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  • Jaipur King Madho Singh Built A Grand Temple 110 Years Ago Near Ladliji Temple In Barsane, But Radharani Did Not Sit Here Till Date.

राधाष्टमी:जयपुर नरेश माधोसिंह ने 110 साल पहले बरसाने में लाडलीजी मंदिर के पास बनवाया भव्य मंदिर, लेकिन यहां आज तक नहीं विराजीं राधारानी

बरसाना12 दिन पहले
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  • मंदिर निर्माण पूरा होने पर सैनिकों के साथ जयपुर जाते हुए एक सेवायत की रास्ते में हो गई थी मृत्यु, इसी को राधारानी की अनिच्छा माना
  • जयपुर मंदिर में 8 साल बाद दूसरे विग्रहों को किया गया विराजमान, अब पार्किंग स्थल बना

राकेश श्रोत्रिय

भगवान श्रीकृष्ण की प्रेयसी राधारानी के लिए जयपुर नरेश माधोसिंह ने 110 साल पहले बरसाने के ब्रह्मगिरि पर्वत पर मौजूदा लाड़ली जी मंदिर से मात्र 100 मीटर दूरी पर ही भव्य मंदिर बनवाया था। लेकिन, राधारानी आज तक इसमें विराजमान नहीं हुईं। क्योंकि मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद राजा माधोसिंह ने सैनिक भेजकर मंदिर के सेवायतों को जयपुर दरबार में बुलवाया था। लेकिन, भरतपुर से आगे निकलते ही 12 में से 1 सेवायत की मृत्यु हो गई। इसे राधारानी की अनिच्छा मानकर सभी सेवायत वापस बरसाना लौट आए थे।

बताते हैं कि जयपुर नरेश माधोसिंह राधारानी के दर्शन करने बरसाना आए थे। दर्शन के बाद उनकेे मन में राधा किशोरी जी के लिए महल बनाने की इच्छा हुई। क्योंकि उन्हें वह मंदिर उनके लिए काफी छोटा लगा। इस पर राजा माधोसिंह ने वहां के सेवायतों से इसके लिए बातचीत की। सेवायतों ने श्रीजी के लिए नया महल बनाने की स्वीकृति दे दी थी।

इस तरह वर्ष 1911 में राजा माधोसिंह ने अपनी महारानी कुशल कंवर के नाम से नए मंदिर का निर्माण कराया। लेकिन, मंदिर निर्माण के बाद महाराजा के बुलावे पर जब तीन थोक के सेवायत सैनिकों के साथ जयपुर नहीं पहुंचे तो राजा ने इसका कारण जानना चाहा। इस पर उन्हें एक सेवायत की रास्ते में मृत्यु होने और राधारानी की अनिच्छा के बारे में बताया गया।

इसके बाद राजा माधोसिंह खुद बरसाने आए। उन्होंने सेवायतों से बात की तो सेवायतों ने राजा माधोसिंह को बताया कि नए मंदिर में जाने को राधारानी जी की इच्छा नहीं है। काफी प्रयासों के बाद भी जब राधारानी नए मंदिर में नहीं गईं तो 8 साल बाद यानि 1918 में कुशल बिहारीजी, हंस गोपालजी, लड्डू गोपालजी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। इनकी सेवा पूजा के लिए निम्बार्क सम्प्रदाय के राधेश्याम ब्रह्मचारी को नियुक्त किया गया। आजादी के बाद यह मंदिर अब देवस्थान विभाग के अधीन है।

बंशी पहाड़पुर के बादामी पत्थर से हुआ मंदिर निर्माण

जयपुर मंदिर के नाम से विख्यात बरसाना के कुशल बिहारी मंदिर का निर्माण बंशी पहाड़पुर के बादामी कलर वाले पत्थर से हुआ है। इसमें बेहतरीन नक्काशी और चित्रकारी है। दीवारों पर भगवान राधा-कृष्ण की द्वापर युगीन लीलाओं का चित्रण है। इसमें ब्रज भूमि में की गईं लीलाओं को देखकर भक्त आनंदित होते हैं।

इसकी भव्यता को देखकर ही लगता है कि यह मंदिर नहीं बल्कि किसी राजा का महल है। मंदिर के चारों तरफ दो मंजिला बड़े-बड़े कमरे बने हुए हैं। जबकि बीच में मंदिर है। पहाड़़ी पर होते हुए भी इसमें पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है।

राधाष्टमी कल...बिहारीजी में जन्माभिषेक में श्रद्धालु नहीं हो सकेंगे शामिल
भरतपुर के मंदिरों में 14 सितंबर काे राधाष्टमी पर कार्यक्रम ताे हाेंगे, लेकिन काेराेना के कारण श्रद्धालु शामिल नहीं हा़े सकेंगे। बिहारीजी मंदिर किला के पुजारी मनेाज भारद्वाज ने बताया कि सुबह 4 बजे जन्माभिषेक हाेगा। सुबह 5 बजे चरण दर्शन हाेंगे। चरण दर्शन साल में केवल एक बार ही हाेते हैं। बाद में राधाजी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में खीर-पुए की प्रसादी का भाेग लगाया जाएगा। बुध की हाट माेहन जी मंदिर के पुजारी जगमोहन मुदगल ने बताया कि मंगलवार काे सुबह 4 बजे जन्म आरती हाेगी तथा 4.30 बजे 101 किलाे पंचामृत से वेदपाठ के साथ राधाजी का जन्माभिषेक हाेगा।
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