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  • Two Big Projects Worth More Than 100 Crores Failed; Even After 10 Years, Neither Drinking Water Was Available For 24 Hours Nor Sewerage Line Started

ये जनता के पैसे की बर्बादी है:100 करोड़ से ज्यादा के दो बड़े प्रोजेक्ट फेल; 10 साल बाद भी न तो 24 घंटे पीने का पानी मिला और न ही सीवरेज लाइन चालू हुई

भरतपुर14 दिन पहले
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कंपनी बाग पंप हाउस के अंदर लगी पानी की मोटर। यहीं से शहर में पेयजल सप्लाई होती है। - Dainik Bhaskar
कंपनी बाग पंप हाउस के अंदर लगी पानी की मोटर। यहीं से शहर में पेयजल सप्लाई होती है।
  • आरयूआईडीपी के इंजीनियरों ने जयपुर के एसी कमरों में बैठकर बना दी योजनाएं

बिना ग्राउंड रियलिटी पता किए एसी कमरों में बैठकर बनाई जाने वाली योजनाओं का हश्र कैसा होता है, यह भरतपुर में 24 घंटे पीने के पानी और सीवरेज प्रोजेक्ट से समझ सकते हैं। इन दोनों स्कीमों में 100 करोड रुपए से ज्यादा पैसा बर्बाद हो गया। शहर को बिलुकल भी लाभ नहीं मिला। सीवरेज तो चालू ही नहीं हो पाई। जबकि 24 घंटे तो दूर ठीक से 1 घंटे भी पीने के पानी नहीं मिल रहा है।

हालत यह है कि कहीं गंदा और कीचडय़ुक्त पानी आ रहा है तो कहीं बिल्कुल भी नहीं मिल रहा। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। यही वजह है कि पिछले सप्ताह कई मोहल्लों की महिलाएं जलदाय विभाग के दफ्तर पर मटका फोड़ प्रदर्शन कर चुकी हैं। अभी भी पीने के पानी के लिए लोगों की प्राइवेट आरओ वाटर पर डिपेंडेंसी है। वहीं प्राइवेट बोरिंग की स्पीड बढ़ी है।

पिछले 2 महीने में 2000 से ज्यादा नए बोरिंग हो चुके हैं। इधर, जलदाय विभाग के इंजीनियर बोल रहे हैं कि आरयूआईडीपी ने बिना ग्राउंड रियलिटी जाने योजनाएं बनाईं थीं। मौजूदा सिस्टम से 24 घंटे पेयजल सप्लाई संभव नहीं है। इसी तरह कई तरह की खामियां होने के कारण सीवरेज प्रोजेक्ट को चालू करना चुनौती है। भास्कर संवाददाता ने पड़ताल से जाना कि ये बड़ी योजनाएं फेल क्यों हुईं।

आरओ वाटर पर है डिपेंडेंसी, बोरिंग कराने की स्पीड बढ़ी, 2 माह में 2000 हुए

शहर में उपभोक्ताओं को टेल एंड और 24 घंटे पानी देने की 43 करोड़ रुपए की योजना वर्ष 2009 में शुरू हुई थी। आरयूआईडीपी के माध्यम से इस पर मार्च, 2010 में काम शुरू हुआ। यह काम अप्रैल, 2013 में पूरा होना था। लेकिन, फरवरी, 2016 में खत्म हुआ। इस पर 40 करोड़ रुपए से 166 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन, 25 किमी की राइजिंग लाइन, 9 टंकिया, 1 स्वच्छ जलाशय और 2 पंप हाउस बनाए गए। इसमें 10,300 उपभोक्ताओं को कनेक्शन देकर मीटर भी लगा दिए। इंजीनियरों के मुताबिक पुरानी लाइन के कनेक्शन नहीं काटे। नई पाइप लाइनें 4 फुट के बजाय 2-3 फुट गहराई पर ही बिछा दी गईं। कई जगह इन्हें पुरानी लाइनों से जोड़ दिया गया। इससे अधिकांश पानी 4-6 इंच की पुरानी लाइनों में चला जाता है।

हर उपभोक्ता के खर्च हो रहे 1150 रुपए

ईदगाह, बापू नगर, सुभाष नगर, लक्ष्मी नगर, गोपालगढ़ आदि कॉलोनियों के उपभोक्ता अशोक कुमार, भावसिंह, मोहकम सिंह, राजू शर्मा, दीपक अग्रवाल, मोहन राजपूत बताते हैं कि उन्हें पानी के लिए हर महीने 1150 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। इसमें 250 रुपए तो जलदाय विभाग का बिल होता है। सुबह-शाम 1-1 घंटे पानी के लिए मोटर चलाने से करीब 600 रुपए बिजली खर्च आता है। आरओ प्लांट का पानी खरीदने पर भी 300 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।

सीवरेज प्रोजेक्टः सिविल वर्क पूरा, लेकिन एक दशक में भी चालू नहीं हो सकी सीवरेज, 61.54 करोड़ बर्बाद

शहर की सीवरेज लाइन करीब 10 साल बाद भी चालू नहीं हो पाई है। लोग कनेक्शन लेने को तैयार नहीं हैं। इसका सिविल वर्क लगभग पूरा हो चुका है। कुछ जगह टेस्टिंग भी हो गई थी। इसमें 15.23 करोड़ की लागत से 8 एमएलडी क्षमता का नगला गोपाल में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और नगला गोपाल तिराहा, बी-नारायण गेट एवं चांदपोल गेट के पास पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं। भरतपुर के लिए 61.54 करोड़ रुपए का सीवरेज प्रोजेक्ट वर्ष 2011 में मंजूर हुआ था। यह मार्च, 2014 में पूरा होना चाहिए था। आरयूआईडीपी की उदासीनता से यह करीब 6 साल लेट हुआ। आरयूआईडीपी अपना काम पूरा होना बताकर इसे नगर निगम को सौंप चुकी है। लेकिन, निगम के लिए अब यह गले की हड्डी बन गया है।

एक्सपर्ट व्यू
संजय गुप्ता, एमडी, याशी कंसल्टिंग सर्विसेज

बड़ी कंपनी ने सीवरेज प्रोजेक्ट का ठेका लेकर सबलेट कर दिया। इसमें फ्लो लेवल ठीक से चैक नहीं हुए। घरों के सीवरेज कनेक्शन जोड़ने का काम भी ठेकेदार स्तर पर ही होना चाहिए था। अब निगम के लिए कनेक्शन करना मुश्किल काम होगा। इसी तरह 24 घंटे पेयजल आपूर्ति के लिए मौजूदा पाइप लाइन सिस्टम को ठीक से री-स्ट्रक्चर नहीं किया गया। इस वजह से परेशानी आ रही है। इन प्रोजेक्टों का टैक्नीकल एक्सपर्ट्स की कमेटी से मुआयना कराकर रिपोर्ट लेनी चाहिए, ताकि खामियां दूर हो सकें।

इतनी बड़ी बर्बादी के ये हैं जिम्मेदार

इनके समय बना प्रोजेक्ट
डी.के. मित्तल, तत्कालीन एक्सईएन आरयूआईडीपी

शहर में 24 घंटे पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट इनके समय में बना। इनकी जिम्मेदारी थी कि ग्राउंड रियलिटी और फिजिबिलिटी चैक कर स्कीम को तैयार कराते। पर, ऐसा नहीं हुआ।

अब इनका कहना हैः हमने 24 घंटे जलापूर्ति के हिसाब से ही प्लान बना कर लाइन बिछाई थीं। आरयूआईडीपी ने भी 12000 उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए थे। जलदाय विभाग ठीक से जल वितरण करे तो 24 घंटे पानी मिल सकता है।

इन्होंने प्रोजेक्ट लागू किया

हरीश अग्रवाल, एक्सईएन आरयूआईडीपी

प्रोजेक्ट लागू करते समय इन्हें प्रेक्टिकल समस्याओं का पता चलना चाहिए था। इनकी जिम्मेदारी थी कि उच्चाधिकारियों को बताकर योजना में उसी के मुताबिक जरूरी संशोधन करवाते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अब इनका कहना हैः मैंने जब आरयूआईडीपी भरतपुर का चार्ज संभाला, तब 24 घंटे पानी सप्लाई प्रोजेक्ट का काम चल रहा था। इसका डिजाइन पहले के अधिकारियों ने बनाया था। मैंने तो प्लान के मुताबिक काम को पूरा कराया है।

मौजूदा सिस्टम में 1 घंटे ही पानी देना संभव हैः एसई

​​​​​​​शहर में जो लाइनें बिछाई हैं उनसे 24 घंटे सप्लाई संभव नहीं है। जल वितरण प्रॉडक्शन और कंज्यूमर यूज पैटर्न के आधार पर होता है। फिलहाल एक-एक घंटे ही जलापूर्ति संभव है। जहां किल्लत है, वहां जलापूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। - हेमंत कुमार, एसई, जलदाय विभाग

प्रोजेक्टों की खामियां दूर कर जल्द चालू कराएंगे - गर्ग

सीवरेज प्रोजेक्ट की खामियों को एलएंडटी और निगम मिलकर जल्दी शुरू करेंगे। सैकंड फेज के लिए भी तैयारी शुरू की है। अब अरबन जल जीवन मिशन शुरू हो रहा है। इसमें शहर की पेयजल संबंधी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा।
- डॉ. सुभाष गर्ग, चिकित्सा राज्यमंत्री​​​​​​​​​​​​​​

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