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15 साल बाद लौटी याददाश्त:पुरानी फोटोज देखते ही पत्नी और बेटे को पहचान गया कोलेश्वर प्रसाद, अब घर लौटा

भरतपुर11 दिन पहले
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भरतपुर. अपना घर आश्रम में प्रभूजी को लेने पहुंचा झारखंड से आया परिवार। - Dainik Bhaskar
भरतपुर. अपना घर आश्रम में प्रभूजी को लेने पहुंचा झारखंड से आया परिवार।
  • झारखंड के हजारी बाग से वर्ष 2006 में लापता हुआ था कोलेश्वर, यहां अपनाघर आश्रम में रह रहा था

करीब 15 साल पहले झारखंड के हजारी बाग से अचानक लापता हुए कोलेश्वर प्रसाद की बुधवार को उस समय याददाश्त लौट आई जब उसने लंबे समय बाद अचानक परिवार वालों को अपने सामने देखा। इस लंबे अंतराल में बच्चे बड़े हो चुके थे। एक बेटी की शादी हो गई और बेटे दुकान चला रहे हैं। पत्नी भी आंगनबाड़ी में काम करके घर खर्च चला रही थी। इतने लंबे समय बाद परिवार का इस तरह मिलन होने पर सभी की आंखें भर आईं।

बाद में अपनाघर प्रबंधन ने कोलेश्वर प्रसाद को परिवार के साथ उसके घर भेज दिया। अपनाघर प्रबंधन के मुताबिक कोलेश्वर प्रसाद मानसिक रूप से कमजोर है। घर से लापता होने के बाद वह इधऱ-उधर भटकता रहा। किसी ने मानसिक विमंदित देख उसे अपनाघर आश्रम में भिजवा दिया। यहां उसका इलाज कराने के साथ ही काफी देखभाल की गई।

जब वह थोड़ा ठीक हुआ तो जैसे-तैसे उसके घर-परिवार और पते-ठिकाने के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि वह हजारी बाग (झारखंड) का रहने वाला है। हालांकि वह बहुत ज्यादा कुछ बता नहीं पा रहा था। लेकिन, जितनी सूचना मिली, उसी के आधार पर परिजनों को स्थानीय थाने के माध्यम से सूचित किया गया। उधर, कोलेश्वर प्रसाद के अचानक गायब होने से घर वाले भी काफी परेशान थे।

उसके भरतपुर में होने की सूचना मिलते ही परिजन यहां आ गए। कोलेश्वर के परिजनों ने बताया कि उसका झारखंड के बांके अस्पताल में इलाज चल रहा था। लेकिन, एक दिन वह अचानक गायब हो गया। उन्होंने उसे काफी तलाश किया। लेकिन, कोई पता नहीं चला। इससे पत्नी, पुत्री और दो पुत्र काफी परेशान हो गए। उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सन 2008 में पत्नी ऊषा को आंगनबाड़ी में रोजगार मिल गया। इससे उसने बेटी की शादी कर दी और बच्चों को दुकान खुलवा दी। इससे घर खर्चा चलने लगा।

याददाश्त लौटी तो परिजनों से वीडियो कॉलिंग से की बातचीत
अपनाघर प्रबंधन के मुताबिक कोलेश्वर प्रसाद (प्रभुजी) को लेने उसकी पत्नी ऊषा, छोटा पुत्र विकास और दामाद शशि भूषण प्रसाद लिवाने आश्रम में आए थे। जब कोलेश्वर प्रसाद को इनके बारे में बताया गया तो वह कुछ समझ नहीं पाया। लेकिन, जब उसे परिजनों ने रूबरू मिलाया तो उसकी याददाश्त लौट आई। फिर वीडियो कॉलिंग के जरिए अन्य परिजनों से बात कराने के साथ ही उसे कुछ पुरानी फोटोज भी दिखाई गई थीं। पुराने फोटो दिखाने के बाद उसने अपने बेटे विकास और पत्नी ऊषा को पहचान लिया। पत्नी भी इतने लंबे समय बाद अपने सुहाग को देखकर आंसू नहीं रोक पाई। बाद में उन्हें झारखंड के लिए रवाना कर दिया गया।

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