परेशानी / टिड्डियों का लगातार तीसरे दिन हमला, भगाते वक्त छत से गिरी महिला

Locusts attacked for the third consecutive day, a woman fell from the roof while blowing
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Locusts attacked for the third consecutive day, a woman fell from the roof while blowing

  • भरतपुर शहर में पहली बार दिखा टिड्डी दल, लोगों ने छतों पर चढ़ बर्तन बजाकर भगाया

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:50 AM IST

भरतपुर. चाइनीज कोरोना वायरस के साथ-साथ अब पाकिस्तान से आए टिड्डी दल ने भी हमला कर दिया है। हालांकि भरतपुर जिले में मंगलवार को इन टिडि्डयों ने लगातार तीसरे दिन अटैक किया। खरीफ की 37 हजार हैक्टेयर में ही बुवाई होने के कारण ये फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाईं। लेकिन, सब्जियों और बगीचों में फलों को थोड़ा-बहुत नुकसान पहुंचाया है।

भुसावर कस्बे में टिड्डी दल को बर्तन बजाकर उड़ाते वक्त संतुलन बिगड़ने से 38 वर्षीय लक्ष्मी देवी गिरकर घायल हो गई। टिड्डी दल के लगातार हमले से किसान बेचैन हैं। कुम्हेर संवाददाता के मुताबिक मंगलवार को आजऊ, नगला गुर्जर, धनवाड़ा, सिकरोरी, रूंध हेलक, सुपावस, तमरेर, गांगसोली, बरताई, तालफरा, डीड़वारी, हेलक, करूंआ आदि गांवों में टिड्डी दल पहुंचने से किसानों में हड़कंप मच गया। इसी तरह जनूथर क्षेत्र में भी करीब 1 वर्ग किलोमीटर आकार वाले टिड्डी दल को देख किसान दहशत में आ गए। 

वहीं भरतपुर शहर में मंगलवार को पहली बार टिड्डी दल देखा गया। शहर के ऊपर हजारों की संख्या में मंडरा रही टिड्डियों को देखकर गली-मोहल्लों और बाजारों में अफरा-तफरी का सा माहौल हो गया। लोग छतों पर चढ़ गए और बर्तन बजाकर टिडि्डयों को भगाने लगे। इस दौरान कई जगहों पर लोग मोबाइल से वीडियो बनाते दिखे। 
कृषि विभाग के मुताबिक पहले दो दिन ये टिड्डियां पश्चिम से हवा के साथ आईं थीं। जबकि मंगलवार को सुबह 11 बजे पूर्वी दिशा उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश की ओर से हवा के साथ भरतपुर में घुस गईं।

इन टिडि्डयों के एक से अधिक दल होने के कारण ये जिलेभर में फैल गए। इनमें एक दल नाहरोली, जनूथर और नगर तक पहुंचा, वहीं दूसरे दल ने नदबई को क्रॉस किया। तीसरा दल भूतौली, पथैना, खेड़ली, अलवर की ओर चला गया। करीब 5 हजार फुट ऊंचाई तक उड़ने वाला यह टिड्डी दल पेड़, पौधे, झाड़ियों आदि जहां भी बैठा, वहीं वनस्पति को चट कर गया। जिले में हालांकि खरीफ की बुवाई अभी शुरूआती अवस्था में है। इसलिए ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।

केवलादेव घना से भगाया टिड्‌डी दल

इधर, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से भी जिला प्रशासन एवं वन विभाग की टीमों ने टिड्डी दल को भगाया। नहीं तो वहां भी बड़ी मात्रा में वनस्पति को नुकसान पहुंचाने की आशंका थी। उपवन संरक्षक (वन्यजीव) मोहित गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को टिड्डी दल के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में प्रवेश की सूचना मिलने पर आपदा प्रबंधन दलों द्वारा वाहनों के सायरन बजाए गए।अग्नि प्रबंधन दल द्वारा लकड़ी जला कर धुआं किया गया। इसमें ग्रामीणों ने भी सहयोग किया। इससे टिड्डी दल आगे निकल गया।

समस्या बन सकती हैं टिडि्डी

आम तौर पर ये टिडि्डयां रेगिस्तान में ही अंडे देती हैं और अधिक तापमान में ही उड़ती हैं। लेकिन, इस बार इनका प्रकोप हर मौसम में देखा जा रहा है। चूंकि अब इनका प्रजनन काल (जून से अक्टूबर तक) शुरू हो गया है। क्योंकि एक टिड्डी एक बार में 150 तक अंडे देती है। बाद में इनकी संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
डॉ. उदयभान सिंह, डीन कृषि महाविद्यालय भरतपुर

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