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सूर्य पर्व मकर संक्रांति आज:संग्रहालय में 300 साल पुरानी धूप घड़ी, प्रहर व घटी से पता चलता था समय

भरतपुर13 दिन पहलेलेखक: प्रमोद कल्याण
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  • भास्कर में देखिए भरतपुर की पहली धूप घड़ी, इसे डीग से शिफ्ट किया था, 195 साल पहले हुआ था जीर्णोद्धार

समय चक्र का महत्व कितना है इसे किला स्थित कमरा खास यानी मौजूदा राजकीय संग्रहालय में लगी धूप घड़ी से जान सकते हैं। यह तीसरी मंजिल पर बनी बारहदरी के पास पिलर पर लगी है। जानकारों के अनुसार करीब 300 साल पहले इसे डीग से भरतपुर में शिफ्ट किया गया था। जयपुर ज्योतिष यंत्रालय के तत्कालीन अध्यक्ष कल्याण दत्त शर्मा की देखरेख में इसका 195 साल पहले जीर्णोद्धार भी कराया गया था। सूर्य घड़ी पर ही इस बात का उल्लेख है।

राजकीय संग्रहालय प्रभारी हेमंत अवस्थी का कहना है कि सेंड स्टोन पर बनी यह धूप घड़ी कितनी पुरानी है। इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन, रिकार्ड के मुताबिक यह धूप घड़ी बिल्डिंग के साथ ही हैंडओवर हुई थी। जहां यह घड़ी बनी है, उस कमरा खास का निर्माण सन् 1826 में हुआ। यानी उस समय सौर घड़ी अथवा सन डायल का प्रयोग सूर्य की दिशा से समय का पता लगाने के लिए किया जाता था। माना जाता है कि आगे चलकर धूप घड़ी को आधार बनाकर ही समय बताने वाली अन्य घडिय़ों का आविष्कार हुआ।

उल्लेखनीय है कि भारत में वैदिक काल से ही समय काल पता करने और ज्योतिषीय गणना के लिए सौर घडिय़ों का प्रयोग होता रहा है। जयपुर सौर सिद्धांत से चलने वाली समय गणना और ज्योतिष का बड़ा केंद्र रहा है। जिसका असर अन्य जिलों पर भी रहा।
सूर्य घूमने के साथ जमीन पर पड़ी स्तंभ की छाया से पता चलता है समय

आरंभिक सौर घडिय़ां सुबह और दोपहर में ही काम करती थीं। इनकी निर्माण विधि में एक बड़े स्तंभ को एक सिरे से बांधकर जमीन में गाड़ दिया जाता था। सूर्य के घूमने के साथ-साथ जमीन पर स्तंभ की छाया से समय का अनुमान लगाया जाता था। मध्यान्ह के समय स्तंभ की छाया सबसे छोटी होती थी जिससे पता चलता था कि सूर्य ठीक आकाश के बीच में है।

आज सुबह 8.13 बजे मकर राशि में आएंगे सूर्यदेव

आज 8.13 बजे सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पुण्यकाल सूर्योदय से सूर्यास्त तक होगा। ज्यातिषाचार्य राम भरोसी भारद्धाज ने कहा कि पुण्यकाल सुबह 8.30 से 10.18 बजे तक है। इस साल पौष माह में गुरुवार को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तब चंद्रमा, बुध, गुरु और शनि पांच ग्रही योग है। साथ ही मलमास समाप्त होगा।

भास्कर नॉलेज... 3 घंटे का एक प्रहर और 24 मिनट की होती है घटी
डॉ. सुधा सिंह का कहना है कि सूर्य सिद्धांत सौर घड़ी से समय पता करने का शुद्ध तरीका है। इस घड़ी को इस तरह स्थापित किया गया है कि सूर्य के आकाश के ठीक बीच में होने पर परछाई बिल्कुल सीधी दिखे। इसमें प्रहर और घटी उत्कीर्ण की हुई हैं। सूर्य की परछाई जिन बिंदुओं पर पड़ती थी उसी आधार पर प्रहर और घटी की जानकारी होती थी।

एक दिन में 8 प्रहर होते हैं और एक प्रहर 3 घंटे का है। इनमें चार प्रहर दिन के और चार रात के। दिन में पूर्वाह्न, मध्याह्न, अपराह्न, सायंकाल कहा जाता है, जबकि रात के प्रहरों को प्रदोष, निशिथ, त्रियामा और उषा काल कहा गया है। एक प्रहर को साढ़े सात घटी में बांटा गया है, जिसमें एक घटी 24 मिनट की होती है। यानी एक प्रहर 180 मिनट का हाेता है।

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