पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कोरोनाकाल में बड़ा भ्रष्टाचार:कामां नगर पालिका ने पहले कोटेशन पर 19.80 रुपए की दर से खरीदे थे 7000 मास्क, टेंडर में 8.90 रुपए ही कीमत आई

कामां12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
कामां नगर पालिका ने उस दौरान जो मास्क 19.80 रुपए में खरीदा था, दुबारा टेंडर करने पर उसी की रेट 8.90 रुपए ही आई है। - Dainik Bhaskar
कामां नगर पालिका ने उस दौरान जो मास्क 19.80 रुपए में खरीदा था, दुबारा टेंडर करने पर उसी की रेट 8.90 रुपए ही आई है।
  • नए टेंडरों में न्यूनतम रेट पर भी नहीं दिया था वर्क ऑर्डर
  • डर था कि कहीं ऑडिट में घपला न पकड़ा जाए, शिकायतबाजी से हुआ खुलासा

कोरोनाकाल में अस्पतालों में जब लोग जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे थे, तब कुछ बेईमान अफसर मास्क और फेसशील्ड जैसी जीवनरक्षक चीजों में भी भ्रष्टाचार कर रहे थे। कामां नगर पालिका ने उस दौरान जो मास्क 19.80 रुपए में खरीदा था, दुबारा टेंडर करने पर उसी की रेट 8.90 रुपए ही आई है। इससे नगर पालिका कर्मियों में हड़कंप मच गया।

वहीं कस्बे में भी इस भ्रष्टाचार की चर्चा है। क्योंकि तब बिना टेंडर केवल कोटेशन के आधार पर कस्बे की ही दो फर्मों से करीब 1.50 लाख रुपए में 7000 मास्क और फेस शील्ड खरीदे गए थे। इसका खुलासा तब हुआ जब कामां नगर पालिका ने दुबारा मास्क खरीदने के लिए 28 मई, 2021 को फिर 5 लाख रुपए की लागत से मास्क खरीदने के टेंडर किए थे।

इसके लिए 2 जून को अलग-अलग फर्माे ने अपनी-अपनी रेट के टेंडर डाले। इसमें श्रीजी मेडिकल स्टोर की न्यूनतम दर 8.90 रुपए थी। लेकिन, उसे आज तक वर्क ऑर्डर नहीं दिया गया। इसकी वजह यह बताई गई कि अगर इस न्यूनतम दर पर मास्क खऱीदते हैं तो पहली खरीद को लेकर ऑडिट ऑब्जेक्शन हो सकता है। क्योंकि तब बिना टेंडर खरीदे गए थे। इसलिए अब कोरोना खत्म होने का बहाना बनाकर फर्म को सप्लाई आदेश ही नहीं दिए।

इधर, सामाजिक कार्यकर्ता विजय मिश्रा ने कहा है कि कोरोनाकाल में नगर पालिका में हुए घोटालों के सबूत जुटाए जा रहे हैं। साक्ष्य और सबूतों के साथ इसकी लोकायुक्त को शिकायत की जाएगी। ताकि उनकी जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। वैसे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को इसकी स्वत: जांच करनी चाहिए।

मास्क के लिए कोरोना खत्म होने का बहाना, दूसरे दिन ही खरीदी फेसशील्ड

रोचक तथ्य यह है कि नगर पालिका ने फेस मास्क के लिए 8.90 रुपए की न्यूनतम दर देने वाली फर्म को यह कहकर सप्लाई ऑर्डर नहीं दिया कि अब कोरोना समाप्त हो गया है। अगले दिन ही यानि 3 जून को एक अन्य मेडिकल फर्म से 160 रुपए की दर से 96 हजार रुपए में 600 फेस शील्ड खरीद लीं। बाजार में फेस शील्ड की रेट भी 30 से 33 रुपए तक ही बताई गई है।

कोई घोटाला नहीं, मास्क और फेस शील्ड नियमानुसार ही खरीदे - ईओ

मास्क और फेस शील्ड की खरीद में घोटाले की बात सही नहीं है। यह दो फर्मों की आपसी प्रति स्पर्धा का मामला है। कोरोनाकाल के दौरान पीक में सख्त जरूरत की वजह से नियमानुसार ही मास्क और फेसशील्ड की खरीद की गई थी। उस दौरान डिमांड-सप्ताई के आधार पर इन चीजों के रेट ज्यादा थे।
- श्याम बिहारी गोयल, ईओ नगर पालिका कामां