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विरोध:आदिबद्री पर्वतीय क्षेत्र में अवैध खनन के विरोध में हुई पंचायत, संगठनों ने भरी लड़ाई की हुंकार

भरतपुर10 दिन पहले
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  • 15 दिन में खनन मुक्त नहीं किया तो होगा महापड़ाव, आज धरना स्थल पर होगी गुर्जर महासभा

आदिबद्री पर्वतीय क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के विरोध में ग्राम पंसोपा में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के 34 वें दिन किसान पंचायत में किसान यूनियनों के वरिष्ठ राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने ब्रज के पर्वतों को खनन मुक्त करवाने का सर्वसम्मिति से प्रस्ताव लेते हुए जल्द ही कार्रवाई नहीं होने पर आर पार की लड़ाई लडने की हुंकार भरी।

20 वर्षों से ब्रज क्षेत्र का साधु व ग्रामीण कंकाचल एवं आदिबद्री पर्वतों को खनन मुक्त कराने के लिए संघर्षरत है। वर्ष 2009 में लंबे संघर्ष के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने डीग व कामां तहसील में आ रहे पर्वतों को खनन मुक्त कर संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया था। लेकिन नगर व पहाड़ी तहसील में पड़ रहे इन्हीं पर्वतों के हिस्से को त्रुटि वश छोड़ दिया। तब से ग्रामीण व साधु इनकी रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। किसान पंचायत में पहुंचे नगर विधायक वाजिव अली ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा जरूरी है। जो अवैध खनन जैसी गतिविधियां सही नहीं है। वो इस लडाई में साधु-संत, ग्रामीणों के साथ खड़े है। विधायक ने पूरे प्रकरण को विधानसभा में उठाने का लोगों को विश्वास दिलाने के साथ कहा कि वो इस मामले से मुख्यमंत्री को अवगत कराएंगे।

भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ब्रज के पर्वत हमारे भगवान हैं व यहां की कृषि भूमि हमारी मां है। इनकों अगर कोई गलत दृष्टि से देखेगा तो किसान किसी भी कीमत पर यह बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब ब्रज के पर्वतों का और अधिक नाश किया गया तो किसान वर्ग लाखों की संख्या में भरतपुर में अनिश्चितकालीन पड़ाव डालेगा। साथ ही प्रशासन की किसान व ब्रजवासी विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल बजा दिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह राणा ने कहा कि सरकार साधु संतों की बात सुन ले अन्यथा ब्रज के पर्वतों के लिए ऐसा आंदोलन खड़ा कि जाएगा जो अभूतपूर्व होगा।

पूर्व विधायक गोपी गुर्जर ने पंचायत में बोलते हुए कहा कि अशोक गहलोत सरकार ने ही वर्ष 2009 में साधु संतों की मांग मानते हुए डीग और कामां के अंतर्गत आने वाले पर्वतों को खनन मुक्त कर संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया था परन्तु नगर व पहाड़ी में उन्हीं पर्वतों के अभिन्न हिस्सों को खनन मुक्त नहीं किया गया। सरकार को अविलंब कंकाचल व आदिबद्री पर्वत को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर खनन माफियाओं के साथ लिप्त सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

पंचायंत के अंत में मानमंदिर के अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने किसान पंचायत में पारित प्रस्ताव पर कहा कि यह पंचायत सरकार व प्रशासन को 15 दिन का समय देती है कि अगर इस अंतराल में नगर व पहाड़ी तहसील में पड़ रहे आदिबद्री व कंकाचल के हिस्से को खनन मुक्त नहीं किया गया तो भरतपुर में किसानों, ब्रजवासियों व साधु संतों का अनिश्चितकालीन महापड़ाव डाला जाएगा।

जिसके परिणाम की जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी। ककराला सरपंच जलाल खान व सरपंच सुल्तान सिंह ने किसान पंचायत में आए किसान यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को विश्वास दिलाया कि संपूर्ण ब्रज के गावों की जनता हर समय व हर प्रकार इस आंदोलन में कूदने के लिए तैयार है। पंचायत के बाद पारित प्रस्ताव को जिला कलेक्टर को भेजा गया। धरनास्थल पर आज गुर्जर महासभा के साथ संत सम्मेलन का आयोजन होगा। किसान पंचायत के अवसर आदिबद्री महंत शिवराम दास, भूरा बाबा, साध्वी मधुबनी, किसान नेता मोहन सिंह, सत्यप्रकाश यादव, सरपंच विजयसिंह, किसान यूनियन के पदाधिकारी राम सिंह, राम प्रताप सिंह, अरुण कुमार सिंह, विजय चौधरी, निहाल, देवीराम, जीतराम, बदले सिंह, सूरजमल, एडवोकेट कुलदीप बैंसला, गोपाल दास, कृष्ण दास बाबा, ब्रजकिशोर बाबा, कृष्ण चैतन्य, मुकेश शर्मा आदि मौजूद थे।

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