तेल की कीमतें घटीं:सरसाें स्टाॅक की लिमिट से दो दिन में तेल के दाम 10 रुपए किलो तक गिरे, थोक भाव 174 रुपए किलाे

भरतपुरएक महीने पहले
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  • केंद्र सरकार द्वारा खाद्य तेल व तिलहनों पर स्टॉक लिमिट लगाने से घटीं तेल की कीमतें

केंद्र सरकार द्वारा खाद्य तेल एवं तिलहनों पर स्टॉक लिमिट लगाए जाने से त्यौहारी सीजन में सरसों तेल की कीमतें काबू में आने लगी हैं। दो दिन में ही सरसों तेल के भाव में 10 रुपए किलो तक कम हो गए हैं। ब्रोकर सुमित अग्रवाल का कहना है कि हालांकि इन दिनों सरसों तेल की डिमांड कम है क्योंकि त्यौहारी डिमांड को सोयाबीन पूरी कर रहा है। सोया और पाम ऑयल पर आयात शुल्क कम किए जाने एवं सोयाबीन की नई फसल आने से सरसों और सोयाबीन तेल के भाव में 45 रुपए किलो तक का अंतर आ गया है।

गुरुवार को सरसों तेल का थोक भाव 174 रुपए किलो जीएसटी सहित था। जबकि दो दिन पहले 184 रुपए किलो बिक रहा था। मंदी के कारण सरसों के भावों में भी लगातार गिरावट आ रही है। गुरुवार को मंडी में सरसों के भाव 7925 बोले गए। इस भाव में भी डिमांड नहीं थी। प्रमुख आढ़तिया भूपेंद्र गोयल ने बताया कि शाम को रखे हुए सौदों का भाव 7825 रुपए में बोला गया। सरसों में अभी और मंदा आ सकता है। क्‍योंकि सरकार त्यौहारी सीजन में खाद्य तेलों की कीमत स्थिर रखना चाहती है। इसीलिए सरकार ने एनसीडीईएक्स एक्सचेंज पर सरसों के फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स के नए सौदों पर रोक के एक दिन बाद ही खाद्य तेल एवं तिलहनों पर स्टॉक लिमिट लगा दी थी। यह स्टॉक लिमिट 31 मार्च 2022 तक रहेगी।

राज्य तय करेंगे स्टॉक लिमिट
उपलब्ध स्टॉक और खपत पैटर्न के आधार पर अब संबंधित राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा ही स्टॉक सीमा तय की जाएगी। फिरइनर/मिलर्स/एक्सट्रैक्टर एवं थोक विक्रेताओं को छूट दी जा रही है कि वे यह प्रदर्शित कर सकते हैं कि उनके स्टॉक का अमुक हिस्सा निर्यात/आयात के लिए है।

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