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हमारे लिए यह शर्मनाक:जिले में डंपिंग यार्ड और सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने से बन रहे कचरे के पहाड़

भरतपुरएक महीने पहले
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  • 10 में से 5 ब्लॉक में तो ठोस कचरा प्रबंधन का सर्वे तक शुरू नहीं हुआ
  • जिला परिषद बैठक में सीईओ बोले- हमारे लिए यह शर्मनाक

स्वच्छता मिशन के तहत पूरे जिले को ओडीएफ तो घोषित कर दिया गया। लेकिन, ठोस और तरल कचरा प्रबंधन के बुरे हालात हैं। सफाई और डंपिंग की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने से गांव-कस्बों में कचरे के पहाड़ बनने लगे हैं। हालात ये हैं कि जिले के 10 में से 5 ब्लॉक बयाना, डीग, कामां, नदबई और नगर में अभी तक सर्वे तक शुरू नहीं हुआ है। जबकि इसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर है।

बिना जन प्रतिनिधियों के पहली बार हुई जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. अमित यादव ने खुद माना कि यह स्थिति हमारे लिए शर्मनाक है। उन्होंने कचरा प्रबंधन के लिए सर्वे तुरंत शुरू करने को कहा। उल्लेखनीय है कि जिला परिषद का कार्यकाल पूरा हो चुका है। नए चुनाव नहीं होने की वजह से कलेक्टर को प्रशासक लगाया है।

शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में हुई साधारण सभा की बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, विधायक निधि, सांसद निधि, जल जीवन मिशन सहित अन्य योजनाओं की भी समीक्षा करने के साथ ही कई फैसले भी किए गए। सीईओ डॉ. यादव ने कहा जिले में तरल और ठोस कचरा प्रबंधन के लिए इन दिनों मोबाइल एफ के जरिए ऑनलाइन सर्वे चल रहा है।

इस सर्वे के आधार पर ही डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करके सरकार से बजट लिया जा सकता है। इसलिए इस काम में किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। जहां-जहां सर्वे शुरू नहीं हुआ है, वहां सर्वे पूरा करने के साथ ही डंपिंग यार्ड के लिए जमीन चिन्हित की जाए।

पीटीसी प्राचार्य बोले-स्वीकृत 106 शौचालय बने ही नहीं
जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पीटीसी के प्राचार्य विनय मित्र ने बैठक में बताया कि जिले में 366 मॉडल शौचालय स्वीकृत हो चुके हैं। लेकिन, इनमें से 106 तो अभी तक बने ही नहीं हैं। इस पर इन शौचालयों का निर्माण तुरंत शुरू करने के साथ ही नवसृजित भुसावर और उच्चैन पंचायत समिति की 31 ग्राम पंचायतों के लिए सामुदायिक स्वच्छता परिसर एवं आदर्श शौचालय बनाने को मंजूरी दी गई।

पंचायतें दुकानदारों से ले सकती हैं स्वच्छता शुल्क
बैठक में तय किया गया कि ऐसे बड़े गांव जहां बाजार व्यवस्था ठीक है और दुकानों की संख्या अच्छी है। वहां सरपंच व्यापारियों और दुकानदारों से बात करके उनसे मासिक आधार पर स्वच्छता शुल्क ले सकते हैं। इसकी दर ग्राम पंचायत की बैठक में सर्वसम्मति से तय की जानी चाहिए। लेकिन, गांव और बाजार में स्वच्छता बनाए रखने के लिए ग्राम पंचायत को पर्याप्त सफाई कर्मी भी लगाने होंगे।

पोखरों में गंदे पानी को जाने से रोकने के लिए तैयार कराए जाएंगे फिल्टर पिट्स
उन्होंने कहा कि गांवों की पोखरों को लेकर भी विस्तृत योजना बनाई जाएगी। इसके तहत इन पोखरों में गंदे पानी को जाने से रोकने के लिए फिल्टर पिट्स तैयार कराए जाएं। इससे पोखरों का पानी स्वच्छ रहेगा। जरूरत पड़ने पर इस पानी का उपयोग पशुओं के पीने के अलावा फसलों की सिचाई के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नरेगा योजना में ग्राम पंचायत कार्यालयों की चारदीवारी के लिए प्रस्ताव भिजवाएं और नये कार्य भी स्वीकृत कराएं।

सामुदायिक श्रेणी के 5 स्वीकृत कार्य पेडिंग हैं तो नए प्रस्ताव न भेजें
बैठक में निर्देश दिए गए कि ऐसी ग्राम पंचायतें जहां 5 या इससे अधिक सामुदायिक श्रेणी के स्वीकृत कार्य अभी तक पेंडिंग हैं तो वहां के ग्राम विकास अधिकारी सामुदायिक कार्यों के नए प्रस्ताव मंजूरी के लिए न भिजवाएं। इसके साथ ही ग्राम स्तर पर प्रति परिवार मापदंड निर्धारित करके डम्पिंग यार्ड के लिए भूमि चिन्हित करें। तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करें।

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