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ये कैसी ट्रेनिंग:रिटायरमेंट की एज में नर्सिंग कर्मियों को बता रहे हैं बीपी कैसे चैक करते हैं

भरतपुर8 महीने पहले
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  • आरबीएम में हालात बिगड़े, 15-20 साल नौकरी कर चुके 83 नर्सिंग कर्मियों को मेडिकल कॉलेज बुलाया
  • ट्रोमा जैसे इमरजेंसी वार्ड में तो एक-एक नर्सिंग कर्मी ही दे रहा ड्यूटी

संभाग के सबसे बड़े अस्पताल आरबीएम में पिछले 5 दिन से नर्सिंग कर्मियों की कमी की वजह से हालात बिगड़े हुए हैं। हालांकि राज्य सरकार ने कोविड-19 के हालात को काबू में करने के लिए तत्काल व्यवस्था करते हुए दूसरी जगहों से करीब 89 नर्सिंग कर्मियों को यहां लगाया है। इनमें 83 नर्सिंग कर्मियों को ट्रेनिंग के नाम पर मेडिकल कॉलेज में बुलवा लिया गया है।

रोचक बात यह है कि इनमें ज्यादातर फ़र्स्ट और सैकंड ग्रेड के वे नर्सिंग कर्मी हैं जो 15 से 20 साल की नौकरी पूरी कर चुके हैं और अब रिटायरमेंट के नजदीक हैं। इधर, नर्सिंग कर्मियों की कमी की वजह से अस्पताल में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। रोगियों को संभालने के लिए नर्सिंग स्टाफ ही नहीं है। हर जगह एक-दो नर्सिंग कर्मी ही रह गए हैं।

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार ने संभाग के विभिन्न जिलों में कार्यरत अनुभवी सेकंड और फ़र्स्ट ग्रेड के 50 नर्सिंग कर्मियों को कोरोना की वजह से आरबीएम अस्पताल में लगाया था। इनमें से 44 नर्सिंग कर्मियों ने अस्पताल आकर ड्यूटी ज्वाइन भी कर ली थी। इनमें से 25 अनुभवी नर्सिंग कर्मियों को कोरोना वार्ड में लगाया गया और वह बखूबी कार्य कर रहे थे।

इनके अलावा 10 नर्सिंग कर्मियों को अन्य वार्डों में और 8 नर्सिंग कर्मियों को राजकीय जनाना अस्पताल में लगाया गया था। एक अन्य नर्सिंग कर्मी ने हाल ही में ड्यूटी ज्वाइन की थी। लेकिन, इन सभी को मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ रजत श्रीवास्तव के आदेश से 9 अक्टूबर को आरबीएम अस्पताल से हटाकर मेडिकल कॉलेज में बुला लिया गया।

इतना ही नहीं नए पदस्थापित 39 नर्सिंग कर्मियों को भी मेडिकल कॉलेज में बुला लिया गया है। इस तरह 83 नर्सिंग कर्मियों के एक साथ और एक ही समय में ट्रेनिंग पर चले जाने से अस्पताल की व्यवस्थाएं बिगड़ गई हैं।

इधर, नर्सिंग एसोसिएशन का दावा है कि सभी नर्सिंग कर्मी पूरी तरह ट्रेंड हैं। इनमें कई तो रिटायरमेंट के नजदीक और सीएचसी, पीएचसी के प्रभारी तक बने हुए हैं। ये लोग अब तक नर्सिंग ट्रेनिंग करने वाले स्टूडेंट्स को अस्पतालों में ट्रेनिंग भी देते रहे हैं।

इन्हें अब बेसिक ट्रेनिंग दिए जाने का क्या औचित्य है, वह भी ऐसे समय में जब हालात कोरोना की वजह से लगभग बेकाबू हों। इससे अस्पताल की व्यवस्थाएं भी चलती रहती और ट्रेनिंग भी हो जाती। जबकि अब कोरोना वार्ड में नर्सिंग स्टाफ की कमी हो गई है। ट्रोमा जैसे इमरजेंसी वार्ड में तो एक-एक नर्सिंग कर्मी ही ड्यूटी दे रहा है।

ट्रेनिंग के लिए सभी नर्सिंग कर्मियों को एक साथ बुलाना गलत: रविन्द्र
आरबीएम एवं जनाना अस्पताल में सरकार ने 89 नर्सिंग कर्मचारियों की पोस्टिंग दी है। सभी को एक साथ 10 दिन की ट्रेनिंग के लिए मेडिकल कॉलेज में बुला लिया गया है। जो गलत है। ट्रेनिंग में बेसिक चीज ही बताई जा रही है, जैसे बीपी कैसे लेते हैं, पल्स कैसे चेक की जाती है। ग्लब्स, पीपीई किट, मास्क कैसे पहना जाता है।

इसके लिए भी सभी नर्सिंग कर्मी सुबह 9 से 3 बजे तक मेडिकल कॉलेज में ही रहते हैं। इससे हॉस्पिटल की व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं। ट्रोमा इमरजेंसी एवं वार्ड में एक-एक व्यक्ति काम कर रहा है। वार्डों में वर्क लोड बढ़ गया है, क्योंकि एक तरफ कोरोना और दूसरी ओर मौसमी बीमारियां बढ़ने से हॉस्पिटल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। -रविंद्र पाल सिंह, जिलाध्यक्ष, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन

ट्रेनिंग के लिए बुलाया: पीएमओ

  • मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग कर्मियों को एएलएस ट्रेनिंग और ओरिएंटेशन कोर्स के लिए बुलाया गया है। लेकिन, अगर इन्हें अलग-अलग बैच में भेजा जाता तो ज्यादा ठीक रहता। अगर, सभी को एक साथ भेजा गया है तो इस संबंध में नर्सिंग अधीक्षक से बात करके स्टाफ की उचित व्यवस्था की जाएगी। - डॉ नवदीप सैनी पीएमओ,आरबीएम अस्पताल

सीधी बात , डॉ. रजत श्रीवास्तव, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज

सवाल : आरबीएम अस्पताल के सभी नर्सिंग कर्मियों को मेडिकल कॉलेज क्यों बुलाया है?
जबाव- उनकी बेसिक जानकारी जैसे पीपीई किट कैसे पहनें और कैसे उतारें, कोरोना और आईसीयू में कैसे काम किया जाए आदि की ट्रेनिंग कराई जा रही है।
सवाल : लेकिन, इनमें कई नर्सिंग कर्मी तो रिटायरमेंट के नजदीक हैं। क्या उन्हें इनकी बेसिक नॉलेज भी नहीं है?
जवाब- ट्रेनिंग या सीखने की कोई लिमिट नहीं होती। पहले कहां कोरोना था जो इन्होंने पीपीई किट पहनना और उतारना सीखा है।
सवाल : इन्हें तो बीपी चैक करना, पल्स रेट पता करने जैसी बेसिक जानकारी ही बताई जा रही है।
जवाब- ट्रेनिंग में इनके अलावा और भी बहुत सी चीजें बताई जा रही हैं, जो इन्हें पहले से पता नहीं हैं।
सवाल : सभी 83 नर्सिंग कर्मचारियों को एक साथ बुलाने के बजाए बैच बनाकर ट्रेनिंग नहीं दी जा सकती क्या?
जबाव- हर किसी को बार-बार या अलग-अलग नहीं सिखाया जा सकता है, इसलिए एक साथ ट्रेनिंग दी जा रही है।
सवाल: लेकिन, इन्हें एक साथ बुलाने से तो अस्पताल की व्यवस्थाएं बिगड़ गई हैं।
जवाब- इन नर्सिंग कर्मियों की ज्वॉइनिंग से पहले भी तो अस्पताल चल रहा था। ट्रेनिंग के बाद ड्यूटी लगाने से व्यवस्थाएं सुधरेंगी।

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