राधा रानी ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा यात्रा:स्टोन क्रेशर बंद नही होने पर नारायण बाबा ने आत्मदाह जैसा कदम उठाने की दी चेतावनी

भरतपुरएक महीने पहले
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साधु संतों व देशभर से आए हजारों पद यात्रियों को लेकर राधा रानी ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा यात्रा रविवार को डीग उपखंड के गांव उमरा पहुंची जहां ग्रामीणों ने साधु संत और परिक्रमार्थियों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। पदयात्रा में शामिल सभी पद यात्रियों एवं साधु-संतों ने आदि बद्री और कंकाचल पर्वतीय क्षेत्र के पास बड़े पैमाने पर क्रेशरो के संचालन को लेकर भारी रोष जताया। उनका मानना था कि अगर आदिबद्री व कनकाचल पर्वतीय क्षेत्र के क्रेशरों को अविलंब बंद नहीं किया जाता है तो दोनों पर्वतों पर से अवैध खनन को बंद करना असंभव है।

मान मंदिर के संत नारायण बाबा जो विगत आंदोलन पर टावर पर भी चढ़ गए थे उन्होंने क्रेशरों के संचालन पर रोष जताते हुए कहा कि वह किसी भी स्थिति में संत विजय दास द्वारा दिए गए बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। संत विजय दास ने आदि बद्री और कंकाचल पर्वतों की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया लेकिन अगर इसके बाद भी यह सरकार क्रेशर चलवाती रहेगी तो इन पहाड़ों पर अवैध खनन नहीं रुक सकता है। उन्होंने प्रशासन और सरकार को चेताते हुए कहा कि यदि तत्काल क्रेशरो को बंद नहीं किया गया तो वह स्वयं इस बार आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगे।

आदिबद्री और कनकाचल पर्वत पर हो रहा अवैध खनन
संरक्षण समिति के संयोजक राधाकांत शास्त्री ने कहा कि आदिबद्री और कनकाचल पर्वत पर अभी भी खतरा मंडरा रहा है। स्टोन क्रेशरों के संचालन के चलते दोनों पर्वतों पर अवैध खनन किया जा रहा है जिससे हमारी आस्था का तो विनाश हो ही रहा है। सरकार द्वारा संत विजय दास के बलिदान की भी अनदेखी की जा रही है।

बाबा हरि बोल दास जिन्होंने विगत आंदोलन में महती भूमिका निभाई, उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि राजस्थान सरकार तत्काल इन क्रेशरों के संचालन को बंद करें अन्यथा साधु संतों का आंदोलन शीघ्र आरंभ हो सकता है। सरकार और प्रशासन हमारी बात को किसी भी रूप में हल्के में ना ले। इस मौके पर देशभर से आए सभी पद यात्रियों एव साधु संतों ने संभावित आंदोलन में पूर्ण रूप से सहयोग देने का संकल्प लिया।

प्रशासन के लिखित आश्वासन पर वकीलों का आंदोलन स्थगित, वकीलों की आत्मदाह चेतावनी से पुलिस-प्रशासन में मचा हड़कंप
बयाना| एसडीएम और तहसील कार्यालय को नई बिल्डिंग में शिफ्टिंग का विरोध कर रहे वकीलों का आंदोलन रविवार को प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद स्थगित हो गया। जिला कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार अमित शर्मा ने लिखित आश्वासन में कहा कि फिलहाल एसडीएम कोर्ट का न्यायालय संबंधी कामकाज वर्तमान भवन में ही कैम्प कोर्ट के रुप में चलेगा। लिखित आश्वासन के बाद कचहरी परिसर में चल रहे धरना स्थल पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चौबसिंह सूपा ने आंदोलन स्थगित किए जाने की घोषणा की।

इससे पहले कार्यालयों को नई बिल्डिंग में शिफ्ट करने पर तीन वकीलों ने आत्मदाह की चेतावनी दे डाली। इसे देख पुलिस- प्रशासन के भी हाथ-पैर फूल गए। पुलिस-प्रशासन के अधिकारी वकीलों से वार्ता कर मामले को शांत करने की कोशिश में जुट गए। वकीलों की चेतावनी को देखते हुए कचहरी परिसर में अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया। इस बीच जिला कांग्रेस कमेटी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष शेरसिंह सूपा भी वकीलों के धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने भी वकीलों की मांग को सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चौबसिंह सूपा ने जिला कलेक्टर आलोक रंजन और एसपी श्याम सिंह से फोन पर बात कर एसडीएम कोर्ट को वर्तमान भवन में ही यथावत रखने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार और प्रशासन के उपेक्षा पूर्ण रवैए की वजह से वकील कोई आत्मघाती कदम उठा सकते हैं। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह एसडीएम कोर्ट को वर्तमान भवन में ही पूर्ववत संचालित करने के लिए लिखित में आश्वासन दें। जिसके बाद तहसीलदार ने एसडीएम कोर्ट के न्यायालय संबंधी कामकाज को फिलहाल वर्तमान बिल्डिंग में ही पूर्व की भांति चलाए जाने का लिखित में आश्वासन दिया।

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