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अब 3 और बेटियों ने गंवाई जान:डेंगू से 39000 रह गई प्लेटलेट्स, भीड़ से जनाना में भर्ती नहीं हो सकी, जयपुर के रास्ते में बालिका की मौत, ​​​​​​​कामां में लक्ष्मी, बयाना की अंजना ने जयपुर में दम तोड़ा

भरतपुर/कामां/बयाना9 महीने पहले
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भरतपुर. राजकीय जनाना अस्पताल में एक बेड पर एक-एक, दो-छो बच्चे भर्ती। - Dainik Bhaskar
भरतपुर. राजकीय जनाना अस्पताल में एक बेड पर एक-एक, दो-छो बच्चे भर्ती।

जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। बीते 24 घंटों में 3 और बेटियों ने दम तोड़ दिया। इससे पहले भी भरतपुर के निकटवर्ती गुंडवा गांव में भाई-बहन की मौत हो गई थी। शुक्रवार को जान गंवाने वाली बेटियों में 5 वर्षीय कनिष्का कामां के धिलावटी गांव, 16 वर्षीय लक्ष्मी कामां कस्बे में नला बाजार और 11वीं की छात्रा 16 वर्षीय अंजना बयाना में लाल बाग कॉलोनी की रहने वाली हैं। इनमें अंजना की मृत्यु जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में हुई है।

इधर, डॉक्टरों का कहना है कि 16 वर्षीय लक्ष्मी 2 दिन पहले से बुखार पीड़ित थी। लेकिन, जांच के अभाव में उसमें डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है। वैसे भी वह प्राइवेट क्लिनिक पर इलाज करवा रही थी। मृतक कनिष्का के पिता विष्णु ने बताया कि बेटी को 4 दिन पहले बुखार आया था। पहले उसे कामां में दिखाया। वहां से उसे जनाना अस्पताल में रेफर कर दिया। लेकिन, अस्पताल में इतनी भीड़ थी कि उसे भर्ती नहीं कराया जा सका। चूंकि तबीयत बिगड़ रही थी, इसलिए उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। गुरुवार रात अचानक कनिष्का की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। प्लेटलेट्स 39000 ही रह गईं। जयपुर ले जाते समय दौसा के पास कनिष्का ने दम तोड़ दिया।

विष्णु ने बताया कि कनिष्का का छोटे भाई रिंकू यादव को भी डेंगू है। वह भी अस्पताल में भर्ती है और प्लेटलेट्स 40 हजार हैं। इसी तरह बयाना में लाल बाग कॉलोनी निवासी 16 वर्षीय अंजना कुमारी की भी शुक्रवार को जयपुर में मौत हो गई। मृतका के मामा दिनेश ने बताया अंजना को डेंगू पॉजिटिव आया था। उसकी प्लेटलेट्स 58000 रह गई। बाथरूम में ब्लड आने लगा। इसलिए उसे बयाना से जयपुर रैफर किया था।

जनाना में 10 बेड के पीएनसीयू वार्ड पर लगा हुआ है ताला
आरबीएम और जनाना अस्पताल के सभी वार्ड और बेड फुल हो गए हैं। जनाना मेंं तो एक बेड पर 2-3 बच्चे हैं फिर भी गैलेरी में बेड लगाकर अन्य बच्चों को भर्ती किया हुआ है। आरबीएम में भी रोगियों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं। प्रशासन को दोनों अस्पतालों में शुक्रवार को फिर 2-2 नए वार्ड खोलने पड़े हैं। जनाना में हालांकि कोविड-19 के लिए 10 बेड का पीएनसीयू वार्ड तैयार है। लेकिन उस ताला लगा है।

लापरवाही भारी...कई गांवों में नहीं हुई फोगिंग
दरअसल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के अफसरों की लापरवाही भारी पड़ रही है। मेवात क्षेत्र में डेंगू-वायरल और बुखार से अब तक करीब 15 मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद कई गांव ऐसे हैं जहां अब तक न तो एंटी लार्वा एक्टिविटी हुई है और ना ही फोगिंग कराई जा सकी है। ज्यादातर ब्लॉक में फोगिंग मशीनें खराब पड़ी हैं। जिला मुख्यालय के आऱबीएम, जनाना अस्पताल समेत ब्लॉक स्तर पर सीएचसी और पीएचसी के सभी वार्ड रोगियों से भरे पड़े हैं। बयाना में तो ओपीडी 700 को पार कर गई है। लेकिन, कस्बे और आसपास के गांव में अब तक न तो फोगिंग हुई है और ना ही एंटी लार्वा एक्टिविटी। पार्षद नरेश बारैठा और प्रदीप आर्य ने आयुक्त को ज्ञापन देकर फोगिंग कराने की मांग भी की है।

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