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  • Up To 60 Percent Of Infections Were In The Lungs; CT Value Was Also Coming To 11, With Being Isolated, Increased Oxygen Level From Pruning, Greeted Surya, Then Won The Battle

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:फेंफड़ों में 60 प्रतिशत तक संक्रमण था; सीटी वैल्यू भी 11 आ रही थी, आइसोलेट होने के साथ ही प्रोनिंग से ऑक्सीजन लेवल बढ़ाया, सूर्य नमस्कार किया, तब जीती जंग

भरतपुर6 महीने पहले
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भरतपुुर की न्यू आदर्श कॉलोनी स्थित मेरे निवास के पड़ोस में ही एक परिवार संक्रमित हा़े गया। उनमें से एक जने की रात में ही ज्यादा तबीयत बिगड़ी। उनके साथ रात में कोई भी अस्पताल जाने को तैयार नहीं था। मैंने हिम्मत जुटाई और उसे आरबीएम अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। लेकिन, दूसरे दिन ही शाम को मैंने महसूस किया कि मेरी भी सांसें फूल रही हैं। हल्का जुकाम और बदन में हरारत सी भी है। इस पर मैंने स्वास्थ्य मंदिर के डाॅ. वीरेंद्र अग्रवाल को लक्षण बताकर सलाह ली।

उन्होंने मुझे यह कोरोना के लक्षण बताए और तुरंत जांच करवाने को कहा। इस पर मैंने 25 अप्रैल को जब कोरोना जांच कराई तो मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। चूंकि परिवार में 4 छोटे बच्चे और बुजुर्ग मां भी हैं। उन्हें लेकर लेकर मेरी चिंताएं ज्यादा बढ़ गईं। चूंकि डॉक्टर ने मुझे तुरंत आइसोलेट होने को कहा था। इसलिए मैंने घर के बजाए ऑफिस में खुद को आइसोलेट किया। तब मेरी कैलकुलेट थ्रेशोल्ड/सीटी वेल्यू 11 थी। यानि वायरस लोड काफी अधिक था।

संक्रमण से फेंफड़े 60 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुके थे। मैंने फिर डाॅ. वीरेंद्र अग्रवाल से सलाह ली। उन्होंने कहा कि टेंशन बिलकुल मत लो क्योंकि इससे ऑक्सीजन लेवल कम हाेगा। इस पर मैंने पॉजिटिव रहते हुए दिन में दो बार सूर्य नमस्कार किया। भाप स्नान लिया और प्रोनिंग करके ऑक्सीजन लेवल बढ़ाया। साथ में आयुर्वेदिक काढ़ा भी लिया। इसका नतीजा यह रहा कि 28 अप्रैल को मेरी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आ गई।

इतनी जल्दी रिकवर होने का कारण लक्षण दिखते ही जांच कराना और तुरंत उपचार लेना रहा। इसलिए मेरा कहना है कि अगर कोरोना के लक्षण हा़े तो टालें नहीं। तुरंत जांच कराएं। क्योंकि आंखें मूंदने अथवा नजर अंदाज करने से कोरोना संक्रमण घटेगा नहीं बल्कि बढ़ेगा। इसमें देरी होने पर संक्रमण फेफड़े को तेजी से डैमेज करता है। जिससे ऑक्सीजन लेवल कम होने लगता है।

एक्सपर्ट व्यू... प्राेनिंग से फेफड़े बेहतर काम करते हैं

डाॅ. सोनिया शर्मा का कहना है कि ब्लड में अगर ऑक्सीजन सेचुरेशन का स्तर 94 से नीचे आए तो होम आइसोलेशन में रहते हुए कोविड रोगियों को प्रोनिंग करनी चाहिए। वेंटीनेशन में सुधार करके रोगी की जान बचाई जा सकती है। प्रोनिंग की यह पोजीशन सांस लेने में आराम और ऑक्सीकरण में सुधार करने के लिए मेडिकली प्रूव्ड है। इसमें मरीज को पेट के बल लिटाया जाता है। यह प्रक्रिया 30 मिनट से दो घंटे की होती है। इसे करने से फेफड़ों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे ऑक्सीजन फेफड़ों तक आसानी से पहुंचती है और वे अच्छे से काम करने लगते हैं।

भास्कर नॉलेज... जानिए सीटी वैल्यू क्या है

सीटी वैल्यू यानि साइकल थ्रेशोल्ड एक पैमाना है जो बताता है कि मरीज में वायरस का लोड कितना है। इससे उसकी गंभीरता का भी पता लगता है। सीटी वैल्यू जितना कम होगी, बीमारी की उतनी अधिक गंभीरता होगी। आरटी पीसीआर टेस्ट में सीटी वैल्यू 35 होने पर मरीज को कोरोना नेगेटिव माना जाता है। अगर टेस्ट में ये वैल्यू 35 से कम है तो रोगी को कोरोना संक्रमित माना जाता है।

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