अनुजा विकास निगम में 1.32 करोड़ रुपए का घपला:कैशियर ने अपनी मां और 4 अन्य रिश्तेदारों के बैंक खातों में जमा करवा दिए 25 चेक

भरतपुर15 दिन पहले
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अनुसूचित जाति-जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम में 1.32 करोड़ रुपए का घोटाला हो गया। निगम के ही कैशियर ने खुद, अपनी मां और 4 अन्य रिश्तेदारों के खातों में बिना बिल वाउचर के 25 चेक जमा करवाकर यह राशि ट्रांसफर कर ली। अब इसे अफसरों की मिलीभगत कहिए या लापरवाही कि परियोजना प्रबंधक से लेकर अकाउंटेंट तक आंख बंद करके राशि ट्रांसफर के पत्रों पर दस्तखत करते रहे। जब यह मामला खुला तो मामले पर लीपापोती करने के लिए कैशियर के खिलाफ सिर्फ दो एफआईआर 8.67 लाख रुपए व 50.48 लाख रुपए सहित कुल 59.16 लाख के गबन की एफआईआर पुलिस में दर्ज करवा दी।

इसमें से 8.67 लाख रुपए के गबन के एक मामले में कैशियर अतुल कुमार फौजदार गिरफ्तार भी हो गया। लेकिन, बाकी दोषियों को बचाया जा रहा है। यह 1.32 करोड़ रुपए की राशि अनुसूचित जाति-जनजाति के बेरोजगार युवाओं को दिए गए लोन की रिकवरी की थी। यह पैसा निगम के जयपुर मुख्यालय को जाना था। कैशियर अतुल फौजदार का आरोप है कि उसने पूर्व प्रबंधक पूरन सिंह से बहन की शादी के लिए 3 लाख रुपए उधार मांगे थे। इसके लिए पूरन सिंह ने बैंक खातों की डिटेल ली थी। उसी ने पैसा उसमें जमा कराया।

विभागीय जांच में इन अफसरों को माना दोषी
विभागीय जांच में निगम की वर्तमान परियोजना प्रबंधक आरएएस भावना राघव गुर्जर, पूर्व परियोजना प्रबंधक पूरन सिंह और कनिष्ठ लेखाकार सुनील कुमार गुप्ता को भी दोषी मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इन पर आरोप है कि इन्होंने बैंकों से राशि मिलान का काम नहीं किया। बल्कि गबन करने वाले कैशियर और उसके परिजन एवं रिश्तेदारों के खातों में राशि ट्रांसफर से संबंधित पत्रों पर हस्ताक्षर करते गए। इसीलिए कैशियर 1.32 करोड़ रुपए का गबन कर गया।

कैशियर ने ऐसे ट्रांसफर किए 1.32 करोड़ रुपए
कुसुमलता-एक करोड़ 5 लाख 66 हजार 884 रुपए, अतुल कुमार फौजदार- 8 लाख 93 हजार 513 रुपए, संतोष- 5 लाख 90 हजार 485 रुपए, नरेंद्र सिंह-5 लाख 88 हजार रुपए, दुर्गा सिंह-2 लाख 94 हजार रुपए, पुष्पेंद्र सिंह चाहर-2 लाख 94 हजार रुपए।

कैशियर के आरोप गलत हैं, उसने कोई पैसा उधार नहीं लिया: पूरन सिंह
कैशियर अतुल कुमार फौजदार के आरोप झूठे हैं। उसने मुझसे कभी रुपए उधार नहीं लिए। भला ये कैसे संभव है कि कोई व्यक्ति कैशियर, उसके परिजन और रिश्तेदारों के खातों में जबरन पैसा जमा करवा दे। सरकारी पैसा जमा कराने और निकालने का काम कैशियर ही करता था।-पूरन सिंह, पूर्व परियोजना प्रबंधक, अनुजा निगम

दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी : जीएम
गबन में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। रिपोर्ट जिला कलेक्टर को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। आरोपी कैशियर और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ एफआईआर हो चुकी है। भरतपुर कलेक्टर के प्रयास से साढ़े सात लाख रुपए की रिकवरी भी हो गई है। बाकी रिकवरी पुलिस करेगी। -सोहनलाल धानका, महाप्रबंधक, अनुजा निगम जयपुर

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