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धर्म-समाज:वृंदावन कुंभ में पहली बार खालसा किन्नर अखाडे़ को मिली एंट्री

भरतपुर14 दिन पहले
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  • किन्नरों के प्रति बदल रही है सोच, फिल्मों मेंे काम कर चुकी महामंडलेश्वर हेमांगी सखी ने 30 साथियों संग जमाया अखाड़ा

वृन्दावन के कुंभ में पहली बार खालसा किन्नर अखाडे़ को एंट्री मिली है। महामंडलेश्वर हेमांगी सखी ने अपने 30 साथियों संग यहां अखाड़ा जमा लिया है। किन्नर अखाड़ा अब श्रद्धालुओं से भी आबाद होने लगा है। क्योंकि यह अनूठा है। इसलिए श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुंच रहे हैं। अखाड़ा परिसर में राधे-कृष्ण के भजन, ढोलक की थाप और तालियों की गूंज श्रद्धालुओं को मोह रही है। महामंडलेश्वर हेमांगी सखी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रही है। बीच-बीच में धर्म और शास्त्रों पर चर्चा भी करती हैं। फिल्मों में काम कर चुकी महामंडलेश्वर हेमांगी सखी ने बताया कि राधा-कृष्ण के प्रेम में रची-बसी ब्रज की रज उन्हें हमेशा ही खींचती आई है।

उन्हें जब भी मौका मिला वे वृंदावन अपने ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन करने जरूर आई हैं। वैष्णव कुंभ में हमारे अखाडे़ को अनुमति मिलना समाज की बदलती सोच का नमूना है। समाज अब सभी को सम्मान दे रहा है। धर्म में तो हम पहले भी थे। लेकिन, किन्नर शब्द के कारण हम हमेशा उपेक्षित रहे। हम भी सनातन धर्म का ही हिस्सा हैं और अपने इस अहसास को जिंदा रखने के लिए हमने किन्नर अखाड़ा बनाया है। यह हमारे लिए गौरव का समय है।

भागवत कथा की मर्मज्ञ होने पर मिली उपाधि
फिल्मों में काम करने के साथ ही महामंडलेश्वर हेमांगी सखी ने भागवत और शास्त्रों का अध्ययन भी जारी रखा। उन्होंने बताया कि फिल्मों में काम मजबूरी थी। वर्ष 2019 में साधु समाज के सम्मेलन में संतों के साथ भागवत पर चर्चा और प्रवचन हुए। इससे प्रभावित होकर गौरीशंकर महाराज ने उन्हें पशुपति नाथ में महामंडलेश्वर की उपाधि से नवाजा। वृंदावन वैष्णव कुंभ में किन्नर महा मंडलेश्वर को भी स्थान मिला है। यहां उन्हें खालसा किन्नर अखाड़े के तौर पर अनुमति मिली है।

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