अब नहीं रहेगा पेयजल संकट:अब तक 156 एमएम ज्यादा बारिश, सामान्यतः 30 सितंबर तक मानसून की विदाई हो जाती है, लेकिन इस बार अक्टूबर में भी होगी बारिश

भरतपुर2 महीने पहले
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आमतौर पर कनागतों से पहले मानसून की विदाई हो जाती है। लेकिन, इस साल बने कई चक्रवात की वजह से अश्विन माह में भी मानसून सक्रिय है। करीब 8 साल बाद यह पहली बार है जब मानसून इतने लंबे समय तक बना हुआ है। इस बीच रैनी सीजन में भी जोरदार बारिश हुई है। बांध बारैठा में पानी 26 फीट तक पहुंच गया है। इस बार पिछले साल के मुकाबले 156 एमएम बारिश ज्यादा हुई है।

इसका असर यह है कि आने वाली गर्मियों में अब पीने के पानी का संकट नहीं रहेगा। वहीं, जमीन में नमी बनी रहने से रबी सीजन में सरसों और अन्य फसलों को बंपर पैदावार होने की उम्मीद है। अगले महीने यानि अक्टूबर में भी मानसून की बारिश बनी रह सकती है। क्योंकि चक्रवाती तूफान गुलाब अब कमजोर पड़कर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया है।

मौसम विशेषज्ञ आरके सिंह के अनुसार कम दबाव का क्षेत्र दो दिन बाद गुजरात तट के पास पहुंचकर फिर से प्रभावशाली होकर डिप्रेशन में बदल जाएगा। इस सिस्टम के असर से भरतपुर संभाग में 3 से 6 अक्टूबर के बीच मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है। इधर, बुधवार को दोपहर में बादल छाए, लेकिन बिना बरसे ही चले गए। दिन का तापमान में 0.5 डिग्री का इजाफे के साथ 34 डिग्री तक पहुंच गया।

न्यूनतम तापमान 26 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से 4 डिग्री अधिक रहा। गुरुवार को भी गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। जल संसाधन विभाग के मुताबिक इस रैनी सीजन में 1 जून से 29 सितंबर तक जिले में 568 मिमी बारिश हो चुकी है। जो पिछले साल के मुकाबले 156 एमएम अधिक है।

बारिश रुकते ही शुरू होगी सरसों फसल की बुवाई
सरसाें की खेती के लिए 25 से 35 डिग्री तापमान और 75 से 100 एमएम बरसात की नमी चाहिए। चूंकि इस समय तापमान ठीक है और बारिश से नमी भी बनी हुई है। लेकिन, लगातार बारिश के कारण किसान अभी बुबाई नहीं कर रहा है। संयुक्त निदेशक कृषि देशराजसिंह का कहना है कि बारिश के कारण मिट्टी पर कठोर परत जम जाती है, जिससे अंकुरण प्रभावित होता है। इसलिए बारिश रुकते ही सरसों की बुबाई शुरू हो जाएगी। इस साल करीब 2.5 लाख हैक्टेयर में सरसों की बुबाई होने की उम्मीद है।

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