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भरतपुर कोरोनामुक्त:9 माह बाद कोई पॉजिटिव भर्ती नहीं, डे-केयर सेंटर भी खाली

भरतपुरएक महीने पहले
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  • दिसंबर में 1190 रोगी आए, 15 मौतें हुईं, इस माह 20 दिन में 82 नए केस, मौत एक भी नहीं

कोरोना संक्रमण का एक और गंभीर एवं रोचक मामला सामने आया है। यहां अपना घर आश्रम की आवासिनी 30 वर्षीय शारदा देवी अभी तक नेगेटिव नहीं हो पाई हैं। पिछले 5 माह में उनके 14 आरटीपीसीआर और 17 एंटीजन यानि 31 टेस्ट हो चुके हैं।

सभी रिपोर्ट पॉजिटिव हैं। उन्हें एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाएं भी दी जा चुकी हैं। दिलचस्प बात ये है कि वह अब खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रही हैं। उनका वजन भी 30 से बढ़कर 38 किलो हो गया है। इनसे पहले बयाना का 10 वर्षीय कासिम भी 9 बार पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद नेगेटिव हुआ था।इधर, एसएमएस जयपुर के माइक्रो बॉयोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार का कहना है कि लगातार पॉजिटिव होने के दो कारण हो सकते हैं पहला या तो रोगी की इम्युनिटी कमजोर हो या म्यूकोजा (नाक की झिल्ली) में डैड वायरस स्टोर हो गया हो।

अपनाघर में रह रही शारदा की बाॅडी में कोरोना वायरस अब इनएक्टिव है। लेकिन, उन्हें आइसोलेशन में रखना जरूरी है। इसलिए शारदा देवी 5 महीने से दो कमरों के आइसोलेशन रूम में जेल जैसी जिंदगी जी रही हैं। अपना घर प्रबंधन ने इन्हें जयपुर भेजने का निर्णय लिया है। इसके लिए जिला कलेक्टर और सीएमएचओ को पत्र भी लिखा जा रहा है। इधर, अपनाघर में शुक्रवार से वैक्सीनेशन भी शुरू हो रहा है। इसके लिए जिला कलेक्टर ने विशेष अनुमति दी है।

पहली बार जब पॉजिटिव हुई तब मरणासन्न थीं, अब स्वस्थ
अपना घर आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. बीएम भारद्वाज ने बताया कि शारदा को मरणासन्न अवस्था में बझेरा गांव से अपनाघर में लाया गया था। वे आश्रम की पहली काेरोना पॉजीटिव रोगी थीं। इन्हीं की वजह से अपनाघऱ को निजी कोविड केयर सेंटर खोलना पड़ा था। शारदा का पहला टेस्ट 28 अगस्त 2020 को हुआ। अपना घर में शारदा समेत 4 कोरोना रोगी हैं। यहां 91 आवासी पॉजिटिव हुए थे। इनमें से 96 साल के लक्ष्मीनारायण समेत 86 लोग ठीक हो चुके हैं। जबकि एक रोगी (प्रभु जी) की मृत्यु हो गई थी।

आज से बयाना-रूपवास में भी लगेंगे ‘मंगल टीके’
इधऱ, कोरोना को हराने के लिए शुक्रवार औऱ शनिवार को फिर मंगल टीके (वैक्सीन) लगाए जाएंगे। इसके लिए 3 सेंटर बदले गए हैं। आरसीएचओ डॉ. अमर सिंह सैनी के मुताबिक आरबीएम अस्पताल के साथ जिंदल हॉस्पिटल और रूपवास एवं बयाना सेंटरों पर भी टीके लगाए जाएंगे। इधर, वैक्सीन की 13000 डोज और आ गई हैं। प्रत्येक सेंटर पर 100-100 हेल्थ वर्करों को टीका लगाने का लक्ष्य है।

इस खुशी को ऐसे रख सकते हैं बरकरार
बाहर जाते समय मास्क जरूर लगाएं। एक-दूसरे से 2 गज की दूरी बनाकर रखें। बार-बार हाथ धोएं, सेनेटाइजर साथ रखेंं। खांसी, जुकाम, बुखार आदि कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अगर जरूरी हो तो कोरोना जांच कराएं। वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है। अभी कोई पैसा भी नहीं लग रहा है। इसलिए रजिस्ट्रेशन करवाकर वैक्सीन जरूर लगवाएं।

करीब 9 माह बाद वह सुखद दिन आया है, जब भरतपुर कोरोनामुक्त है। गुरुवार को पहली बार ऐसा मौका था जब आरबीएम अस्पताल, डे केयर और कोविड केयर सेंटरों में कोई भी पॉजिटिव रोगी भर्ती नहीं था। हालांकि कोविड वार्ड तो दो दिन पहले 18 जनवरी को ही खाली हो गया था। लेकिन, डे केयर सेंटर मेंं भर्ती 3 रोगियों को भी ठीक होने पर छुट्टी दे दी गई। हमारी रिकवरी रेट भी 98 से 99 प्रतिशत तक है। लेकिन, अभी सावधानी जरूरी है, क्योंकि कोरोना खत्म हुआ है, संक्रमण का खतरा नहीं।

इसलिए फेस मास्क और 2 गज की दूरी बहुत जरूरी है।आरबीएम अस्पताल में कोविड जोन के प्रभारी डॉ. सुनील पाठक ने बताया कि जिले में हालांकि एक्टिव केसों की संख्या 21 है, लेकिन ये रोगी या तो जयपुर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं अथवा घरों पर होम आइसोलेशन में रह रहे हैं।

इनमें ऐसा कोई रोगी नहीं है, जिसे अस्पताल में भर्ती रखना पड़े। उल्लेखनीय है कि जिले में पहला कोरोना पॉजिटिव रोगी 2 अप्रैल को कामां तहसील के जुरहरी गांव में एक वृद्ध निकला था। कोरोना से पहली मौत वैर तहसील के पथैना गांव में 55 वर्षीय अनवरी देवी की हुई थी। जब कोरोना पीक पर था, तब 19 अक्टूबर को 137 पॉजिटिव रोगी निकले थे। यह अब तक का रिकॉर्ड का है। आरबीएम अस्पताल में सर्वाधिक 112 रोगी 27 नवंबर को भर्ती थे।

एक्सपर्ट व्यूः इम्युनिटी बढ़ी, वायरस भी कमजोर हुआ, संक्रमितों में डवलप हुई एंटी बॉडी
​​​​​​​हमारे यहां दिसंबर के पहले हफ्ते से ही कोरोना वायरस काफी कमजोर पड़ गया था। इसकी वजह यह रही कि अप्रैल-मई में जब यह संक्रमण पीक पर था तो लोगों ने अपने स्तर पर ही काढ़ा, ग्रीन टी, विटामिन सी लेकर इम्युनिटी बढ़ाने के लगातार प्रयास किए। जो लोग पॉजिटिव हुए, उनमें एंटी बॉडी डवलप हुई।

यही वजह है कि अप्रैल-मई में जहां पॉजिटिव रोगी को ठीक होने में 15 या इससे ज्यादा समय लग रहा था। वहीं अब 7 से 10 दिन में ही रोगी ठीक हो रहे हैं। हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार ने गाइड लाइन भी बदली है। लेकिन, जब तक वैक्सीनेशन का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक सावधानी जरूरी है। - डॉ. विवेक भारद्वाज, यूनिट प्रभारी कोविड जोन

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