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भुसावर:शिक्षण संस्थान खुलने से जिंदगी के पटरी पर आने की उम्मीद

भरतपुर2 महीने पहले
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पिछले दस माह से स्कूल-काॅलेज बंद रहने के कारण निजी विद्यालयों व महाविद्यालयों में कार्यरत निजी शिक्षक व कर्मचारी बेरोजगारी का दंश झेलने के साथ आर्थिक संकट से जूझ रहे है। वैश्विक महामारी कोविड-19 कोरोना वायरस के कारण देशभर में लगे लाॅकडाउन के दौरान शिक्षण संस्थाएं बंद रही। इनमें कार्यरत शिक्षक व कर्मचारी पिछले 10 माह से घर बैठे है।

ये शिक्षित होने के बावजूद अपने परिवार का पालन पोषण करने में अपने को असहाय महसूस कर रहे है। केन्द्र व राज्य सरकारों ने इन्हें किसी भी प्रकार से मदद नहीं करने पर सरकार इनकी दयनीय स्थिति को देखते हुए भी गंभीर नही रही। ऐसे में निजी शिक्षक, कर्मचारी लम्बे समय से विद्यालय खुलने का इंतजार कर रहे थे। इसके साथ ही ये मजदूरी या अन्य कार्य करने को विवश हुए। अब जाकर निजी शिक्षण संस्था के शिक्षक कर्मचारियों को जिंदगी पुनः पटरी पर लौटने पर प्रसन्नता है।
स्कूल खुलेंगे तब मिलेगी नौकरी: कोरोना महामारी के कारण निजी विद्यालयों में न के बराबर विद्यार्थियों के प्रवेश हुए है। अध्ययन नहीं होने विद्यालय बंद रहने के चलते अधिकतर विद्यार्थियों ने निजी विद्यालयों से टीसी कटवा कर सरकारी विद्यालयों में प्रवेश ले लिया है। जिससे फीस कम देनी पडे। साथ ही सरकारी गाइडलाइन के अनुसार नए सत्र के शिक्षण कार्य को शुरू करने की अनुमति अभी मिल पाई है।

कोरोना महामारी ने संसार में सब कुछ बदल दिया है। लोगों का शहरों से पुनः गांवों में पहुंचने तथा रोजगार छिन जाने से कई शिक्षित युवा मजदूरी करने को मजबूर हुए है। ज्ञात रहे जिन हाथों में लगभग 10 माह पूर्व कलम हुआ करती थी, वहीं आज मिट्टी-पत्थर ढो रहे है तो कई खेतों में फावड़ा चलाने को मजबूर रहे। आर्थिक तंगी के चलते अधिकतर निजी शिक्षकों ने अपना रोजगार ही बदल लिया था।

अब जाकर स्कूल खुलने पर उनकी आस जगी है। सरकारी विद्यालयों के बच्चों को कोरोना काल मे शिक्षा से जोड़ कर रखने के लिए आन लाइन पढाई कराई गई। लेकिन ग्रामीण परिक्षेत्र में नेटवर्क समस्या के साथ अभिवावक बच्चों को स्मार्ट फोन दिलाने के लिए सक्षम नहीं थे। ऐसे में विद्यार्थियों के साथ अभिवावक खासे परेशान रहे।

सत्र के अंत मे सही स्कूल खुलने से जिंदगी पुनः पटरी पर लौटने की आस जगी है। इस बारे में रमेश चंद ने बताया कि वह पति-पत्नी दोनों ही निजी विद्यालय में पढ़ाकर जीवन यापन कर रहे थें। जिंदगी अच्छी खासी पटरी पर चल रही थी। अचानक कोरोना आया और विद्यालय बंद हो गए और दोनों का रोजगार छिन गया।

एक साथ ही अच्छी खासी जिंदगी बेरोजगारी के दलदल में फंसकर रहे गई। निजी विद्यालय शिक्षक ओम प्रकाश सिरोहिया ने बताया कि वे एक निजी शिक्षण संस्थान में पढ़ाकर परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। लेकिन महामारी के चलते बेरोजगार हो जाने पर मजदूरी करने को विवश है। सरकार से जरूरी नाराजगी है कि सरकार द्वारा निजी शिक्षकों को कोई पैकेज नहीं दिया गया।

गुरु आत्म बल्लभ आईटीआई संचालक पवन सिंघल डंडेबाज ने बताया कि उनका आईटीआई संस्थान कोरोना के चलते बंद पड़ा है। उन्होंने सरसो पिराई के लिए स्पेलर लगाया जिससे परिवार का पालन पोषण कर रहे है। शिक्षा इस कोरोना काल में मूक दर्शक बनकर रह गई।

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