किसान परेशान:रबी की बुवाई शुरू, न तो डीएपी खाद मिल रहा और न ही फसली ऋण, किसान हो रहे परेशान

भरतपुर15 दिन पहले
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  • भास्कर खास- जरूरत 14000 टन डीएपी की, उपलब्ध सिर्फ 2000 टन, इसलिए है संकट

जिले में रबी की बुवाई शुरू हो गई है। लेकिन, किसान को न डीएपी खाद मिल रहा है और न ही फसली ऋण। यही वजह की बुवाई की स्पीड नहीं बढ़ पा रही है। हाल ये है कि कृषि विभाग ने सरकार को 14 हजार टन डीएपी की डिमांड भेजी है। लेकिन, अभी सिर्फ 2 हजार टन ही डीएपी ही मिला है। कई ग्राम सेवा सहकारी समितियों तक तो खाद पहुंच भी नहीं पाई है। इसलिए मारामारी शुरू हो गई है। दुकानदार मनमाने दाम वसूल रहे हैं।

इधर, जिले में सहकारी बैंकों से फसली कर्जे लेने में किसानों को समस्या आ रही हैं। नदबई विधायक जोगेंदर सिंह अवाना ने बताया कि फसली कर्जे नहीं मिलने की उन्हें भी कई किसानों ने शिकायत की है। सीएमओ स्तर पर बात करके खाद और ऋण जल्दी वितरित कराया जाएगा। अग्रणी बैंक जिला प्रबंधक कैप्टन रविंद्र पांडे ने बताया कि भरतपुर जिले में इस साल 3584 करोड़ रुपए के फसली ऋण बांटने का लक्ष्य है। पहली तिमाही यानि अप्रैल-मई-जून में 896 करोड़ में से 432 करोड़ रुपए वितरित हो चुके हैं। सभी बैंकों को ऋण वितरण शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

कृषि विभाग की सलाह...कालाबाजारी में न फंसे, एसएसएफ खाद डालें

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक देशराजसिंह ने किसानों को सलाह दी है कि वे कालाबाजारी में न फंसें। बल्कि विकल्प के तौर पर सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसएफ) का उपयोग करें। क्योंकि इसमें गंधक होती है जो सरसों के दाने में चमक, तेल की मात्रा और मोटाई बढ़ाने में सहायक है। नाइट्रोजन भी डीएपी के मुकाबले ढाई गुना यानी 45 प्रतिशत होता है। एक कट्टा डीएपी की लागत में ही 3 कट्टे एसएसएफ और 1 कट्टा यूरिया आ जाता है। इस साल 3.8 लाख हैक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई होने की उम्मीद है।

समय पर स्टॉक नहीं करने से बढ़ा संकट- मोहन रारह
भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष मोहन रारह का आरोप है कि गहलोत सरकार ने समय रहते डीएपी खाद का स्टॉक नहीं किया। इसलिए यह संकट बढ़ा है।

डीएपी का संकट राजस्थान समेत कई राज्यों में है। क्योंकि केंद्र सरकार ने आयात पर रोक लगाई है। जहां तक किसानों को फसली कर्जों की दिक्कत है, इसके लिए बजट को-ऑपरेटिव बैंकों के पास पहुंच गया है। -डॉ. सुभाष गर्ग, चिकित्सा राज्यमंत्री

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