिंग की।

भाजपा : सत्ता बरकरार, दूसरा जिला प्रमुख
भरतपुर में भाजपा का लगातार दूसरी बार जिला प्रमुख बना है। इससे पहले सन् 2015 में भाजपा से बीना सिंह जीती थीं। विश्व प्रिय शास्त्री 1959 में सबसे पहले जिला प्रमुख थे। इनके बाद सन् 1965 में पंडित रामकिशन, सन् 1982 में गिर्राज प्रसाद तिवारी, सन् 1988 में विश्वेंद्र सिंह, सन् 1989 में ब्रिजेंद्र सिंह सूपा, सन् 1990 में गुरुचरन सिंह, सन् 1995 में अनिता सिंह, सन् 2000 में रामलाल सागर, सन् 2005 में राजवीरसिंह, सन् 2007 में द्वारिका प्रसाद एवं राजवीरसिंह फौजदार, सन् 2009 में द्वारिका प्रसाद और खेमकरण सन् 2010 में लीलावती जिला प्रमुख बनीं थीं।

सिर्फ 1-1 वोट से दो महिलाएं बन गईं प्रधान
चुनाव में 1 वोट का भी काफी महत्व है यह एक बार फिर साबित हुआ। क्योंकि कुम्हेर में कविता फौजदार और नदबई में मुन्नी देवी 1-1 वोट से ही प्रधान बनी हैं। इस बार पंचायत समितियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व करीब 34 प्रतिशत कम हुआ है। वर्ष 2015 के चुनाव में जहां सभी 10 पंचायत समितियाें में महिलाएं प्रधान बनी थीं। वहीं इस साल 12 में से 8 सीटें ही जीत पाईं हैं। इससे पहले वर्ष 2000 में 6, वर्ष 2005 में 7 और वर्ष 2010 में 4 महिलाएं प्रधान बनी थीं।

कांग्रेस : प्रधानी में तोड़ा 20 साल का रिकॉर्ड
कांग्रेस ने पंचायत समिति प्रधान बनाने में पिछले 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। अभी तक के इतिहास में कांग्रेस के इतने प्रधान कभी नहीं बने। आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2000 में भाजपा-2, कांग्रेस-3, निर्दलीय-4, वर्ष 2005 में भाजपा-6, कांग्रेस-1, निर्दलीय-2, वर्ष 2010 में कांग्रेस-6, भाजपा-1, निर्दलीय-2, वर्ष 2015 में भाजपा-8, कांग्रेस-2, वर्ष 2021 में कांग्रेस-10, भाजपा-1 और निर्दलीय-1 प्रधान बने है।

क्रॉस वोटिंग करने वालों पर होगी कार्रवाई: गर्ग
जिला प्रमुख का चुनाव पार्टी और विधायकों ने पूरी ताकत से लड़ा था। निर्णय चुने हुए सदस्य करते हैं। पंचायत समितियों में तो 12 में से 10 प्रधान प्रधान बनाए हैं, बयाना का मुकेश कोली भी कांग्रेस समर्थित ही है। जिला परिषद में क्रॉस वोटिंग करने वाले 5 सदस्यों पर कार्रवाई की जाएगी। इसकी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान तक चली गई है।
-डॉ. सुभाष गर्ग, चिकित्सा राज्यमंत्री

मंत्री-विधायकों का रिपोर्ट कार्ड
राज्यमंत्री डाॅ. सुभाष गर्ग - कांग्रेस हालांकि सेवर की 25 में से 5 सीटें ही जीती। लेकिन, डॉ. गर्ग 24 वोटों का बहुमत जुटाकर कांग्रेस की शकुंतला देवी को निर्विरोध प्रधान बनाने में कामयाब रहे।
राज्यमंत्री भजनलाल जाटव - वैर में कांग्रेस के पास 19 में से 4 सीटें ही थीं। लेकिन राज्यमंत्री भजनलाल की पुत्रवधु साक्षी निर्विरोध प्रधान बन गईं। भुसावर में भी कांग्रेस के पास 19 में से 4 सीटें ही थीं। इसके बावजूद भजनलाल ने कांग्रेस की सुफेदी देवी को निर्विरोध प्रधान बनवाया।
पूर्व मंत्री विश्वेंद्रसिंह - कुम्हेर और डीग में कांग्रेस ने टिकट नहीं दिए। कुम्हेर में कांग्रेस की कविता एक वोट से और डीग में कांग्रेस की शिखा निर्विरोध जीती हैं।
विधायक जाहिदा खान - कामां में 25 से 5 सीटें कांग्रेस को मिलीं। विधायक जाहिदा की बेटी डाॅ. शहनाज 9 वोटों से जीतीं। कामां में 8 सदस्य वोट डालने ही नहीं आए। पहाड़ी में जाहिदा के बेटे साजिद निर्विरोध जीते हैं। जबकि यहां 29 में कांग्रेस के पास 11 वोट थे।
विधायक वाजिब अली - नगर की 29 से कांग्रेस के 8 मेंबर जीते थे। कांग्रेस के आरिफ खान निर्विरोध बन गए।
विधायक जाेगिंदर अवाना - नदबई की 27 में से कांग्रेस के 2 सदस्य जीते। यहां भाजपा की मुन्नीदेवी एक वाेट से जीती हैं। उच्चैन में 15 में से कांंग्रेस के 4 सदस्य ही जीते। विधायक अवाना अपने पुत्र हिमांशु काे निर्विरोध प्रधान बनवाने में कामयाब रहे।
विधायक अमरसिंह - बयाना की 23 में से 3 सीटों पर ही कांग्रेस जीती थी। यहां भाजपा टिकट पर जीते मुकेश काेली निर्दलीय लडे़ और 5 वाेट से प्रधान बन गए। जबकि रूपवास में 23 में से 9 सदस्य होने के बावजूद कांग्रेस की नीतूसिंह निर्विरोध जीती हैं।

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