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क्लिंकर के कारण मानक से 7 गुना ज्यादा प्रदूषण:भरतपुर रेलवे यार्ड में 3 दिन पहले हुई क्लिंकर की जांच की रिपोर्ट आई

भरतपुर19 दिन पहले
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भरतपुर रेलवे यार्ड में 3 दिन पहले हुई क्लिंकर की जांच रिपोर्ट आ गई है। एनजीटी में पेश रिपोर्ट में मानक से 7 गुना ज्यादा प्रदूषण पाया गया है। यह स्थिति तब है जबकि प्रदूषण रोकने के लिए वहां नेट लगा था। फव्वारे लगाने के साथ ही अन्य आवश्यक इंतजाम भी किए किए गए थे। इसलिए माना गया है कि पिछले 3 साल से इस इलाके के करीब 50 हजार से ज्यादा लोग वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि सीमेंट बनाने में काम आने वाला क्लिंकर पाउडर निंबाहेड़ा समेत राजस्थान के कई जिलों से आकर भरतपुर रेलवे यार्ड में उतरता है। यहां से इसे अलीगढ़, दादरी, इलाहाबाद समेत कई जिलों में लगे सीमेंट के छोटे प्लांट में भेजा जाता है। क्लिंकर की लाेडिंग/अनलाेडिंग से रेलवे स्टेशन के आसपास वाले इलाके प्रदूषण से लोग काफी आहत थे।

लोहागढ़ संघर्ष समिति द्वारा इस प्रदूषण को रोकने के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है। आंदोलनकारी कृष्णमुरारी की ओर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पिछले दिनों याचिका भी दायर की गई थी। एनजीटी के निर्देश पर जिला प्रशासन ने 5 जुलाई को क्लिंकर की स्पेशल रैक मंगवाकर वायु प्रदूषण की जांच कराई थी।

इसमें अनलोडिंग से पहले 352 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और लोडिंग के बाद 697 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर प्रदूषण पाया गया। जबकि मानक 100 एमजी है। इसलिए 7 गुना ज्यादा प्रदूषण काफी खतरनाक है। चिकित्सा अधिकारी डाॅ. उदित चौधरी की रिपोर्ट में भी माना गया है कि क्लिंकर परिवहन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। चौधरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जांच के दैारान अधिकांश लोग बुरी तरह प्रभावित पाए गए। क्लिंकर फेफड़ों और त्वचा को लगातार खतरे में डाल रहा है।

शहर के अन्य इलाकों में प्रदूषण का स्तर 260 एमजी

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने शहर में तीन जगह रीको इंड्रस्ट्रीज एरिया, हीरादास और मुखर्जी नगर में प्रदूषण का स्तर जांचा। इन तीनों स्थानों पर पिछले दिनों औसत माप 260 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था, जबकि रेलवे यार्ड में 697 एमजी पाया गया। पिछली जांच में भी रेलवे यार्ड में प्रदूषण 610 एमजी था। जबकि100 एमजी से अधिक प्रदूषण को नुकसान दायक माना जाता है।

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