यम द्वितीया:नरक मुक्ति के लिए भाई-बहनों ने किया यमुना स्नान, 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे मथुरा

भरतपुर20 दिन पहले
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भाई दूज पर नदी में स्‍नान करते भाई-बहन। - Dainik Bhaskar
भाई दूज पर नदी में स्‍नान करते भाई-बहन।

शनिवार को मथुरा के विश्राम घाट पर भाई दूज पर भाई-बहनों का मेला लगा है। विश्राम घाट में भाई-बहनाें हाथ पकड़कर यमुना स्नान किया तथा नरक मुक्ति/यम फांस से बचने की कामना की। साथ ही अगले जन्माें में भी भाई/बहन बनाने की प्रार्थना की। यमुना जी में भाई दौज स्नान के लिए भरतपुर सहित दूर-दराज से 50 हजार से ज्यादा भाई-बहन पहुंचे।

अलसुबह यमुना जी में स्नान किया तथा बहनों ने भाईयों के तिलक कर लंबी आयु की प्रार्थना की। ज्योतिषी मनोज भारद्वाज ने बताया कि सूर्य भगवान की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज और यमुना का जन्म हुआ था। यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती थीं। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया।

बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना के आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन से वर मांगने के लिए कहा।

इस पर यमुना ने कहा कि भाई दूज के दिन अगर इस जगह पर भाई-बहन एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर स्नान करें तो आप उनको यम फांस और नरक से मुक्ति दे दें। इस पर यमराज ने यमुना को ये वरदान दिया। तभी से इस स्थान पर भाई दूज के दिन भाई-बहन हाथ पकड़ कर स्नान करते हैं। इसलिए इस पर्व को ‘यम द्वितीया’ और ‘भ्रातृ द्वितीया’ भी कहा जाता है।

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