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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:वैक्सीन की दो डोज लगवाने के बाद भी पॉजिटिव हो गया, इन्फेक्शन फेंफड़ों तक पहुंच गया था, प्रोनिंग से ऑक्सीजन लेवल मेन्टेन किया और हिम्मत से जीती जंग

भरतपुरएक महीने पहले
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मैं, राजेश कुमार उर्फ रिंकू मुदगल रूपवास का रहने वाला हूं। जयपुर में बतौर चिकित्सा कर्मी कार्यरत हूं। इसी 17 अप्रैल को मेरे शरीर में दर्द हुआ। हल्के बुखार के साथ जुकाम और खांसी भी थी। शरीर टूट रहा था। इस पर मैंने अस्पताल जाकर डॉक्टर की सलाह से दवाएं लेना शुरू कर दिया था। लेकिन,जब 3-4 दिन तक बुखार, जुकाम और खांसी में कोई सुधार नहीं दिखा तो दुबारा अस्पताल गया और डॉक्टरों से सलाह-मशविरा किया।

क्योंकि मैं फरवरी और मार्च में ही वैक्सीन की दोनों डोज ले चुका था। इसलिए कोरोना की संभावना कम लग रही थी। फिर भी मैंने बुखार-खांसी ज्यादा बढ़ गई और सांस लेने में तकलीफ हुई तो 24 अप्रैल को एचआरटीसी जांच कराई। रिपोर्ट में फेफड़ों में इन्फेक्शन पाया गया। इस पर एक बारगी तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। लेकिन, तुरंत ही पत्नी पिंकी ने मुझे हिम्मत बंधाई और कहा कि घबराएं नहीं। घर पर ही आराम करें और डॉक्‍टरों की सलाह लेकर इलाज कराएं।

देखना आप कुछ ही दिन में कोरोना को मात दे देंगे। फिर मैंने लैब के बाह रही बैठकर सोच-विचार किया और जयपुर के बगरू में चिकित्सक डॉ विकास शर्मा की सलाह पर राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंस (आरयूएचएस) अस्पताल में जाकर इलाज कराने का फैसला किया। इस दौरान बीपीएम सांगानेर विकास कुमार मुझे मानसिक तौर पर साहस देते रहे।

इधर, इलाज शुरू कराने के साथ ही मैंने रोजाना गुनगुना नीबू पानी 3-4 बार पीने के साथ ही भाप ली। दवाईयों के साथ-साथ पेट के बल लेटकर प्रोनिंग व्यायाम करके ऑक्सीजन लेवल संतुलित रखा। साथ ही अनुलोम विलोम, प्राणायाम, कपालभांति शुरू किया। इस दौरान पत्नी और परिवार के लोगों ने भी काफी मानसिक सपोर्ट किया।

एक्सपर्ट व्यू... रोगी का हौंसला बनाए रखें

डॉ. रविंद्र कुंतल का कहना है कि कोरोना से जीत के लिए शारीरिक मजबूती से ज्यादा मानसिक दृढ़ता भी बहुत जरूरी है। क्योंकि लोगों में कोरोना संक्रमण का भय इस कदर है कि चिंता और तनाव से ही ऑक्सीजन का स्तर कम हा़े जाता है। ऐसी स्थिति में मनोबल बनाए रखना जरूरी है। इसमें परिवार, मित्र और रिश्तेदारों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

वे अगर रोगी से बात करके हौंसला और दिलासा देते हैं तो रिकवरी जल्दी होती है। रोगियों को योग व्यायाम करने के साथ ही पौष्टिक आहार भी लेना चाहिए। अच्छा साहित्य पढ़ें, अपनी रुचि के गेम खेले, संगीत सुने, फिल्में देखें, लेखन करेंगे तो बीमारी से ध्यान बंटेगा।

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