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भास्कर एक्सक्लूसिव:मेडिकल कॉलेज के दोनों हॉस्टल फुल, 150 नए स्टूडेंट्स को शहर में तलाशना होगा ठिकाना

भरतपुर11 दिन पहले
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अधूरे पड़े क्वार्टर्स।
  • हॉस्टलों में उपलब्ध हैं केवल 146 कमरे, पहले दो बैच में ही 250 स्टूडेंट्स ले चुके हैं प्रवेश, बजट नहीं मिलने से भी आई दिक्कत

राजकीय मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स और बॉयज दोनों ही हॉस्टल अभी से फुल हो गए हैं। हालत यह कि दोनों हॉस्टलों में केवल 146 कमरे उपलब्ध हैं। जबकि पहले दो बैच में ही यहां 250 स्टूडेंट्स प्रवेश ले चुके हैं। अब हाल ही में 13 सितंबर को हुई नीट परीक्षा के बाद 150 स्टूडेंट्स और यहां प्रवेश लेने वाले हैं।

इससे गर्ल्स स्टूडेंट्स को खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि गर्ल्स स्टूडेंट्स को कॉलेज कैंपस में ही रखा जाएगा। भले ही बॉयज स्टूडेंट्स को शहर में किराए के कमरों की व्यवस्था करनी पड़े।

दरअसल, यह समस्या इसलिए आई है क्योंकि मेडिकल कॉलेज का वर्ष 2014-15 से ही निर्माण शुरू हुआ है। अभी तक बहुत जरूरी निर्माण कार्य ही हुए हैं। एमबीबीएस स्टूडेंट्स के लिए बॉयज हॉस्टल में 78 और गर्ल्स हॉस्टल में 68 सिंगल यानि कुल 146 स्टूडेंट रूम हैं।

जबकि वर्ष 2018 में 100 और वर्ष 2019 में 150 यानि 250 स्टूडेंट्स यहां प्रवेश ले चुके हैं। चूंकि पहले दोनों बैच के स्टूडेंट्स प्रमोट होकर यहीं आगे की पढ़ाई कर रहे हैं, इसलिए कमरों की समस्या तो होनी ही है। यही वजह है कि कुछ स्टूडेंट्स को नर्सिंग हॉस्टल और रेजिडेंट डॉक्टर हॉस्टल में रखना पड़ा है।

फिर भी करीब 50 स्टूडेंट्स को जगह नहीं होने की वजह से शहर में किराए का कमरा लेकर रहना पड़ रहा है। अब नीट के बाद एमबीबीएस प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले 150 स्टूडेंट्स के लिए पहली चुनौती शहर में किराए का कमरा खोजना ही होगी।
प्रोफेसर के क्वार्टर भी हैं अधूरेः आवास की समस्या केवल मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए ही नहीं है बल्कि प्रोफेसर को भी उठानी पड़ रही है। क्योंकि पहले फेज में मिला बजट कम होने की वजह से इनके लिए बनाए गए आवास अधूरे रह गए थे।
160 नए कमरे और बनेंगे: 4 मंजिला बॉयज हॉस्टल में एक मंजिल और बढ़ाई जाएगी। इसी तरह गर्ल्स हॉस्टल की 7 मंजिला बिल्डिंग में भी 56 कमरे बनाए जाने का प्रस्ताव है। इस तरह नए बनने वाले 141 कमरों में दो-दो स्टूडेंट रह सकेंगे।
सेकंड फेज का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ
एमबीबीएस स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल में कमरों की समस्या इसलिए है क्योंकि सैकंड फेज का निर्माण कार्य अभी तक शुरू ही नहीं हुआ है। इस मेडिकल कॉलेज का 24 सितंबर 2014 को शिलान्यास हुआ था। वर्ष 2015 में पहले फेज में निर्माण के लिए सरकार ने 189 करोड़ रुपए का बजट दिया था। इसमें से 139 करोड़ से कॉलेज की 6 मंजिला एकेडमिक ब्लॉक की बिल्डिंग का निर्माण हुआ। इसमें एकेडमिक समेत 9 ब्लॉक बनाए गए हैं। आरबीएम के ए ब्लॉक में बेसमेंट और 6 मंजिल, बी ब्लॉक में बेसमेंट और 7 मंजिल का निर्माण हो चुका है। जबकि 50 करोड़ रुपए से उपकरण और फर्नीचर आदि की खरीद जरूरत के मुताबिक की जा रही है।

सेकंड फेज के लिए 2 साल से बजट ही नहीं मिला। पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज की तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ रचना नारायण के प्रयासों से 22 जून, 2020 को आरएसआरडीसी ने सैकंड फेज के लिए 159.61 करोड़ रुपए के प्रस्ताव बनाकर भिजवाए हैं। लेकिन, अभी बजट नहीं मिला है। सरकार ने पिछले माह ही मेडिकल कॉलेज में सैकंड फेज निर्माण के लिए 111.60 करोड़ रुपए का बजट देने की घोषणा की है। लेकिन, अगर अब बजट मिलता भी है तो भी सैकंड फेज का निर्माण कार्य पूरा होने में करीब 2 साल लगेंगे।

नए बैच की गर्ल्स को कॉलेज कैंपस में ही रखेंगे: प्रिंसिपल
यह सही है की हॉस्टल में और कमरों की आवश्यकता है। लेकिन नए बैच की गर्ल्स को कॉलेज कैंपस में ही रखा जाएगा। इसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े। भले ही लड़कों को कॉलेज से बाहर शहर में जाकर रहना पड़े।
डॉ. रजत श्रीवास्तव, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज

बजट मिलते ही निर्माण शुरू होगा
एमसीआई के नियमों के मुताबिक 159.61 करोड़ रुपए का प्रस्ताव 22 जून को राज्य सरकार को भेजा है। बजट मिलते ही निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
एस.एस. मीणा, पीडी, आरएसआरडीसी भरतपुर

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