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  • The Son Has Become Corona Positive, Himself A Patient Of Diabetes And BP, Still Doing Duty In The Covid Ward For A Year Without Taking Leave And Off

मंडे पॉजिटिव:बेटा कोरोना पॉजिटिव हो चुका, खुद डायबिटीज और बीपी के रोगी फिर भी एक साल से बिना छुट्टी और ऑफ लिए कर रहे कोविड वार्ड में ड्यूटी

भरतपुर21 दिन पहले
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  • रोजाना पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में रहने के बाद नर्सिंगकर्मी ने बरती सावधानी, कई की जान बचाई

बेटा कोरोना पॉजिटिव हो चुका। खुद डायबिटीज व बीपी के रोगी। उम्र भी 56 साल से अधिक है, फिर भी आरबीएम अस्पताल के फर्स्ट ग्रेड नर्सिंग अधिकारी दीवान सिंह शर्मा एक साल 2 माह से बिना छुट्टी और ऑफ लिए कोविड में ड्यूटी दे रहे हैं।

कोरोना मरीजों के उपचार से लेकर कोविड व्यवस्थाओं में आगे रहने का जज्बा सिर्फ मास्क के सहारे है, जो हर रोज कोरोना पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में आने के बावजूद आज तक पॉजिटिव नहीं हुए। दीवान सिंह शर्मा बताते हैं कि मुंह पर मास्क और हाथ में गिलब्स पहने हों और सावधानी रखी जाए तो कोरोना कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। इसी का परिणाम है कि वह लगातार 1 साल 2 महीने कोविड जोन में काम करने के बावजूद एक भी बार पॉजिटिव नहीं हुए। सुबह, दोपहर, शाम और रात हर वक्त ड्यूटी के लिए अलर्ट रहते हैं।

दूसरी लहर में मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा हो गई थी, नर्सिंग स्टाफ की कमी महसूस होने लगी तो वह अतिरिक्त कार्य के लिए जुट जाते। कोरोना पॉजिटिव वार्ड में मरीजों को दवाई देते हैं और इंजेक्शन भी लगाते हैं और इस प्रकार वह कई मरीजों की जान बचा चुके हैं। वह बताते हैं कि कोविड वार्ड में आगरा के वीरेंद्र, धौलपुर के महेश, धनवाड़ा के राहुल और शहर के निवासी कृष्ण कुमार, आईसीयू में विवेक आदि ऑक्सीजन लेवल 60 के आसपास होने पर भर्ती हुए थे। जिनकी देखरेख और ऑक्सीजन लगाने से लेकर दवाई देने का काम भी उन्होंने स्वेच्छा से किया।

इसका परिणाम यह रहा कि वह कुछ दिन बाद ही पॉजिटिव से नैगेटिव हो गए। उनका बेटा कोटा से 13 अप्रैल को भरतपुर आया तो जांच में वह भी पॉजिटिव निकला, लेकिन वह बेटा पॉजिटिव होने के बावजूद घबराए नहीं और अपनी ड्यूटी देते रहे। उसे घर पर आइसोलेट रख उपचार दिया और 18 अप्रैल को नेगेटिव हो गया। खुद बीपी और डायबिटीज के रोगी हैं, लेकिन हिम्मत, मनोबल और जज्बा के आगे कोरोना हार गया है।

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