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नगर निगम की कचरा पॉलिटिक्स:मेयर से मिलने आए सफाई कर्मियों के नेता महेश वाल्मीकि की पिटाई

भरतपुर18 दिन पहले
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जमादार पर चप्पल उतारने और अभद्र व्यवहार करने वाली महिला कर्मचारी गायत्री देवी को सस्पेंड कर दिया गया। - Dainik Bhaskar
जमादार पर चप्पल उतारने और अभद्र व्यवहार करने वाली महिला कर्मचारी गायत्री देवी को सस्पेंड कर दिया गया।
  • मेयर को गायब मिले थे 9 सफाई कर्मी, शहर में कचरे के ढेर, रोज मिलती हैं औसत 5 शिकायतें

नगर निगम की कचरा पॉलिटिक्स अब गंभीर रूप लेती जा रही है। बुधवार की दोपहर कार्यालय में उस समय हंगामा हो गया, जब सफाई कर्मियों को पूरी मजदूरी देने और उनके हक की मांग उठाने वाले नेता महेश वाल्मीकि को कुछ लोगों ने पीट दिया। इससे उनके कान में चोट आई है।

वाल्मीकि ने मथुरा गेट थाने पर एफआईआर कराई है। इसमें उन्होंने प्रताप चौहान द्वारा ठेकेदार अशोक और राजकुमार जैन के इशारे पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। वाल्मीकि घटना के वक्त मेयर अभिजीत कुमार से मिलने जा रहे थे। इधर, जमादार पर चप्पल उतारने और अभद्र व्यवहार करने वाली महिला कर्मचारी गायत्री देवी को सस्पेंड कर दिया गया।

इससे पहले सफाई-कर्मियों का एक प्रतिनिधि मंडल जमादार के साथ कार्रवाई करने की मांग को लेकर निगम आयुक्त राजेश गोयल से मिला था। वहीं, मेयर को ड्यूटी से गैर हाजिर मिले सफाई कर्मियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर आए दिन आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं।

कुछ सफाई कर्मी हाजिरी लगाने के बाद गायब हो जाते है। जबकि कुछ मूल काम के बजाय डेपुटेशन पर लगेे हैं। सोमवार रात मेयर अभिजीत कुमार ने जब औचक निरीक्षण किया तो उन्हें 14 में से केवल 5 सफाई कर्मी ही ड्यूटी पर काम करते हुए मिले थे। उसी रात नगर निगम के बाहर जमादार और सफाईकर्मी के बीच सफाई के औजार साथ लाने की बात को लेकर झगड़ा हो गया था।

भास्कर पड़तालः शहर में 1247 सफाई कर्मी, वेतन-भत्तों पर खर्च होते हैं 1.85 करोड़ रुपए फिर भी जगह-जगह दिखता है कीचड़ और कचरा

सफाई के लिए हर महीने ठेकेदार को होता है 60 लाख रुपए का भुगतान

नगर निगम में कुल 1247 सफाई कर्मी कार्यरत हैं। इन स्थाई और अस्थाई कर्मियों के वेतन पर 1.85 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। जबकि 2 ठेकेदारों को सफाई के लिए 60 लाख रुपए हर महीने अलग से दिए जाते हैं। इसके बावजूद कई जगह कचरा दिखता है। निगम के कंट्रोल रूम में रोज़ाना औसत 5 यानि 150 शिकायतें आती हैं। इनके निस्तारण का कोई मैकेनिज्म नहीं है। बीते एक साल में नगर निगम ने काम में लापरवाही बरतने वाले एक भी कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं की है।

हां, सफाई व्यवस्था में गैप तो है- आयुक्त

लोगों की अपेक्षा की तुलना में सफाई व्यवस्था में गैप तो है। हम इसे कम करने की कोशिश कर हैं। सस्पेंड सफाई कर्मी को अगर जमादार से कोई दिक्कत थी तो उसे उलझने के बजाय नगर निगम के अधिकारियों को शिकायत करनी चाहिए थी।
- राजेश गोयल, आयुक्त

सीधी बात- विजयपाल सिंह, सीएसआई

सफाई होते ही लोग गंदगी फैला देते हैं, हम क्या करें - सीएसआई

सवाल - बीते एक साल में लापरवाही बरतने पर कितने कर्मियों पर कार्रवाई हुई?
जवाबः एक भी कर्मचारी पर नहीं हुई।

सवाल - तो क्या सभी मुस्तैदी से काम करते हैं?
जवाबः हां, सभी सफाईकर्मी पूरी मेहनत और लगन से काम करते हैं।

सवाल - मेयर को निरीक्षण में सोमवार को 7 सफाईकर्मी गैर हाजिर क्यों मिले थे?
जवाबः यह कोई संयोग हो गया होगा। आमतौर पर ऐसा नहीं होता।

सवाल - फिर शहर में जगह-जगह कीचड़ और कूड़ा क्यों दिखता है?
जवाबः सफाई होने के तुरंत बाद लोग गंदगी फैला देते हैं।

सवाल - इस तरह गंदगी फैलाने वाले कितने लोगों पर जुर्माना लगाया?
जवाबः ऐसा कोई आंकड़ा तो नहीं बता सकता। लेकिन, हम चालान काटते हैं।

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