पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

बंशी पहाड़पुर:दो दशक में 8000 मंदिरों में लगा यहां का बलुआ पत्थर, इनमें अयोध्या का राम मंदिर भी है शामिल

भरतपुर11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • रुदावल के करीब 2000 हेक्टेयर में फैला बंशी पहाड़पुर खनन, ब्रिटिशकाल में लुटियन ने की थी इस खनन क्षेत्र की तलाश

रुदावल इलाके के करीब 2000 हेक्टेयर में फैला बंशी पहाड़पुर खनन क्षेत्र हमारी आर्थिक स्थिति ही नहीं बल्कि लोकप्रियता में भी खास है। क्योंकि यहां निकलने वाले सेंड स्टोन की ख्याति दूर-दूर तक है। यूएई के अबुधाबी से लेकर अयोध्या के राम मंदिर, अक्षरधाम, इस्कान तक देश-विदेश के तमाम प्रसिद्ध मंदिरों में इसका उपयोग हा़े रहा है। यह ख्याति साल दो साल की नहीं, बल्कि सदियों की है। इसमें ब्रिटिश आर्किटेक्ट लुटियन का विशेष योगदान है।

जिन्होंने नईदिल्ली को डिजाइन किया और संसद भवन, इंडिया गेट को बनवाया। लुटियन ने ही इस सेंड स्टोन की स्टेबिलिटी और जबरदस्त बाइंडिंग को पहचाना था। यही वजह है कि उत्तर भारत में बनने वाले ज्यादातर मंदिरों में सेंड स्टोन काम आ रहा है। नागर शैली के अधिकांश मंदिरों में सिंह द्वार, रंग मंडप, नृत्य मंडप, गर्भगृह, शिखर, परिक्रमा पिलर, दीवार, छज्जे, महराब, झरोखे, छत के लिए सेंड स्टोन ही काम में लिया जा रहा है।

कारोबारी विष्णु सिंघल का कहना है कि पिछले 20 साल में 8000 से ज्यादा मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के लिए सेंड स्टोन यहां से भेजा गया है। बल्कि अब तक सेंड स्टोन नेक्स्ट लेवल पर आ गया है। इसके तहत बयाना में पच्चीकारी युक्त पत्थर भी तैयार होने लगे हैं।

अभी 1.25 लाख घन फीट पत्थऱ की जरूरत और
वे लोग नई डिमांड को देखते हुए महलपुर चूरा, तिर्घरा, छऊओमोड, सिरोंध आदि क्षेत्र के खान मालिकों से संपर्क में है। क्योंकि करीब 1.25 लाख घन फीट पत्थर की और जरूरत पड़ेगी। इसके लिए मैचिंग के पत्थर की तलाश की जा रही है। पिछले दिनों मंदिर प्रोजेक्ट को देख रहे विहिप के सीनियर लीडर चंपत राय ने जयपुर प्रांत के पदाधिकारियों की मीटिंग ली थी। इसमें इस पर भी चर्चा हुई थी।

राम मंदिर में प्रमुख रूप से बंशी पहाड़पुर का सेंड स्टोन ही काम आएगा। इससे मैच करता मिर्जापुर का पत्थर भी काम लिया जाएगा। परकोटे के लिए जोधपुर के पत्थर को उपयुक्त माना गया है। नींव से लेकर एक फ्लोर बनने तक का 75000 घन फीट पत्थर तैयार है। जबकि अन्य दो फ्लोर के लिए करीब 3.25 लाख घन फीट पत्थर भी तैयार होने लगा है। पिलर का पत्थर 25 घन फीट और अन्य पत्थर 10 और 5 घन फीट के भी हैं। बंशी पहाड़पुर के पत्थर की डिमांड इसके अलावा कई अन्य राज्यों में भी है। लोग यहां के पत्थर को अपने घरों में भी लगवाते हैं।

अयोध्या में जा चुका है करीब पौने दो लाख घन फीट पत्थर
विहिप महामंत्री अनिल भारद्वाज के अनुसार वर्ष 1992 से अब तक करीब पौने दो लाख घन फीट पत्थर अयोध्या भेजा जा चुका है। लेकिन, अब मंदिर विस्तार के बाद इसकी और डिमांड बढ़ गई है। अब तक करीब 100000 घन फीट सेंड स्टोन अयोध्या कार्यशाला में और 75000 घन फीट पत्थर पिंडवाड़ा कार्यशाला में भेजा जा चुका है। यहां पत्थर की गढ़ाई, कटाई और पच्चीकारी की जा रही है।

अद्भुत यह भी... इस पत्थर की लाइफ करीब 1000 साल
पत्थरों के जानकारों का कहना है कि 1000 साल तक इसका कुछ भी नहीं बिगड़ता। अगर इससे विक्रमादित्य काल शैली में मंदिर को बनाया जाए तो लाइफ और भी बढ़ जाती है। इस शैली में पत्थर से पत्थर को जोड़कर इमारत तैयार होती है। इसमें जॉइंट के लिए पीतल की क्लिप तैयार होती है। बहुत जरूरत होने पर चूना इस्तेमाल होता है। सीमेंट कभी इस्तेमाल नहीं होता।

वास्तुविद सोनिया वर्मा का कहना है कि मजबूती और सुंदरता के साथ ही अन्य पत्थरों के मुकाबले इसमें अधिक भार सहने की क्षमता है। इसमें आसानी से महीन पच्चीकारी और गढ़ाई की विशेषता भी है। इसमें स्टोन कैंसर/रूनी नहीं होता। बारिश में भीगने इसकी सुंदरता और बढ़ जाती है। इसलिए बरसों से हवेली, महल, मंदिर और इमारतों में यह पत्थर काम आता रहा है। नईदिल्ली को डिजाइन करने वाले ब्रिटिश आर्किटेक्ट लुटियन ने भी तमाम पत्थरों के परीक्षण के बाद ही इसे मान्यता दी थी।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- आज मार्केटिंग अथवा मीडिया से संबंधित कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है, जो आपकी आर्थिक स्थिति के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। किसी भी फोन कॉल को नजरअंदाज ना करें। आपके अधिकतर काम सहज और आरामद...

    और पढ़ें