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  • Municipal Corporation Will Dispose Of 1.20 Cubic Meters Of Waste Spread Over 7 Hectares Of Nonh Waste Plant With Bio mining Technology, Will Spend 4.8 Crores

कचरे से निपटने की पहल:बायो माइनिंग तकनीक से नोंह कचरा प्लांट के 7 हैक्टेयर में फैले 1.20 क्यूबिक मीटर कचरे को निपटाएगा नगर निगम, 4.8 करोड़ खर्च करेगा

भरतपुर10 दिन पहले
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  • 2004 में नोंह में निगम ने बनाया था डंपिंग यार्ड, तभी से यहां इकट्ठा हो रहा है कचरा

नगर निगम ने नोंह स्थित कचरा प्लांट में वर्षों से इकट्ठा हो रहे कचरे के निस्तारण की तैयारी कर ली है। निगम इसके लिए एक कंपनी से एमओयू करने की तैयारी कर है जो बायो माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल करे कचरे को 10 महीने में निस्तारित कर देगी। यदि सबकुछ ठीकठाक रहा तो दो महीने में यार्ड में ट्रोमेल्स मशीन लग जाएगी।

निगम की ओर से सात हेक्टेयर इलाके में फैले एक लाख 20 हजार क्यूबिक मीटर कचरे के निस्तारण पर 4.8 करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्लांट की पानी और बिजली की जरूरतों को पूरा करने का काम नगर निगम ने कर लिया है। जिसके तहत बोर वैल खुदवाया गया है। साथ ही बिजली का कनेक्शन ले लिया गया है। सबसे पहले कचरे की ढेरियां बनाई जाएंगी जिससे उसमें जमा हुई मिथेन गैस निकल जाए।

इसके बाद माइक्रो ऑर्गेनिज्म से इसे ट्रीट किया जाएगा। कचरे में स्थित बायो वेस्ट को नष्ट करने के लिए बायो कल्चर मिलाया जाएगा। इससे एरोबिक बैक्टीरिया उसे खाकर नष्ट कर देते हैं। उल्लेखनीय है भरतपुर शहर का पूरा कचरा निकटवर्ती गांव नोंह में बनाए गए डंपिग यार्ड भेजा जाता है। लेकिन कचरे के निस्तारण की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण यह यहीं खुले में सड़ता रहता है। इससे नोंह और उसके आसपास के लोगों को भारी परेशानी होती है। उल्लेखनीय है कि शहर में रोजोना करीब 120 टन कचरा निलकता है जो सीधे नोंह कचरा डंपिंग यार्ड भेजा है।

सीमेंट फैक्ट्रियों में खपेगा ज्वलनशील कबाड़

निकलने वाले पत्थरों और बिल्डिंग मेटेरियल को सड़क या दूसरे निर्माण कार्यों में काम लिया जाएगा। जिससे वह इधर-उधर ना फैलें। थैलियां, प्लास्टिक, कागज, गत्ता, कपड़े और जूट बैग जैसी जलने योग्य चीजों को सीमेंट फैक्ट्रियों पर भेजा दिया जाएगा। जहां इन्हें भटि्टयों में डलवा दिया जाएगा। दरअसल इन भटि्टयों में तापमान बहुत ज्यादा होता है। जिससे यह वस्तुएं जल कर पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं। इनके जलने से पैदा हुआ ताप सीमेंट बनाने में इन अनावश्यक वस्तुओं का उपयोग हो जाता है।

खेतों में काम आ सकेगी मिट्टी

कचरे में मिट्‌टी, थैलियां, प्लास्टिक, मैटल, पत्थर, कागज, गत्ता, कपड़े, जूट बैग जैसी वस्तुएं होती हैं। प्रोजेक्ट प्रभारी प्रदीप मिश्रा के अनुसार इन्हें दूसरे चरण में ट्रोमेल्स में मैकेनिकल तरीके से सेग्रीगेट किया जाएगा। यानि ट्रोमेल्स मशीन में इन सभी को कचरे से अलग-अलग कर लिया जाएगा। मिट्टी अमूमन बहुत उपजाऊ होती है। ऐसे में सोयल टेस्ट करा मिट्टी की गुणवत्ता पता लगाई जाएगी।

तीन हफ्ते में कंपनी से एमओयू कर लिया जाएगा। जिसके बाद ठेका फर्म एक महीने में ट्रोमेल्स मशीन स्थापित कर काम शुरू कर देगी, उन्हें छह महीने में काम पूरा करना होगा। राजेश गोयल, आयुक्त नगर निगम, भरतपुर।

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