राजस्थान की 'लपेटा' से लाखों की कमाई:इस पलंगतोड़ मिठाई की देशभर में डिमांड; नाम और स्वाद दोनों से पॉपुलर

भरतपुर6 महीने पहलेलेखक: गौरव माथुर

भरतपुर के अजेय किले के बारे में बहुत लोगों ने सुना या पढ़ा होगा, जिसे दुश्मन कभी जीत नहीं पाए। ऐसे ही यहां का एक जायका भी है। उसके स्वाद के आगे दुश्मन भी हार गए। जिसने भी एक बार इसका स्वाद चखा, दीवाना हो गया। यह है भरतपुर की फेमस मिठाई बिस्तरबंद। ये ऐसी मिठाई है, जिसे लोग 4 नामों से जानते हैं। पिछले 50 सालों से लोगों के दिलों पर राज कर रही बिस्तरबंद की सीक्रेट रेसिपी और स्वाद को जानने राजस्थानी जायका की टीम भरतपुर मिष्ठान भंडार पहुंची। चलिए, आपको भी बताते हैं इस स्वाद के रोचक सफर के बारे में...।

50 साल पुराना जायका
शहर के कोतवाली चौराहे पर 82 साल पहले यानी साल 1940 में एक छोटी सी मिठाई की दुकान हुआ करती थी, जिसे हलवाई स्व. बाबूलाल खंडेलवाल ने शुरू की थी। हालांकि बिस्तरबंद बनाने की शुरुआत 50 साल पहले उनके बेटे स्व. मोहनलाल खंडेलवाल ने की। मलाई के लच्छों पर प्रयोग से बनी इस मिठाई का नाम बिस्तरबंद इसलिए पड़ा क्योंकि इसे बिस्तर की तरह रोल किया जाता है। मिठाई का स्वाद ऐसा था कि धीरे-धीरे लोगों की जुबां पर चढ़ने लगा। एक वक्त ऐसा भी आया जब सबसे ज्यादा डिमांड इसी मिठाई की होने लगी। तब शहर के दूसरे हलवाइयों ने भी इसे बनाने का प्रयास किया।

4 नामों से जानते हैं लोग
मोहनलाल खंडेलवाल के पोते कुलदीप खंडेलवाल बताते हैं कि लोग इस मिठाई को चार नामों से जानते हैं। लोगों ने जब इसे चखा तो वह इसे तरह-तरह के नाम देने लगे। जैसे- पलंग तोड़, लपेटा, बेड रोल, बिस्तरबंद। तब फिर उनके दादा ने इसका फाइनल नाम बिस्तरबंद ही रखा। तब से यह नाम और स्वाद लोगों की जुबां पर चढ़ गया।

तीसरी और चौथी पीढ़ी के पास विरासत
मोहनलाल खंडेलवाल के बाद उनके बेटे ईश्वरी प्रसाद ने दुकान संभाली। फिर कुछ साल पहले उनका भी निधन हो गया। अब भरतपुर मिष्ठान भंडार को ईश्वरी प्रसाद के बेटे कुलदीप खंडेलवाल और छोटे भाई रवि खंडेलवाल संभाल रहे हैं। रवि खंडेलवाल बताते हैं कि उनकी यह मिठाई देश भर में जाती है। इसके दीवाने आम आदमी से लेकर पॉलिटिशियन, बड़े-बड़े अधिकारी हैं।

15 किलो दूध में सिर्फ 3 किलो बिस्तरबंद होते हैं तैयार
कुलदीप खंडेलवाल ने बताया की 15 किलो दूध की सिर्फ 3 किलो मिठाई बनती है। इसे बनाने में करीब 2 घंटे का समय लगता है। रोजाना करीब 20 किलो मिठाई बनाई जाती है, जो डिमांड के कारण शाम तक खत्म हो जाती है। यही वजह है कि हर समय यह मिठाई ताजा ही मिलती है। गर्मी में इसे दो दिन तक स्टोर कर सकते हैं जबकि सर्दी में 4 दिन तक रखकर खाया जा सकता है।

लाखों में सालाना कारोबार
एक किलो बिस्तरबंद का रेट 500 रुपए है। औसतन 20 किलो मिठाई की सेल रोज होती है। शादियों के सीजन में सेल बढ़ जाती है। एक अनुमान के मुताबिक इस मिठाई का सालाना कारोबार 35 लाख से ज्यादा का है।

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