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लेखन:रॉइन और रिझझम बंधुओं का नया उपन्या अहम.... जादू हर व्यक्ति के अंदर है, उसे साकार करने का प्रयत्न कीजिए

भरतपुर2 महीने पहले
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रॉइन और रिझझम (काला चश्मा पहने)। - Dainik Bhaskar
रॉइन और रिझझम (काला चश्मा पहने)।
  • फैंटेसी रचना कोई सोगर गांव के उपन्यासकार रागा बंधुओं से सीखे

सोगर गांव के दो भाई रूप और बसंत यानी लेखक रॉइन/ रिझझम रागा से कल्पना गढ़ना सीखिए। रागा बंधुओं ने एक के बाद एक पांच फैंटेसी उपन्यास रचे हैं जिसमें पानी की दुनिया अमेजन पर बेस्ट सेलर रह चुका है। इसी कड़ी में रागा बंधुओं ने नया उपन्यास 'अहम' रिलीज किया है जिसमें एक जादूगर के जरिए पूरी दुनिया रची है।

मजे की बात यह है कि उपन्यास के दौरान बीच-बीच में लेखक ने मुख्य पात्र जादूगर अहम के जरिए बताया कि अवध शहर की यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है, लेकिन शब्दों की कसावट इस कदर है कि पाठक भी पात्र के साथ धरातल और कल्पना की उड़ान भरता रहता है।

रागा बंधु ने बताया कि जादू हर व्यक्ति के अंदर है और शब्दों से कल्पना की जादूगरी में रागा बंधु माहिर हैं। उन्होंने जादूगर अहम, टोपी कायम, राजा भद्रनाथ, राजकुमारी सोनर, दुराचारी रत्नाकर और सेनापति चंद्रार्य सहित तमाम पात्रों के जरिए उपन्यास अहम को इस कदर रचा है कि शुरुआत के साथ ही उपन्यास को पूरा पढ़ने का जी चाहता है।

महाराज भद्रनाथ की विवशता, रत्नाकर की कुटिलता और राजकुमारी सोनर के सौम्य सौंदर्य उसके मन में युद्ध के बीच फूटी प्यार की कोंपलों को मन हर लेने वाले शब्दों में लिखा है। खासकर जब जादूगर अहम की शहादत के बाद अवध में प्रतिमा अनावरण के दौरान भद्रनाथ का बेटी राजकुमारी सोनर को आवाज देने और सोनर का चुपचाप कार्यक्रम से निकल जाने मेंं विरह का जो दर्द दो लाइनों में व्यक्त किया है वह मन को भिगो देता है।

शब्दों को लेकर किया प्रयोग
रागा बंधु ने उपन्यास में खालिस शब्दों का प्रयोग किया है, जिससे पाठक की पकड़ मजबूत होती है। मसलन, निविड़ जंगल, लद्दड़ आवाज, फुरफुरी ख्वाहिश, सूरज की घुड़चढ़ी, कुकडा पत्ता, छक, थप्पा, झयझय, बौरोये बैल आदि तमाम शब्दों को नए अंदाज में लिखा है।

25/27 साल के रागा बंधु ने अहम में मैसेज भी दिया है कि याद रखना हार उन्हीं की होती है, जो काेशिश करते हैं। और जीतते भी वही हैं....। यह शायद उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर लिखा है। अनाथालय में रह कर पढ़े-बढ़े रूप/ बसंत यानी राॅइन/रिझझम रागा ने अभाव, उपेक्षा, आर्थिक तंगी, अनमेल माहौल, अकारण बाधाओं को बहुत नजदीक से देखा है। इसके बीच भी रागा बंधु ने सपने देखना और उसे कायम करना नहीं छोड़ा। दोनों के ख्वाब और कलम उपन्यासों के जरिए नए मुकाम तय करेंगे। ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

(रिपोर्ट: प्रमोद कल्याण)

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