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प्रशासन का नहीं ध्यान:जिले के 120 सरकारी स्कूलों के खेल मैदानों पर कब्जे, शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

भरतपुरएक महीने पहले
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  • खेल और खिलाड़ियाें के लिए सरकार कर रही करोड़ों रुपए खर्च, प्रशासन अभियान चलाकर हटवाएगा कब्जे

खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के नाम पर केंद्र एवं राज्य की सरकारें तरह-तरह की योजनाएं चला रही हैं। लाखों-करोड़ों रुपए का बजट खेल एवं खिलाड़ियों के विकास पर खर्च किया जा रहा है। लेकिन स्कूलों में खेल और खिलाड़ियों के विकास को लेकर उदासीनता बरती जा रही है। लोगों ने सरकारी स्कूलों के खेल मैदान पर अवैध कब्जे क लिए हैं।

शिकायतों के बावजूद भी अतिक्रमण हटाने के लिए न तो स्कूल प्रशासन ही ध्यान दे रहा है और न ही जिला प्रशासन। भरतपुर जिले में प्राथमिक स्तर, उच्च प्राथमिक स्तर, माध्यमिक स्तर एवं उच्च माध्यमिक स्तर के कुल 1719 सरकारी विद्यालय हैं। इनमें से 262 स्कूलों के पास तो खेल मैदान ही उपलब्ध नहीं है। वहीं 120 स्कूलों के खेल मैदान ऐसे हैं, जिन पर भू माफियाओं ने अवैध कब्जा कर रखा है। जिनमें से 66 विद्यालयों के संस्था प्रधानों ने अपने विद्यालय के खेल मैदान पर हो रहे कब्जे की शिकायत उच्च अधिकारियों को प्रेषित कर रखी है, लेकिन उसके बावजूद ही मैदान से कब्जा हटाने को लेकर शिक्षा विभाग और प्रशासन के अधिकारियों की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

कोई रिस्क लेने को तैयार नहीं, इसलिए हो जाते हैं कब्जे: शर्मा

सेवानिवृत प्रधानाचार्य दिनेश चंद शर्मा ने बताया कि ऐसे मामलों में प्रधानाचार्य से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक कोई रिस्क ही नहीं लेना चाहता इसलिए खेल मैदानों पर कब्जे बरकरार होते हैं। यदि कुछ संस्था प्रधान अपने उच्च अधिकारियों को शिकायत भी भेज देते हैं, तो विभाग के अधिकारी भी उन शिकायतों के समाधान को लेकर कोई खास प्रयास नहीं करते। बगैर पुलिस बल के कब्जों को हटा पाना संभव ही नहीं होता, वहीं शिक्षा विभाग, प्रशासन और पुलिस डिपार्टमेंट के बीच आपसी समन्वय नहीं होने के कारण अवैध कब्जे हट नहीं पाते।

सबसे ज्यादा कब्जे रूपवास में

आंकड़ों के मुताबिक जिले भर में 120 विद्यालयों के खेल मैदानों पर अवैध कब्जा है। जिनमें ब्लॉक बयाना के 9, डीग के 7, कामां के 10, कुम्हेर के 5, नदबई के 19, नगर के 9, पहाड़ी के 12, रूपवास के 22, सेवर के 10 तथा वैर ब्लॉक के 17 विद्यालयों के खेल मैदानों पर भू माफियाओं ने अवैध कब्जा कर रखा है। इनमें से 66 विद्यालयों के संस्था प्रधानों की ओर से अतिक्रमण संबंधी शिकायत शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को कर रखी हैं।

जिले में 264 सरकारी विद्यालयों के पास हैं खुद के खेल मैदान

यूं तो जिले में 264 विद्यालय ऐसे हैं जिनके पास विकसित खेल मैदान हैं। इनमें से 58 विद्यालय ऐसे हैं, जिनके पास स्वयं के परिसर में विकसित खेल मैदान हैं। वहीं 443 विद्यालय ऐसे हैं जिनके स्वयं के परिसर में खेल मैदान हैं, लेकिन वे विकसित नहीं हैं। वहीं 23 विद्यालय ऐसे हैं जिनके लिए खेल मैदान के लिए जमीन की उपलब्धता ही संभव नहीं है। इसके अलावा 84 विद्यालयों ने खेल मैदान की उपलब्धता के लिए सक्षम अधिकारी को भू आवंटन करने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे रखे हैं। इसके अलावा 140 विद्यालयों की ओर से खेल मैदानों को विकसित करने के लिए नरेगा में प्रस्ताव बना कर भेजे गए हैं।

जल्द करेंगे कार्रवाई: डिडेल

डीओ एलीमेंट्री और माध्यमिक शिक्षा से बात कर जिन स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण हैं उनकी सूची तैयार कराई जाएगी। साथ ही राजस्व विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पुलिस जाब्ता उपलब्ध कराकर अभियान चलाया जाएगा। ताकि सरकारी स्कूलों की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सके।

नथमल डिडेल, जिला कलेक्टर भरतपुर।

खेल मैदानों के लिए प्रयास किए जा रहे हैं: जैन

खेल मैदानों से अतिक्रमण हटाने, खेल मैदान रहित विद्यालयों को खेल मैदान उपलब्ध कराने तथा खेल मैदानों को विकसित करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। खेल मैदान रहित विद्यालयों को जमीन आवंटन के लिए सक्षम अधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर भेजे गए हैं। जहां खेल मैदान उपलब्ध हैं उन्हें विकसित करने के लिए नरेगा में प्रस्ताव बनाकर भेजे गए हैं। वहीं खेल मैदानों से अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस एवं प्रशासन से सहयोग लिया जा रहा है।

राजेश जैन, सहायक परियोजना समन्वयक

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