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  • The Employees Took Possession Of The Corporation's Land, 4 People Fought The Lawsuit At Their Expense, Despite The Court Order, The Corporation Did Not Remove The Possession

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अवैध कब्जा:निगम की जमीन पर कर्मचारियों ने ही कर लिया कब्जा, 4 लोगों ने अपने खर्चे पर लड़ा मुकदमा, कोर्ट आदेश के बावजूद निगम ने कब्जा नहीं हटाया

भरतपुर12 दिन पहलेलेखक: योगेश शर्मा
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सरकारी जमीन बचाने के लिए आयुक्त, कलेक्टर से लेकर संभागीय आयुक्त और मेयर-मंत्री से भी लगाते रहे गुहार, किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई - Dainik Bhaskar
सरकारी जमीन बचाने के लिए आयुक्त, कलेक्टर से लेकर संभागीय आयुक्त और मेयर-मंत्री से भी लगाते रहे गुहार, किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई
  • पुरानी कलेक्ट्री के पीछे सामुदायिक भवन के पास खाली प्लॉट पर कब्जे का मामला, कोर्ट ने की थी जागरुक लोगों की तारीफ

सरकारी सिस्टम कैसे काम करता है। इसकी बानगी पुरानी कलेक्ट्री के पीछे स्थित सामुदायिक भवन के पास पड़े 119 वर्गगज के खाली प्लॉट के मामले में देखी जा सकती है। इस प्लॉट पर नगर निगम के ही कर्मचारियों ने 4 साल पहले कब्जा कर लिया। क्षेत्रवासियों ने शिकायत की। किसी अधिकारी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। फिर 4 लोगों ने मिलकर अपने खर्चे पर कोर्ट में मुकदमा किया।

कोर्ट से जमीन से कब्जा हटवाने के लिए फैसला कराया। आदेशों की कॉपियां तक निगम आयुक्त, मेयर, कलेक्टर, संभागीय आयुक्त और मंत्री को ले जाकर दीं। इन सभी से बार-बार गुहार करी लेकिन, फिर भी निगम अपनी ही जमीन का कब्जा लेने को तैयार नहीं हुआ। लोगों के प्रयास देख कर्मचारियों को लगा कि कहीं वास्तव में ही कब्जा न हट जाए। इसलिए वे अपील करके निचली अदालत के फैसले पर दो महीने बाद हाईकोर्ट से स्टे ले आए।

जिम्मेदारो जवाब दो, क्यों नहीं हटाया अतिक्रमण

  • 9 दिसंबर, 20 सेशन कोर्ट ने डिक्री कर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया।
  • 18 दिसंबर, 20 ननि आयुक्त और जिला कलेक्टर को कोर्ट आर्डर की कॉपी के साथ ज्ञापन दिया।
  • 22 दिसंबर, 20 संभागीय आयुक्त पीसी बेरवाल और तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री को ज्ञापन।
  • 23 दिसंबर, 20 महापौर अभिजीत कुमार को ज्ञापन दिया।
  • 3 फरवरी, 21 अतिक्रमणकारी आखिर में हाईकोर्ट से स्टे ले आए।

ऐसा सिस्टम, कोई क्यों आगे आए

  • जमीन को मुक्त कराने दो माह तक अफसरों के दरवाजे पर दस्तक देता रहा, लेकिन अपनी जमीन का कब्जा लेने अफसर नहीं पसीजे। अगर, ऐसा सिस्टम है तो आम आदमी क्यों सरकारी संपत्तियों की रक्षा के लिए आगे आएगा। - वीरेंद्र इकलेरिया, वादी

कोर्ट आदेश के बावजूद अफसर कटवाते रहे चक्कर
निगम की जमीन से अतिक्रमण हटवाने कोर्ट ने 9 दिसंबर को डिक्री जारी कर दी थी। इसके बाद कोर्ट आदेश की कॉपियों के साथ स्थानीय लोगों ने 18 दिसंबर को नगर निगम आयुक्त से जमीन से अनाधिकृत कब्जा हटाने का आग्रह किया। लेकिन, निगम अफसर टस से मस नहीं हुए। इसके बाद भी आयुक्त एवं मेयर से लेकर कलेक्टर, संभागीय आयुक्त और मंत्री तक को बार-बार ज्ञापन दिए गए। लेकिन, उनके ज्ञापन आगे फॉरवर्ड ही होते रहे। किसी ने भी कब्जा नहीं हटवाया।

इनका कहना है

  • 18 दिसंबर को ऑर्डर मिला, 22 दिसंबर से 4 जनवरी तक मैं छुट्‌टी पर थी। 6 जनवरी को ट्रांस्फर हो गया। कार्रवाई नहीं कर सकी। - नीलिमा तक्षक, पूर्व आयुक्त, नगर निगम
  • कब्जा हटाना चाहिए था। लोगों को निगम की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। जांच करवाकर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करूंगा। - पीसी बेरवाल, संभागीय आयुक्त
  • स्टे जारी होने से पहले निगम कब्जा ले सकता था। केवल कोर्ट में अपील होने से कार्रवाई नहीं करने का कोई आधार नहीं बनता। - गुलराज गोपाल, अधिवक्ता

सीधी बात: डॉ. राजेश गोयल, आयुक्त

जमीन से अतिक्रमण हटाने पब्लिक को इतनी मशक्कत क्यों करनी पड़ रही है?

- मेरे पद संभालने के 7 दिन में नोटिस जारी हो गए थे।
नोटिस की मियाद के बाद भी कब्जा हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं की?
- प्रतिवादी निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर चुका था।
क्या निगमकर्मियों के प्रोफेशनल मिसकंडक्ट का मामला नहीं है? निगम ने क्या कार्रवाई की?
- यह प्रोफेशनल मिसकंडक्ट तो है। कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब मैं इस पर विचार करूंगा।

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