राजस्थान का ऐसा पहला केस / 11 साल का यह बालक न तो बीमार है और न ही इसमें कोरोना के कोई लक्षण हैं, फिर भी 10 बार रिपोर्ट आई पॉजिटिव, डॉक्टर भी हैरान

भरतपुर. शहर की कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र तारा महेंद्रा कॉलोनी में घर-घर थर्मल स्क्रीनिंग करते चिकित्सक। भरतपुर. शहर की कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र तारा महेंद्रा कॉलोनी में घर-घर थर्मल स्क्रीनिंग करते चिकित्सक।
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भरतपुर. शहर की कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र तारा महेंद्रा कॉलोनी में घर-घर थर्मल स्क्रीनिंग करते चिकित्सक।भरतपुर. शहर की कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र तारा महेंद्रा कॉलोनी में घर-घर थर्मल स्क्रीनिंग करते चिकित्सक।

  • 5 विभागों के विशेषज्ञों ने बालक में अन्य बीमारियों का पता लगाने के लिए मल-मूत्र, ब्लड के अलावा नाक और गले से थ्रोट के नमूने लिए हैं
  • शुक्रवार को लिए गए 5 सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर कोरोना वायरस की स्टडी की जाएगी

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 09:17 AM IST

भरतपुर. बयाना के कसाईपाड़ा का 11 वर्षीय बालक न तो बीमार है और न ही उसमें खांसी, जुकाम, बुखार जैसे कोई लक्षण हैं। फिर भी 10 बार से उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ रही है। राजस्थान में यह पहला केस है जब यह बालक पिछले 38 दिन से अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद नेगेटिव नहीं हो पा रहा है। जबकि प्रदेश में कोई भी कोरोना संक्रमित बालक ऐसा नहीं है जो 18 दिन से ज्यादा अस्पताल में भर्ती रहा हो।

अब डॉक्टर खुद भी बयाना के इस बालक की स्टडी करने में जुट गए हैं कि आखिर यह कौन सी प्रकृति का वायरस है जो इसे निगेटिव नहीं होने दे रहा है। जयपुर में 5 विभागों के विशेषज्ञों ने बालक में अन्य बीमारियों का पता लगाने के लिए मल-मूत्र, ब्लड के अलावा नाक और गले से थ्रोट के नमूने लिए हैं। इनकी जांच रिपोर्ट भी सोमवार तक मिलने की संभावना है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च का मानना है कि इसका मतलब यह है कि उसके अंदर वायरस है, लेकिन वह सक्रिय नहीं है। ऐसी स्थिति में उससे किसी दूसरे को संक्रमण का खतरा नहीं है, वायरस नया है और हर दिन नए-नए शोध हो रहे हैं। इसी के परिणाम स्वरुप अब कोविड मरीजों को डिस्चार्ज करने से पहले जांच नहीं की जाती जबकि पहले डिस्चार्ज करने से पहले दो-दो बार जांच की जाती थी। विश्व के किसी भी देश में अब डिस्चार्ज से पहले जांच नहीं की जाती है। 

5 विशेषज्ञ बोले-वायरस की स्टडी की जाएगी

 शुक्रवार को 5 विभागों के विशेषज्ञों ने सैंपलों की जांच जयपुर एवं महाराष्ट्र के पूना में कराने का निर्णय लिया। मेडिसन विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेश गुप्ता ने बताया कि जयपुर में बाल रोग, मेडिसिन, एंडोक्राइनोलॉजी, माइक्रो बायोलॉजी और चेस्ट सहित कुल 5 विभागों के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने इस केस की समरी तैयार कर चर्चा की। इसके साथ ही बालक के शुक्रवार को लिए गए 5 सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर कोरोना वायरस की स्टडी की जाएगी। इसके अलावा पूना की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से भी बात करके पता लगाया जाएगा कि इस बालक में आखिर ऐसा कौन सी प्रकृति का वायरस है जो उसे नेगेटिव नहीं होने दे रहा है। इसके अलावा विशेषज्ञ बालक की इम्युनिटी की जांच भी कराएंगे।

एक महीने से कोरोना वार्ड में भर्ती है बालक बेफ्रिक होकर बोला-मेरे साथ मेरे पापा हैं... 
एसएमएस अस्पताल जयपुर में भर्ती बालक से भास्कर ने उसके पिता के मोबाइल फोन पर कॉल करके बातचीत की तो वह बोला.... ना दोस्त हैं, ना मम्मी और छोटा भैया, मोहल्ले के बच्चों के साथ खेले तो हो गया एक महीने से ज्यादा। अब मेरे पास सिर्फ पापा हैं। वार्ड में भर्ती अन्य बच्चों को भी छुट्टी मिल गई और वह भी घर चले गए। मुझे अपने खिलौने हाथी, घोड़ा आदि दे गए हैं, जिनसे खेल कर मन बहलाता हूं। फिर भी मन नहीं लग रहा है। पहले दूसरे भर्ती बच्चों के टच मोबाइल पर भी खेल लेता था, लेकिन अब तो वह भी नहीं है। वार्ड में दो बड़े बच्चे हैं और तीसरा मैं हूं। मन नहीं लग रहा है और घर की याद आती है। डाक्टर साहब आते हैं जिनसे पूछता हूं कि घर कब जाऊंगा तो कोई जबाव नहीं देते हैं। एक छोटी गोली दे गए हैं।

एक्सपर्ट व्यू...

दुर्लभ केस, इस पर शोध किया जा रहा है: डा. गुप्ता
वायरस 27 दिन तक रहता है और ये बालक 4 सप्ताह बाद भी पॉजिटिव है। वायरस अलग इसलिए नहीं कह सकते क्योंकि इसके परिवार के 14 लोग सभी ठीक हो चुके हैं, फिर स्टडी की जा रही है। वैसे रूटीन एंटी वायरस की दवा शनिवार से शुरू की है, जो कि लोपिना एंटी रिट्रो वायरस ड्रग है। यह दुर्लभ केस है, इस पर शोध किया जा रहा है। -डा. राजकुमार गुप्ता, सीनियर प्रोफेसर, शिशु रोग विभाग, एसएमएस, जयपुर

अस्पताल में रखने की जरूरत नहीं
आरटी-पीसीआर जांच में यह पता चलता है कि वायरस की उपलब्धता शरीर के अंदर कितनी है। कई बार मनुष्य के शरीर कि बॉयोलॉजिकल बनावट इस तरह की होती है और इम्यून सिस्टम मजबूत होने से भी वायरस शरीर के अंदर रहता है लेकिन उससे उसे कोई दिक्कत नहीं होती। ऐसे मरीजों की संख्या बहुत है जिसमें कोई लक्षण नहीं है। इन्हें मास्क लगा कर रहना चाहिए लेकिन अस्पताल में भर्ती रखने की जरुरत नहीं है।
-डॉ.एकता गुप्ता, वॉयरोलॉजिस्ट, इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बैलियरी साइंसेज (आईएलबीएस), दिल्ली।

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