विश्व हृदय दिवस आज:हाइपर टेंशन, डायबिटीज और थायरॉइड रोगियों को हार्ट अटैक का ज्यादा खतरा

भरतपुर2 महीने पहले
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  • आरबीएम अस्पताल की ओपीडी में अब रोज आ रहे 30-35 हार्ट रोगी, 2 साल पहले 10-15 ही आते थे

कोरोनाकाल के बाद भरतपुर में हार्ट रोगियों की संख्या बढ़ी है। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल आरबीएम की ओपीडी में 2 साल पहले तक जहां 10-15 रोगी ही आते थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 30 से 35 तक हो गई है। इसका कारण तनावग्रस्त लाइफ स्टाइल के साथ-साथ अत्यधिक अल्कोहल लेना, स्मोकिंग और तेलीय अथवा वसायुक्त भोजन करना है। आरबीएम के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पाल सिंह यादव बताते हैं कि लगातार लोगों की लाइफ स्टाइल और खानपान बदल रहा है। बच्चों के साथ-साथ बड़ों में भी जंक फूड और फास्ट फूड का चलन बढ़ रहा है।

हालांकि हृदय रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। लेकिन, अब कम उम्र वालों को भी अटैक आ रहे हैं। क्योंकि ऐसे लोग फिजिकल वर्क अथवा व्यायाम कम करते हैं। हाइपरटेंशन, मधुमेह, थायराइड रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा हैं। आरबीएम अस्पताल में हर महीने हाइपरटेंशन के 12 से 14 हजार और डायबिटीज के 11 से 12 हजार मरीज आते हैं। आरबीएम की अधीक्षक डा. जिज्ञासा साहनी का कहना है कि हृदय रोगियों के लिए अब ईसीजी के साथ अब 2डी इको और सीटीएमटी की जांच सुविधा आरबीएम में उपलब्ध है।

अगर, ये लक्षण हैं तो अलर्ट हो जाएं
सीने में दर्द। चलने-फिरने में सांस फूलना। घबराहट या पसीने-पसीने होना। अचानक धड़कन बढ़ जाना। चक्कर आना आदि।

ऐसे बच सकते हैं हृदय रोग सेः जंक या फास्ट फूड से परहेज करें। फल और हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन करें। भोजन में नमक, घी और तेज मसालों का प्रयोग कम करें। रोजाना सुबह-शाम पैदल घूमें।

एक्सपर्ट व्यू... कम उम्र में बढ़ते हृदय रोग चिंता का विषय
शहर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक अब 30 से 40 वर्ष के युवाओं में हार्ट अटैक बढ़ रहा है। पहले यह सामान्यतः 50 वर्ष के बाद होता था। इसलिए 30 साल के बाद ही हर व्यक्ति को अपना रूटीन चेकअप करवाते रहना चाहिए। क्योंकि नसों में खून का थक्का जम जाता है, नसें ब्लॉक होने और तत्काल उपचार नहीं मिलने से हार्ट अटैक के कारण रोगी की मौत तक हो सकती है। 20 से 30% मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें हार्ट अटैक आने से 15-20 दिन में कोई ना कोई तनाव रहा होता है।

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