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परेशानी:न ट्रेनिंग न एंड्रॉयड फोन, आशाएं कैसे करेंगी कोरोना हाई रिस्क लोगाें का आॅनलाइन सर्वे, लिसा एप बना परेशानी

भरतपुर6 महीने पहले
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  • जिले में करीब 1800 आशा सहयोगिनियों को हो रही समस्या, 10 जुलाई से किया जाना था सर्वे

कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए हाई रिस्क रोगियों का सर्वे करने के लिए शुरू लाइफ सेविंग एप (लिसा) अब जिले की करीब 1800 से अधिक आशा सहयोगिनियों के लिए परेशानी का कारण बनने लगा है। राज्य सरकार ने पूर्व में लिसा अभियान चलाकर घर-घर सर्वे करवाया। बाद में इसे ऑनलाइन अपडेट करने के निर्देश दिए। इस कार्य को 10 जुलाई से शुरू किया जाना था।

कई आशा कार्यकर्ताओं के पास एंड्रॉयड फोन नहीं होने और कुछ को कोई प्रशिक्षण नहीं मिलने से यह सर्वे नहीं कर पा रही हैं। अभियान के तहत हाई रिस्क वाले व्यक्तियों जिनमें मुख्य रूप से 60 साल से अधिक के व्यक्ति, 10 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती, कोरोना से संघर्ष के तहत अग्रिम पंक्ति में कार्य करने वाले व्यक्ति, बाहरी जिलों या राज्यों के यात्रा इतिहास वाले व्यक्ति एवं पॉजिटिव केस के संपर्क में आने वाले व्यक्ति को हाई रिस्क समूह मानते हुए इनका ऑनलाइन एप से सर्वे कराया जाना है। यह सर्वे लिसा एप के माध्यम से एएनएम, आशा सहयोगिनी एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से किया जाएगा।

एप चलाने के लिए नहीं मिला कोई प्रशिक्षण  

जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने आशा सहयोगिनियों को ऑनलाइन सर्वे के आदेश तो दे दिए। लेकिन एप चलाने के लिए कई ब्लाॅक में आशा सहयोगिनियों को प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। ब्लॉक स्तर तक अधिकारियों को वीसी से इस एप के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें इस बारे में आशा सहयोगी को जानकारी देने के निर्देश दिए गए। साथ ही एप के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई।

2500 रुपए मानदेय में कैसे लाए 8-10 हजार का मोबाइल  

कोरोना महामारी में आशा सहयोगिनी घर-घर जाकर सर्वे कार्य कर पेपर पर रिपोर्ट तैयार कर विभाग को दे रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए गए एंड्रॉयड फोन से सर्वे कराए जाने के आदेश से आशा सहयोगिनियों में रोष है। जानकारी के अनुसार जिले में करीब 40 फीसदी आशा सहयोगिनियों के पास एंड्रॉयड मोबाइल फोन नहीं हैं। महज ढाई हजार के मानदेय में 8-10 हजार रुपए का मोबाइल लाना संभव नहीं है।

जिलें के 9 ब्लाॅक में हैं 1845 आशासहयोगिनी  

भरतपुर शहर सहित जिले के अन्य 9 ब्लाॅक में 1845 आशा सहयोगिनी हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकडों के अनुसार बयाना में 205, भुसावर में 209, डीग में 152, कामां में 179, कुम्हेर में 175, नदबई में 181, नगर में 218, रूपवास में 228, सेवर में 170 एवं भरतपुर शहर में 128 आशा सहयोगिनी हैं। 

एएनएम से समन्वय स्थापित कर सर्वे कर सकती हैं आशा  

अधिकतर ब्लाॅक में प्रशिक्षण दे दिया गया है। जानकारी में आया है कि आशा सहयोगिनियों को आॅनलाइन सर्वे में एंड्रॉयड फोन नहीं होने से परेशानी आ रही है। सर्वे के लिए आशासहयोगिनी सब सेंटर पर कार्यरत एएनएम से समन्वय स्थापित कर अपना सर्वे कर सकती हैं। समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा रहे हैं। जो भी निर्देश मिलेंगे उनसे आशाओं को अवगत कराया जाएगा।

जितेन्द्र शर्मा, जिला आशा समन्वयक

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