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मंडे पॉजिटिव:61 साल के मुकेश लोगों को मुफ्त बांट रहे पौधे

भरतपुर13 दिन पहले
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पिछले 10 साल में करीब 1500 से ज्यादा लाेगाें काे निशुल्क पौैधे बांट चुके 61 वर्षीय मुकेश गुप्ता कहते हैं कि काेराेना की सैकंड वेब ने हमें बताया कि जीवन के लिए ऑक्सीजन कितनी जरूरी है। जाे लाेग प्रकृति के साथ रहे वे काेविड हाेने के बाद भी जल्द रिकवर हाे गए। क्याेंकि उनके फेफड़े मजबूत थे। इसलिए हमें अपने घराें में ही नर्सरी लगाकर ऑक्सीजन का स्त्राेत यानी प्लांट लगाना चाहिए।

बजरिया निवासी गुप्ता कहते हैं कि गार्डनिंग का शौक बचपन से है। कुछ साल पहले मेरे मित्र जाेधाराम सैनी ने ग्राफ्टिंग और फूल-पौधों की माैसम के अनुसार देखभाल करना सिखाया। ग्राफ्टिंग से मैंने घर के हर काेने काे डिब्बे, बाेतल, गमलाें में पौैधे राेपकर भर दिया। साथ ही दाेस्ताें काे वितरण करने लगा। प्रकृति से प्रेम हो गया। इसमें मेरी पत्नी और नातिन गुड़ाई और खाद डालने में मेरा साथ देते हैं।

शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेड़/पाैधे सुकून देते हैं। वहीं पिछले सवा साल से काेराेना के कारण हर तरफ अवसाद और अनिश्चितता के माहाैल में गार्डनिंग मन की थकान दूर करने में मदद करती है। इसलिए सुबह-शाम इन्ही के बीच याेग/व्यायाम और आराम करते हैं। मेरी नातिन पूर्वांशी हर साल अपने जन्म दिन पर सहेलियाें काे 50 से ज्यादा पौधे गिफ्ट में वितरित करती हैं। मैं भी त्याेहार और बारिश के माैसम में परिचित लाेगाें काे निशुल्क पौैधे बांटता हूं। मकसद है कि हर घर हरियाली भरा हाे।

150 गमलों में अलग-अलग किस्म के पौधे लगाए
किचन गार्डनिंग भी सजावटी, फूलाें के अलावा मुकेश गुप्ता किचन गार्डनिंग पर भी जाेर देते हैं। सब्जियों में बैंगन, मिर्ची, अरबी, अदरक, नींबू, पालक, टमाटर आदि यहां लगे है। फूलों में डहेलिया, गजेनिया, जरबेरा, पेटूनिया, गुलाब, जैसमीन, रात की रानी, आदि हैं।

हर्बल पौधों में रोजमेरी, पेपरामेंट, लेमनग्रास, कड़ी पत्ता, मनी प्लांट, अादि हैं। 150 गमलों में अलग-अलग किस्म के पौधे लगाए हैं।

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