बैठक में नगर के पालिकाध्यक्ष ने जताई अपनी पीड़ा:रामअवतार बोले- ईओ को विधायक टिकने नहीं देते, कैसे हो टैक्स वसूली, वाजिब अली; आरोप गलत, 3 साल में एक ही ईओ बदला

भरतपुर2 महीने पहले
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राज्य वित्त आयोग की बैठक में नगर पालिका नगर के पालिकाध्यक्ष ने इस मुद्दे पर अपनी पीड़ा बयां की। - Dainik Bhaskar
राज्य वित्त आयोग की बैठक में नगर पालिका नगर के पालिकाध्यक्ष ने इस मुद्दे पर अपनी पीड़ा बयां की।

स्थानीय निकायों में विधायकों के दखलअंदाजी के चलते टैक्स कलेक्शन का काम नहीं हो पा रहा। बड़े कॉम्पलैक्स रसूखदारों के होते हैं इसलिए जब भी कड़े निर्णय लेने का मौका आता है विधायकों द्वारा अफसरों को बदल दिया जाता है। राज्य वित्त आयोग की बैठक में नगर पालिका नगर के पालिकाध्यक्ष ने इस मुद्दे पर अपनी पीड़ा बयां कर दी।

उन्होंने कहा कि कोई अधिकारी टैक्स वसूलना चाहता है, तो उसका ट्रांसफर स्थानीय एमएलए द्वारा करा दिया जाता है। मेरी नगर पालिका में दो महीने में पांच ईओ बदल गए हैं। गवर्नमेंट का अभियान चल रहा है। कोई अधिकारी काम कैसे करेगा, समझ में नहीं आत। पंद्रह-पंद्रह दिन में ईओ लगाए जा रहे हैं।

पट्टा अभियान में सफलता मिले तो मिले कैसे? धारा 69 में पट्टे के पहले 11 हजार रुपए थे जिसे घटा कर 500 रुपए कर दिए गए। जिन्होंने पहले 11 हजार रुपए जमा कराए, अब वे अध्यक्ष और ईओ को बुरा-भला कहते हैं। विषम परिस्थितियां हैं। पालिकाध्यक्ष के इस बयान से सियासी विवाद खड़ा हो गया।

लोगों ने इसे सीधे स्थानीय विधायक वाजिब अली से जोड़कर देखा तो विधायक वाजिब अली ने पालिकाध्यक्ष की बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि नगर में केवल एक ईओ बदला गया है वह भी इसलिए क्योंकि पुराने ईओ यहां से जाना चाहते थे।

सीधी बात : रामअवतार अग्रवाल, अध्यक्ष नगर पालिका, नगर
विधायक की पसंद से ही ट्रांसफर-पोस्टिंग
Q. ईओ के ट्रांसफर का मामला उठाने की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब: बड़े अधिकारी बैठकों में बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। टैक्स कलेक्शन को लेकर भी यही बात कही जा रही थी। बड़े परिसर वालों से टैक्स वसूली में स्थानीय दबाव आते ही हैं। ग्राउंड की रियलिटी कुछ और होती है।
Q. क्या विधायक के दखल पर ईओ का ट्रांसफर हुआ?
जवाब: अधिकारियों के ट्रांस्फर और ज्वाइनिंग दोनों स्थानीय विधायकों की सहमति से ही होती है। विधायक को पसंद नहीं होता तो नया अधिकारी ज्वाइन ही नहीं करता।

सीधी बात : वाजिब अली,विधायक नगर

टैक्स से जुड़े किसी कर्मी को नहीं हटाया गया
Q. क्या दो माह में पांच ईओ का ट्रांसफर करवाया गया?
जवाब: नहीं, फिजिकली केवल एक ईओ का ट्रांस्फर हुआ और दूसरे ने ज्वाइन किया। बीच में निकला ऑर्डर कैंसिल हो गया था। हां, अभियान के बीच ट्रांस्फर नहीं होना चाहिए था।

Q. पूर्व ईओ का ट्रांसफर टैक्स कलेक्शन के कारण किया गया?
जवाब: नहीं, पूर्व ईओ मेरा कार्यकाल से पहले से लगे थे। वह स्वयं यहां से जाना चाहते थे। टैक्स कलेक्शन से जुड़े किसी अधिकारी कर्मचारी को नगर से नहीं हटाया गया।

Q. फिर नगर पालिका अध्यक्ष ने बैठक में ऐसा क्यों कहा?
जवाब: उन्होंने किस संदर्भ में यह बात मैं कह नहीं सकता।

वसूली इसलिए जरुरी... केन्द्र ग्रांट बंद करने की तैयारी में, कमाई नहीं तो विकास रुकेगा
इधर, टैक्स वसूली के मामले में ढीले रवैये को लेकर 6वें राज्य वित्त आयोग के पदाधिकारी नाराज हैं। भरतपुर में बैठक लेने आए आयोग अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह ने साफ कहा कि केन्द्रीय वित्त आयोग द्वारा दी जाने वाली ग्रांट बंद होने वाली है। ऐसे में निकाय के संसाधनों को बढ़ाकर आय में वृद्धि कर विकास को गति दें। निकाय अध्यक्षों को कहा गया कि वे अपनी क्षेत्रीय समस्याएं और सुझाव वित्त आयोग को भिजवाएं।

आयोग सदस्य डाॅ. अशोक लाहोटी ने निकायों को सुझाव दिया कि निकाय बोर्ड के माध्यम से जिला कलक्टर को पत्र लिखें। जिससे यूडी टैक्स की एनओसी के बिना कोई भी रजिस्ट्री न करें। साथ ही यूडी टैक्स की अनुमति के बाद ही फायर सेफ्टी एनओसी जारी करें। सूखे एवं गीले कचरे का भी खाद्य व अन्य कंपनियों से एमओयू कर आय में वृद्धि करें।

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए भी प्रति परिवार शुल्क वसूलें। आयोग सदस्य लक्ष्मण सिंह रावत ने कहा कि मितव्ययता बरतने वाले निकायों काने इनसेंटिव में 5 प्रतिशत बढ़ाकर 10 प्रतिशत राशि दी जाएगी। बैठक में राज्य वित्त आयोग के सदस्य सचिव बन्ना लाल, आयोग के सलाहकार शांतिलाल जैन, महापौर अभिजीत कुमार और आयुक्त कमल राम मीणा ने भी विचार व्यक्त किए।

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