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अभी तो बारिश शुरू हुई है:आईजी-डीसी ऑफिस के सामने जलभराव, 50 कॉलोनियों में भी करीब 1 लाख आबादी परेशान

भरतपुर15 दिन पहले
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संभागीय आयुक्त कार्यालय। - Dainik Bhaskar
संभागीय आयुक्त कार्यालय।
  • भास्कर पड़ताल - मानसून पूर्व 15 प्रमुख नालों की सफाई के बावजूद पंप से पानी निकासी पर खर्च होते हैं 15 लाख रुपए

मानसून की बारिश अभी तो शुरू हुई है। लेकिन, 50 से ज्यादा कॉलोनियों में करीब 1 लाख की आबादी तनाव में है। क्योंकि शहर का ड्रेनेज सिस्टम कई साल से चॉक है। इस वजह से इन कॉलोनियों में बरसाती पानी एक बार भरता है तो कई दिन तक नहीं निकलता। इसकी वजह से घर में आना-जाना मुश्किल हो जाता है।

बरसात के दौरान शहर में जिन प्रमुख स्थानों पर जलभराव होता है, उनमें शहर को संभालने वाले आईजी, संभागीय आयुक्त(डीसी) के ऑफिस तक शामिल हैं। नगर निगम को हर साल मोटर पंप लगाकर पानी निकलवाना पड़ता है। पिछले साल इस काम पर 15 लाख रुपए खर्च हुए थे। दो दिन पहले हुई एक ही दिन की बरसात से 3 कॉलोनियों गांधी नगर, गणेश नगर और जसवंत नगर में पानी भर गया था।

इस पानी की निकासी के लिए बरसात के बीच ही नाले की खुदाई करानी पड़ी। जबकि 5 जगहों पर पानी निकालने के लिए पंप लगाने पड़े थे। अगर ठीक सी बारिश हुई तो कई स्थानों पर मोटर पंप लगाने पड़ेंगे। नगर निगम अफसरों के मुताबिक शहर में जलभराव की समस्या इसलिए है क्योंकि भूमिगत वाटर लेवल काफी ऊंचा है।

शहर के बरसाती पानी को बाहर ले जाने वाली सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन (सीएफसीडी) अधिकांश जगहों पर अतिक्रमणों की शिकार है। यहां से पानी को निकासी का उचित रास्ता नहीं मिल रहा है। जबकि दूसरा माध्यम रंजीतनगर कैनाल जलकुंभी से अटी हुई है। अन्य नालों की भी ठीक से सफाई नहीं होने के कारण जलभराव की समस्या रहती है।

मुख्य वजह...सीएफसीडी में अतिक्रमण, रंजीतनगर कैनाल में भरी है जलकुंभी

इन इलाकों में भरता है पानी

कलेक्ट्रेट के सामने।
कलेक्ट्रेट के सामने।

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वार्ड-56
वार्ड-56

वार्ड नंबर 56 में रूदिया नगर, शास्त्री नगर, प्रिंस नगर, केसर बिहार, वार्ड संख्या 55 में सूरजमल नगर, गिरीश विहार, तिलक नगर, इंदिरा कॉलोनी, जसवंत नगर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर। इन कॉलोनियों में हालात ये बनते हैं कि परिवारों को वहां से पलायन तक करना पड़ जाता है। पिछली साल खाली प्लॉट मालिकों को तत्काल निर्माण के लिए नोटिस देने अन्यथा अलॉटमेंट कैंसिल करने की योजना बनाई थी। लेकिन, यह कागजों में ही रह गई।

सफाई पर सवाल..कागजों में ही तो नहीं हो रहे नाले साफ

भरतपुर में बरसाती पानी की निकासी के लिए छोटे-बड़े करीब 15 नाले हैं। इनके साथ ही सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन (सीएफसीडी) भी बनी है। इनकी सफाई पर हर साल औसतन 13 लाख रुपए खर्च होते हैं। इस बार 10 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। मोटर पंपों से पानी निकलवाने पर औसत 15 लाख रुपए का खर्च अलग से है। सवाल यह है कि कहीं यह नाले कागजों में तो साफ नहीं हो रहे हैं।

जिम्मेदारों के जवाब

नालों में लेवलिंग की समस्या है

नालों की सफाई तो समुचित ढंग से हुई है। लेकिन, समस्या यह है कि कुछ नाले नगर निगम तो कुछ यूआईटी के हैं। इनमें अतिक्रमण और लेवलिंग की समस्या है। जिससे पानी की निकासी में दिक्कत आ रही है।
- राजेश गोयल, आयुक्त नगर निगम

275 करोड़ से सुधरेगा ड्रेनेज

जलभराव की समस्या से निजात के लिए 275 करोड़ रुपए का ड्रैनेज प्लान बनाया गया है। यह प्रोजेक्ट हमारी प्राथमिकता में है। अगले 2-3 महीने में इस पर काम शुरू हो जाएगा।
डॉ. सुभाष गर्ग, विधायक

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