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डॉक्टरों की घनघोर लापरवाही:ऑपरेशन के नाम पर गर्भवती को एक दिन भूखा रखा, 4 दिन टालते रहे प्रसव, बेटी की पेट में मौत

भरतपुर5 दिन पहले
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पुलिस को मामले की जानकारी देते परिजन व अन्य लोग।
  • डॉक्टरों की लापरवाही फिर आई सामने, 25 सितंबर को भी गेट पर ही हो गई थी डिलीवरी
  • 14 अक्टूबर को प्रसव के लिए जनाना अस्पताल में कराया था भर्ती

राजकीय जनाना अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से इस बार एक बेटी ने कोख में ही दम तोड़ दिया। पीडि़ता के परिवार का आरोप है कि 5 दिन से भर्ती गर्भवती महिला का 4 दिन तक डॉक्टर ऑपरेशन टालते रहे। जबकि एक दिन तो उसे सुबह से लेकर शाम तक भूखा भी रखा गया। लेकिन, बाद में किसी डॉक्टर ने नहीं संभाला।

रविवार सुबह तेज दर्द होने पर नॉर्मल डिलीवरी करवा दी। तब पता चला कि बेटी की पेट में ही मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि अगर डॉक्टर समय पर प्रसूता को संभालते और ऑपरेशन से अथवा नॉर्मल डिलीवरी कराते तो बच्ची की पेट में मौत नहीं होती।

यहां कन्नी गुर्जर के चौराहे पर रहने वाली पिंकी ने बताया कि उसकी बेटी 22 वर्षीय सिमरन कौर की शादी रूपवास में हुई है। गर्भावस्था के कारण वह पिछले कुछ दिन से भरतपुर में उसके पास ही रह रही थी। हालांकि वह डॉ. मीनाक्षी गुप्ता से इलाज ले रहे थे। उन्हें सितंबर में घर पर भी दिखाया था।

लेबर पेन पर सिमरन को 14 अक्टूबर को जनाना अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती कराया था। वार्ड में राउंड के दौरान आए डॉक्टरों ने सिमरन को देखा और उसकी कई जांचें कराई गईं। यहां तक कि खून की कमी होने पर 15 अक्टूबर को डॉ. मीनाक्षी गुप्ता की सलाह पर एक यूनिट ब्लड भी चढ़वाया गया। तब डॉक्टरों ने उन्हें अगले सिमरन का ऑपरेशन करने को बोला था।

16 अक्टूबर को सुबह जब डॉक्टर फिर राउंड पर आए तो सिमरन की कंडीशन देखने के बाद सलाह देकर गए कि उसे फिलहाल भूखा रखा जाए, क्योंकि उसका ऑपरेशन करना होगा। पिंकी ने बताया कि डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक सिमरन को दिनभर भूखा रखा गया। लेकिन, शाम तक कोई डॉक्टर उसे संभालने नहीं आया और न ही उसे ऑपरेशन के लिए ही थियेटर में लेकर गए।

इस दौरान कई बार डॉक्टरों को ऑपरेशन के लिए कहा तो वे हर बार टालते रहे। उन्हें ऑपरेशन टालने की वजह भी नहीं बताई गई। जब ऑपरेशन नहीं किया तो फिर रात को उन्होंने सिमरन को खाना खिला दिया। शनिवार 17 अक्टूबर को पूरे दिन किसी डॉक्टर ने सिमरन को नहीं संभाला और न ही उन्हें किसी तरह की जानकारी ही दी।

रविवार सुबह जब उसे तेज दर्द हुए तो डॉक्टरों ने नॉर्मल डिलीवरी करवा दी। लेकिन, मरी हुई बच्ची पैदा हुई। उल्लेखनीय है कि जनाना अस्पताल में 25 सितंबर को भी डीग अस्पताल से रेफर होकर आई एक महिला की गेट पर डिलीवरी हो गई थी।

डॉक्टरों ने प्रसूता का बेड टिकट तक छिपा दिया
पेट में ही बेटी की मौत होने को लेकर जब परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया तो भास्कर संवाददाता ने अस्पताल के वार्ड इंचार्ज और डॉक्टरों से प्रसूता का बेड टिकट देखना चाहा। लेकिन, स्टाफ ने बेड टिकट और इलाज संबंधी तमाम दस्तावेज छिपा दिए। क्योंकि बेड टिकट पर लिखे ट्रीटमेंट से उन डॉक्टरों के नाम सामने आते जिन्होंने प्रसूता को ब्लड चढ़ाने और ऑपरेशन करने के लिए भूखा रखने की सलाह दी थी। लापरवाही के मामलों में अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा रोगियों का रिकॉर्ड छिपाने की यह घटना नई नहीं है।

पहले ऑपरेशन की सलाह दी, फिर नॉर्मल डिलीवरी क्यों कराई ? : परिजन
प्रसूता सिमरन की मां पिंकी और अन्य परिजनों के इस सवाल का जवाब अस्पताल के किसी डॉक्टर के पास नहीं है कि दो दिन पहले ऑपरेशन की सलाह देने वाले डॉक्टरों ने फिर नॉर्मल डिलीवरी क्यों कराई। जब ऑपरेशन की तैयारियां कर ली गई थीं फिर ऑपरेशन नहीं करने की वजह परिवार को क्यों नहीं बताई गई।

सिमरन न तो मेरी पेशेंट थी और न ही मैंने उसे देख ः डॉ. मीनाक्षी
इधर, डॉ. मीनाक्षी गुप्ता का कहना है कि 15 अक्टूबर की शाम को उनकी ईवनिंग ड्यूटी थी। न तो मैंने पेशेंट को देखा और न ही मैंने आफिशियली उसके लिए कोई ट्रीटमेंट लिखा था। किस डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी, इसकी मुझे भी कोई जानकारी नहीं है।

प्रभारी बोले- इस मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है
जनाना अस्पताल के प्रभारी डॉ. रुपेंद्र झा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बच्ची की मां के पेट में ही मौत होने के मामले की जांच कराई जा रही है। ऑपरेशन की सलाह के सवाल पर उन्होंने कहा कि अस्पताल में हर दिन अलग-अलग डॉक्टर राउंड लेते हैं। ऑपरेशन के डे भी सभी के अलग-अलग होते हैं। इसलिए फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता।

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