असमंजस:अभिभावकों का सवाल, बच्चे साल भर स्कूल ही नहीं गए, फिर परीक्षा कैसे देंगे

भरतपुर9 महीने पहले
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  • अभी 31 मार्च तक शुरू नहीं होंगी कक्षाएं
  • कक्षाएं शुरू नहीं होने से पहली से 5वीं तक के स्कूलों के करीब 3 लाख छात्र परेशान

काेराेनाकाल में सबसे ज्यादा पढ़ाई का नुकसान कक्षा 1 से 5वीं में पढ़ने वाले बच्चों का हुआ है। मार्च 2020 से अबतक पूरी साल निकल गई, लेकिन जिलेभर के सरकारी व निजी स्कूलों के करीब 3 लाख बच्चों ने विद्यालय तक नहीं देखा और अब सरकार ने 31 मार्च तक इन बच्चों की क्लास नहीं लगाए जाने का निर्णय लिया है। ऐसे में अभिभावकों का बड़ा सवाल है कि पूरी साल स्कूल देखे बिना निकली और अब किस आधार पर शिक्षा विभाग परीक्षाएं ले रहा है। असल में कोरोना की वजह से वर्ष 2020 में लॉकडाउन लगा दिया गया था, जिसकी वजह से सभी स्कूल, काॅलेज बंद करने पड़े थे। परंतु अब स्थिति सामान्य हाेने के साथ ही कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई दाेबारा से शुरू हाे चुकी है। इसी बीच जिन कक्षाओं की पिछले सालभर में एक बार भी क्लास नहीं लगीं, उसकी परीक्षा कैसे हो सकती है। यह सवाल अभिभावक उठा रहे हैं, जिनके बच्चे कक्षा 1 से 5वीं तक की कक्षाओं में पढ़ रहे हैं।

शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालय शाला दर्पण पर व प्राइवेट विद्यालयों को पीएसपी पोर्टल पर डाटा अपलोड करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे परीक्षाओं के लिए बच्चों की डिटेल ली जा सके। जबकि सरकारी और गैर-सरकारी किसी भी स्कूल में अबतक एक दिन भी कक्षाएं नहीं लगीं। शिक्षा विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 5वीं व 8वीं की परीक्षा अप्रैल में आयोजित होंगी। परीक्षा कैसे होगी? यह अभी तय नहीं है लेकिन परीक्षा होगी। कोरोना काल के चलते पिछले साल मार्च माह से ही स्कूल बंद हैं।

कक्षा 3 के बाद सीधे 5वीं की देनी पड़ेगी परीक्षा
आदर्श कालोनी निवासी योगेश कुमार शर्मा कहते हैं कि कोरोना लॉकडाउन की वजह से इन कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पिछले साल सीधे बिना परीक्षा के प्रमोट कर दिया गया था। जिसकी वजह से कक्षा 4 में पढ़ने वाले विद्यार्थी सीधे कक्षा 5वीं में पहुंच गए, उन्हें अब 5वीं की परीक्षा के लिए बाध्य किया जाएगा। जबकि उन्होंने अंतिम परीक्षा तो थर्ड क्लास की दी थी। अब सीधे 5वीं क्लास की परीक्षा देनी है और वो भी बिना पढ़ाई किए हुए। छोटे बच्चों की सिर्फ सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेज लगाई गई, लेकिन उनका काेई फायदा नहीं मिला है। प्राइवेट व ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में तो कोई व्यवस्था ही नहीं थी। अब जब स्कूल शुरू ही नहीं हुए तो परीक्षाएं कराने का क्या औचित्य रह जाता है।

लॉकडाउन में छोटे बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर सके, क्योंकि छोटे बच्चों के स्कूलों में नहीं कोई सुविधा
रोडवेज में कंडक्टर कप्तान सिंह कहते हैं कि ऑनलाइन क्लासेज बड़ी क्लास के बच्चे ताे पढ़ लेते हैं, लेकिन छोटे बच्चों का पढ़ पाना ही मुश्किल होता है। हालांकि छोटे बच्चों के ज्यादातर स्कूलों में इस प्रकार के संसाधन भी नहीं हैं, जिसमें खासकर ग्रामीण स्कूलों में कोई सुविधा नहीं है।
बिना पढ़ाई कैसे परीक्षा लेने की बात कर रहा है विभाग
बिजलीघर के पास निवासी राममोहन बताते हैं कि गैर व सरकारी स्कूल के किसी शिक्षक ने घर जाकर नहीं पढ़ाया। ग्रामीण क्षेत्र में तो ई-क्लास का भी कोई संसाधन उपलब्ध नहीं था। सरकारी स्कूलों में घर जाकर पढ़ाने की खानापूर्ति ही रही है। अब शिक्षा विभाग बिना पढ़ाई के कैसे परीक्षा लेने की बता कर रहा है।

एग्जाम डेट शीट नहीं आई है, डाटा तैयारी चल रही: तिवारी

  • पंजीयक शिक्षा विभागीय परीक्षा बीकानेर से अभी 5वीं व 8वीं की एग्जाम डेट शीट नहीं आई है, लेकिन विद्यार्थियों का डाटा ऑनलाइन अपडेट करने के निर्देश जरूरी मिले हैं। यह डाटा सरकारी विद्यालय शाला दर्पण पर और प्राइवेट पीएसपी पोर्टल पर अपडेट करने में जुटे हैं, यहीं से परीक्षार्थियों का डाटा ले लिया जाता है। - प्रमोद तिवारी, प्राचार्य, डाइट भरतपुर
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