रिश्वत की रिकॉर्डिंग बनी सबूत:गवाही से पहले हुई शिकायतकर्ता की मौत, कोर्ट ने दो भ्रष्टों को सुनाई 4 साल की सजा

भरतपुर11 दिन पहले
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रिश्वत लेने के  मामले में जयपुर की विशेष  अदालत ने भरतपुर में मथुरा गेट  के रहने वाले ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर  मंजीत सिंह और दलाल झुंझुनूं  निवासी नंदलाल सिंह को 4 साल  की सजा सुनाई है। - Dainik Bhaskar
रिश्वत लेने के  मामले में जयपुर की विशेष  अदालत ने भरतपुर में मथुरा गेट  के रहने वाले ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर  मंजीत सिंह और दलाल झुंझुनूं  निवासी नंदलाल सिंह को 4 साल  की सजा सुनाई है।

दलाल के माध्यम से 30 हजार रुपए की रिश्वत लेने के मामले में जयपुर की विशेष अदालत ने भरतपुर में मथुरा गेट के रहने वाले ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर मंजीत सिंह और दलाल झुंझुनूं निवासी नंदलाल सिंह को 4 साल की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि इस मामले में शिकायतकर्ता क्रशर संचालक राकेश मलिक की कोर्ट में गवाही से पहले ही मृत्यु हो गई थी। इन दोनों ने उससे 30,000 रुपए रिश्वत ली थी।

कोर्ट ने रिश्वत मांगने और लेने की रिकॉर्डिंग को एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों की गवाही को पर्याप्त सबूत माना। हालांकि ऐसे मामलों में रिश्वत देने वाले की गवाही काफी महत्वपूर्ण होती है। लेकिन, एसीबी के तत्कालीन एसपी हरिकिशन गौड और डिप्टी एसपी नियाज मोहम्मद ने कोर्ट को बताया था कि पीड़ित राकेश मलिक ने रिश्वत मांगने और लेने की रिकॉर्डिंग उनकी मौजूदगी में सुनी थी। उसने इनकी आवाज पहचानने के बाद ही एसीबी में अपने बयान दर्ज कराए थे।

दरअसल, परिवहन विभाग के उप निरीक्षक मंजीत सिंह को एसीबी ने 10 साल पहले दलाल के माध्यम से रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। सुनवाई के बाद एसीबी कोर्ट जयपुर महानगर के जज राजेन्द्र कुमार सैनी ने दोनों को 50 हजार रुपए जुर्माने से भी दंडित किया है। सजा भुगतने के लिए उन्हें जयपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। विशिष्ट लोक अभियोजक सैयद महमूद अली के अनुसार मंजीत सिंह वर्ष 2012 में झुंझुनूं में तैनात रहा था। वहीं उसके संपर्क दलाल नंदलाल से हुए थे।

लालच बढ़ाने पर हुई शिकायत
पीड़ित क्रेशर संचालक राकेश मलिक के लिए झुंझुनूं से करीब 24 ट्रक पत्थर हरियाणा जाता था। इसके लिए भ्रष्ट ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर 3 हजार रुपए प्रति ट्रक लेता था। लेकिन, अप्रेल, 2012 में उसने रिश्वत की रकम बढ़ा कर 4000 रुपए प्रति ट्रक कर दी। इस पर क्रेशर संचालक ने एसीबी बीकानेर में उसकी शिकायत कर दी। वह 63 हजार रुपए दे चुका था, लेकिन बकाया 33 हजार रुपए नहीं देना चाहता। इस पर एसीबी टीम ने भ्रष्ट इंस्पेक्टर और दलाल को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

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