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लखीमपुर खीरी कूच में कांग्रेस ने जुटाए सफाईकर्मी:ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर लाए गए सफाई और नरेगा कर्मचारी, बोले- अधिकारियों के आदेश थे, यहां खाने का भी नहीं पता

भरतपुर19 दिन पहले
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ठेके पर नगर निगम में काम करने वाले प्रदर्शन में पहुंचे। - Dainik Bhaskar
ठेके पर नगर निगम में काम करने वाले प्रदर्शन में पहुंचे।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसानों की मौत पर कांग्रेस अपनी सियासत चमकाने में जरा भी पीछे नहीं रहना चाहती। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में गुरुवार को भरतपुर के ऊंचा नगला बॉर्डर पर धरना दिया जा रहा था। जिसमें प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, कई विधायक और सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। भरतपुर कांग्रेस ने भी प्रदेशाध्यक्ष को दिखाने के लिए भीड़ जुटाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। लेकिन पंडाल में बैठे लोगों से बात करने पर पता चला की भीड़ जुटाने के लिए सफाई और नरेगा कर्मियों को बुला लिया गया। जिन्हें उनके अधिकारियों ने यहां पहुंचने के आदेश दिए थे।

जब पंडाल में बैठे लोगों से बात की गई तो पता लगा कि उन्हें सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए इकठ्ठा किया गया है। जब इस बारे में पता किया तो सामने आया की नगर से सफाई कर्मचारियों को ट्रॉली में बैठा कर बॉर्डर पर लाया गया है। सफाई कर्मचारियों के अलावा वहां काफी संख्या में नरेगा में काम करने वाली महिलाएं भी मिलीं। सबसे बड़ी बात ये थी की उनको यही नहीं पता था की उन्हें बॉर्डर पर क्यों लाया गया है।

पंडाल में बैठी नरेगा महिलाकर्मी।
पंडाल में बैठी नरेगा महिलाकर्मी।

पंडाल में अंदर जाते एक सफाई कर्मचारी मंजीत से बात की तो उसने बताया की नगर निगम के सेनेट्री इंस्पेक्टर ने सभी कर्मचारियों को बोला की आप सभी ऊंचा नगला बॉर्डर पर जाओ। वहां रैली में शामिल होना है। सफाई कर्मचारियों ने बताया की वह सभी ठेके पर नगर निगम में काम करते हैं।

ट्रैक्टर में पहुंचे लोग।
ट्रैक्टर में पहुंचे लोग।

कांग्रेस के धरने मौजूद एक महिला से बात की तो उसने बताया की वह नरेगा में काम करती है। मैट के कहने पर यहां प्रदर्शन में शामिल होने आई है। उनको यह नहीं पता की यहां किस बात का धरना चल रहा है।

634 सफाई कर्मचारी पहुंचे

इस दौरान ट्रैक्टर में पहुंचे कुछ लोगों से बात की तो सभी का कहना था कि वे नगर निगम में नौकरी करते हैं। करीब 634 लोग अलग-अलग वाहनों के जरिए यहां पहुंचे हैं। यहां आने के बाद खाने-पीने का भी पता नहीं।

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