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झूठ बोलकर संत सम्मलेन में दिया राजनैतिक भाषण:बोले विश्वेंद्र सिंह- ED और CBI को कांग्रेस से नहीं फुर्सत

भरतपुर2 महीने पहले
विश्वेंद्र सिंह बोले- बीजेपी नेता कल पसोपा में झूठ बोलकर आए और संत सम्मलेन में मंच से उन्होंने राजनैतिक भाषण दिया।

भरतपुर के पसोपा गांव में कल बीजेपी के कई नेता पहुंचे जिस पर मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि, संत के देहांत पर बीजेपी नेता राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए आए थे। जिन्हें लोकल मसाला नहीं मिला। वह श्रद्धांजलि देने के बहाने आए थे और उन्होंन झूठ बोलकर मंच से राजनीतिक भाषण दिए। बीजेपी नेताओं ने संतों के मामले को लेकर किसी अधिकारी से जानकारी नहीं ली।

मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा की साधु संतों ने पहली बैठक में आश्वासन था की वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे जनहानि हो, जिस दिन बाबा विजय दास ने आत्मदाह की थी वह धरने स्थल के पीछे से आ रहे हैं जिससे साबित होता है की उन्हें किसी न किसी ने पेट्रोल दिया है। 10 सेकेंड के अंदर पुलिसकर्मियों ने आग को बुझा दिया है। बीजेपी कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार बता रही है जबकि बाबा विजय दास के देहांत की वह खुद जिम्मेदार है। बीजेपी बाबा के आत्मदाह के मामले पर CBI और ED से जांच करवाने की बात कह रही है लेकिन दोनों एजेंसियों के पास फुर्सत ही नहीं है। वह कांग्रेस नेताओं के यहां रेड करने में बिजी हैं। उनके पास इतना समय नहीं है की, वह बीजेपी के खिलाफ जांच कर सकें।

संत के आत्मदाह के मामले पर राजस्थान सरकार क़ानूनी प्रक्रिया और साधु संतों की सहमति से अपना काम कर रही है। जब इस मामले में बीजेपी को में पूरी तरह से दोषी मानता हूं। कल बीजेपी नेता श्रद्धांजलि की कहकर पसोपा के पशुपति नाथ मंदिर पर आए और संत सम्मलेन के मंच से उन्होंने राजनैतिक भाषण दिए। जबकि वह कथित रूप से सीनियर लोग हैं। कल गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा था एक फैल पर साइन होने में 10 महीने लगे जबकि 9 महीने में बच्चा पैदा हो जाता है। लेकिन, बीजेपी को 5 हजार 2 सौ 32 हेक्टेयर को कन्वर्ट करने में 5 साल लगे जबकि 5 साल में बच्चा LKG में पहुंच जाता है। जबकि कांग्रेस सरकार ने 1 साल के अंदर ही नोटिफिकेशन जारी कर दिया।

कहा जा रहा है की, मानेसर मामले पर गजेंद्र सिंह शेखावत और मेरा संवाद हुआ। CBI 4 बार वॉइस सेम्पल लेने आ चुकी है। लेकिन गजेंद्र सिंह शेखावत वॉइस सेम्पल देने को तैयार नहीं हैं। वहीं सतीश पूनिया ने कहा था की, 70 साल से ऊपर रिटायरमेंट ले लेना चाहिए जब प्रधानमंत्री और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री की उम्र भी लगभग इतनी होगी इसलिए पूनियां का मानसिक संतुलन गणबड़ाया हुआ है।