अच्छी पहल:पिता की इच्छा थी, बेटों ने 6.25 लाख रुपये से बनवाया क्लासरूम

भरतपुरएक महीने पहले
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भामाशाह स्व. मुरारीलाल मित्तल की स्मृति में उनके परिजनों ने सवा छह लाख रुपए खर्च करके क्लास रूम बनवाया गया है। - Dainik Bhaskar
भामाशाह स्व. मुरारीलाल मित्तल की स्मृति में उनके परिजनों ने सवा छह लाख रुपए खर्च करके क्लास रूम बनवाया गया है।

सेवर कस्बे में पिछले साल खुले महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में भामाशाह आगे आकर विद्यालय की जरूरतों को पूरा करने में लगे हैं। जहां क्लास रूम के नाम पर 11 कमरे थे और क्लास 12 हैं, ऐसे में एक क्लास को बैठने के लिए जगह नहीं होने पर उसे ऑफिस के कमरे में बैठाना पड़ रहा था। जिसे देख एक पिता की इच्छा स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए कमरे की कमी को पूरा करने की थी, किंतु वह अपने जीवन में पूरा नहीं कर पाए तो उसके तीन बेटों ने उदारता दिखाई।

पिता की इच्छा पूरी करने के लिए बेटों ने 6.25 लाख रुपए खर्च कर एक बड़े कमरे का निर्माण कराया है और विद्यालय में क्लास रूम की कमी दूर हो गई है। लुधावई हाल जसवंत नगर भरतपुर निवासी गया प्रसाद ने बताया कि उसके मुरारीलाल मित्तल सेवर में संचालित सरकारी विद्यालय की एसडीएमसी के अध्यक्ष रहे थे और वह विद्यालय के बच्चों को प्रोत्साहन देने के लिए अपने पैसों से सम्मानित करते थे।

इसके अलावा वह स्कूल में कुछ न कुछ करते ही रहते थे। पिछले साल इस सरकारी विद्यालय को सरकार ने अंग्रेजी माध्यम का विद्यालय बना दिया गया। इस दौरान उन्हें विद्यालय में क्लास रूम की कमी नजर आई तो उनकी इच्छा एक क्लास रूम बनाने की थी, परंतु 22 अगस्त 2020 को निधन हो गया।

उनकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए तीनों भाइयों महेंद्र मित्तल, दिनेश मित्तल एवं गया प्रसाद मित्तल ने मां गायत्री देवी की प्रेरणा से 6.25 लाख रुपए खर्च करके एक बड़े कमरे का निर्माण कराया है। इतना ही नहीं इस विद्यालय में पिछले एक साल में भामाशाहों ने विद्यालय की सूरत ही बदल दी है और विद्यार्थियों को सुविधाएं जुटाने में लगे हैं। भामाशाह राधेश्याम गर्ग ने फर्नीचर के लिए करीब 1.25 लाख रुपए खर्च कर बच्चों को थ्री शीटर लोहे की बैंच बनवाकर दी है।

विद्यालय में हाल में ही में हमारे पुराने भामाशाह स्व. मुरारीलाल मित्तल की स्मृति में उनके परिजनों ने सवा छह लाख रुपए खर्च करके क्लास रूम बनवाया गया है, जिससे क्लास रूम की कमी दूर हो गई है। इसके सहित अबतक करीब 10 लाख रुपए के कार्य विद्यालय में भामाशाहों की मदद से हुए हैं। -मनीषा चौधरी, प्रिंसीपल

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