ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने JVVNL के अधिकारी को मारा थप्पड़:स्कूटी रोकने का इशारा किया, रुकते ही तमाचा, कान का परदा फटा

भरतपुरएक महीने पहले
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भरतपुर कलेक्ट्रेट के सामने एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने एक JVVNL के अधिकारी को इतनी तेज थप्पड़ मारा की उसके कान का पर्दा फट गया। पीड़ित जयपुर विद्युत वितरण लिमिटेड में असिस्टेंट रेवेन्यू ऑफिसर के पद पर तैनात है। पीड़ित का कहना है कि पुलिसकर्मी नशे में था। वह थप्पड़ मारकर वहां से भाग गया। उस समय उसने शराब पी रखी थी। पीड़ित ने एसपी श्याम सिंह से पुलिसकर्मी की शिकायत की है जिसके बाद पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है।

JVVNL में ARO के पद पर कार्यरत पीयूष कुमार गोयल मंगलवार सुबह बिजली घर सब्जी मंडी से सब्जी लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान कलेक्ट्रेट के सामने खड़े पुलिसकर्मियों ने उन्हें रुकने का इशारा किया। पीयूष कुमार गोयल अपनी स्कूटी रोकने लगे। इतने में शराब के नशे में धुत पुलिसकर्मी मुकेश कुमार ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। पुलिसकर्मी मुकेश कुमार ने पीयूष कुमार गोयल को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि उनके कान में काफी तेज दर्द होने लगा।

पीयूष कुमार गोयल ने अपने पिता मनोज दुबे को फोन कर मौके पर बुलाया। लेकिन तब तक ट्रैफिक पुलिसकर्मी मुकेश कुमार वहां से भाग निकला। जब पीयूष के पिता वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने कॉन्स्टेबल का नाम पूछने लगे तो उन्होंने नाम नहीं बताया। मनोज दुबे अपने बेटे को लेकर ट्रैफिक थाना पहुंचे और ट्रैफिक इंस्पेक्टर को इसकी सूचना दी। ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने भी यातायात पुलिसकर्मी का नाम नहीं बताया। इस पर मनोज दुबे लिखित शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक श्याम सिंह के पास पहुंचे।

पुलिस अधीक्षक श्याम सिंह ने सीओ सिटी सतीश वर्मा को तुरंत घटना की जांच करने के आदेश दिए। जांच के दौरान जब यातायात पुलिसकर्मी के घर पर अन्य पुलिसकर्मी को भेजा गया, तो वह वहां पर नहीं मिला। ऐसे में पुलिस अधीक्षक श्याम सिंह ने यातायात पुलिसकर्मी मुकेश कुमार को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।

मनोज दुबे ने बताया कि घटना के बाद बेटे को ENT स्पेशलिस्ट डॉ हेमेंद्र सिंह राजौरिया को दिखाया है। बेटे के कान के पर्दे में छेद हो गया है। मनोज दुबे का कहना है कि उनका बेटा जेवीवीएनएल में एआरओ के पद पर कार्यरत है और अच्छे कामों के लिए कई बार सम्मानित भी हो चुका है। वाहन जांच के दौरान यदि बेटे की कोई गलती थी तो उनके खिलाफ कानूनी रूप से कार्रवाई करनी चाहिए थी न कि उन्हें थप्पड़ मारना चाहिए था।