धारीवाल से मिले 300 लोग:बोले- 40 साल से कच्चे डंडे पर बसे हैं,अब तो पट्‌टे दो सरकार

भरतपुर3 महीने पहले
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भरतपुर. किला परिसर में टाउन के हाॅल के पास पंक्तबद्ध होकर यूडीएच मंत्री को ज्ञापन देने का इंतजार करते लोग। - Dainik Bhaskar
भरतपुर. किला परिसर में टाउन के हाॅल के पास पंक्तबद्ध होकर यूडीएच मंत्री को ज्ञापन देने का इंतजार करते लोग।
  • विभिन्न मांगों को लेकर संगठन और व्यक्तियों ने यूडीएच मंत्री को दिए ज्ञापन
  • परकोटे का रियासतकालीन मानचित्र मंत्री को दिखाया

शहर के कच्चे परकोटे(डंडे) पर बसे दो हजार परिवारों को आज भी अपनी जमीन के पट्टों का इंतजार है। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के भरतपुर आगमन पर कच्चा परकोटा नियमन संघर्ष समिति की ओर से प्रशासन शहरों के संग अभियान 2021 में शामिल कर निर्धारित मापदंडों, नियम कानूनों में शिथिलता देकर पट्टे देने की मांग को लेकर 5 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया।

समिति के संयोजक जगराम धाकड व पूर्व नेता प्रतिपक्ष इन्द्रजीत भारद्वाज ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर भारद्वाज ने मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए शहर के परकोटे की वस्तुस्थिति का पूर्ण विवरण प्रस्तुत की। परकोटे के रियासतकालीन मानचित्र का अवलोकन कराया और मांग की गई कि कच्चा परकोटा पर लगभग 40-50 वर्ष पूर्व से निवास करते आ रहे लोगों को मौके पर मौजूद आम रास्तों के आधार पर एवं वर्षों से रह रहे लोगों को रियायती दरों पर पट्टे दिए जाएं।

मंत्री को अवगत कराया गया कि राजकीय पुरातत्व विभाग द्वारा परकोटे की भूमि को संरक्षित स्थान से मुक्त कर अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ स्थानीय निकाय भरतपुर को हस्तांतरण किया जा चुका है जिसका स्वामित्व नगर निगम भरतपुर का है। परकोटे पर वर्षों से काबिज लोगों की सुविधा के लिए स्थानीय निकाय द्वारा सडक, नाली, रोड लाइट, सुलभ कॉम्पलेक्स, सामुदायिक भवन आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

परकोटे का टोटल स्टेशन सर्वे एवं मौके के गूगल शीट पर मानचित्र तैयार कराए जा चुके हैं लेकिन निकाय द्वारा पट्टे देने की कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्वायत्त शासन मंत्री द्वारा संघर्ष समिति को आश्वासन दिया गया कि सरकार संघर्ष समिति के मांग पत्र पर गौर करेगी।

निगम के पार्षदों ने मेयर के खिलाफ मंत्री को दिया ज्ञापन
इधर, शहर बचाओ संघर्ष समिति ने नगर निगम के पार्षदों ने मंत्री धारीवाल को मेयर अभिजीत कुमार के खिलाफ ज्ञापन दिया। ज्ञापन मेंं कहा है कि उनकी कार्यशैली से निगम के पार्षद व आमजन खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। निगम में भारी भ्रष्टाचार है। मेयर व आयुक्त में हमेशा विवाद के हालात रहते हैं।

निगम द्वारा लम्बे समय से शहर की सफाई का कार्य मैनुअली व कचरा परिवहन का कार्य कराया जा रहा है। जिसका 65 वार्डों का वार्षिक खर्चा लगभग 9 करोड रुपए प्रतिवर्ष आता है जबकि नई व्यवस्था में यह खर्च लगभग तीन गुना हो जाएगा। पार्षदों को प्रलोभन देने के लिए उन्हें चंडीगढ़ की विजिट कराई गई।

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