• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Bharatpur
  • Women Forced To Cross The Railway Line To Bring Water From The Crematorium, There Is A Danger Of Accident While Crossing The Railway Line, There Is A High Amount Of Fluoride In The Water Coming From The Taps

पानी की समस्या से जूझते 600 परिवार:रेलवे लाइन पार कर शमशान से पानी लाने को मजबूर महिलाएं, जलदाय विभाग कर रहा खारे पानी की सप्लाई; पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा

भरतपुर4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
रेलवे लाइन पार कर पानी लाती महिला। - Dainik Bhaskar
रेलवे लाइन पार कर पानी लाती महिला।

भरतपुर के बयाना तहसील में करीब 600 परिवार के सामने पीने के पानी की समस्या बनी हुई है। इन परिवारों को पीने का पानी लाने के लिए एक किलोमीटर दूर शमशान में जाना पड़ता है। यह समस्या इन परिवारों के सामने करीब 15 सालों से है। पानी लाने के लिए परिवार के बच्चे और महिलाएं सुबह से जद्दोजहद में लग जाती हैं। जिससे उन्हें पूरे दिन पीने का पानी मिल सके। स्थानीय लोगों ने कई बार इसकी शिकायत जलदाय विभाग से की, लेकिन जलदाय विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

रेलवे लाइन पार कर पानी लेने जाते बच्चे।
रेलवे लाइन पार कर पानी लेने जाते बच्चे।

बयाना तहसील के बमनपुरा, महादेव गली, गंगड़ापाड़ा, कछिपाड़ा इलाकों में करीब 15 साल से पानी की समस्या बनी हुई है। इन इलाकों में मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं इन परिवार के ज्यादातर लोग अपना घर चलाने के लिए मजदूरी पर जाते हैं, लेकिन पेट भरने के ज्यादा इन्हें प्यास बुझाने की ज्यादा फ़िक्र लगी रहती है। इसलिए सुबह सबसे पहले उठ कर यहां के लोग पानी भरने के लिए एक किलोमीटर दूर शमशान जाते हैं पीने के पानी इंतजाम होने के बाद महिलाएं और व्यक्ति मजदूरी के लिए चले जाते हैं।

शमशान में हैंडपंप से पानी भरती महिलाएं।
शमशान में हैंडपंप से पानी भरती महिलाएं।

इन इलाकों में जलदाय विभाग के पानी की सप्लाई तो है, लेकिन उस पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है। जिसके कारण उसे यहां के लोग पीने से बचते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया की अगर वह जलदाय विभाग की सप्लाई का पानी दूध में डालते हैं तो दूध फट जाता है। इसके अलावा उस पानी को पीने से उन्हें बीमारियां भी होना शुरू हो गई थीं इसलिए स्थानीय लोग अब जलदाय विभाग द्वारा सप्लाई के पानी को नहाने और कपड़े धोने जैसे काम में लेते हैं। पीने के पानी के लिए उन्हें एक किलोमीटर दूर रेलवे लाइन पार कर जाना पड़ता है। इस दौरान हादसे की भी आशंका बनी रहती है। पूर्व वार्ड पार्षद भगवान स्वरूप ने बताया की करीब 15 साल पहले जलदाय विभाग की टंकी बनी हुई थी जहां से इन इलाकों में पानी की सप्लाई की जाती थी। उसके बाद जलदाय विभाग ने बयाना के गांधी चौक में एक और पानी की टंकी बनाई। उस टंकी से इन सभी इलाकों में पानी सप्लाई करने की बात कही गई थी लेकिन उस टंकी से आज तक पानी सप्लाई नहीं की गई जबकि उस टंकी का पानी ठीक है। जलदाय विभाग फिलहाल बोरबेल से पानी की सप्लाई कर रहा है, लेकिन जिस बोरबेल से इन इलाकों में पानी की सप्लाई की जा रही है उस बोरवेल के पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है जिसकी वजह से उसमें खारा पानी है और वह पीने लायक नहीं है।

दरअसल करीब 30 साल पहले बयाना से गंभीर नदी होकर गुजरती थी। जिससे पूरे बयाना को पानी की सप्लाई की जाती थी, लेकिन अब गंभीर नदी ख़त्म हो चुकी है और उसके बहाव इलाकों में बोरवेल लगा दिए गए हैं जहां से पानी की सप्लाई की जाती है, लेकिन बोरवेल ऐसे हैं जिनमें खारा पानी आता है। इस बात का जलदाय विभाग के अधिकारियों को अच्छे से पता है। उसके बाद भी वह उसी पानी को सप्लाई कर रहे हैं।

इस बारे में जब जलदाय विभाग के सहायक अभियंता अवलोक मीणा से बात की तो उन्होंने बताया की बयाना तहसील को बोरवेल का पानी सप्लाई किया जाता है। अगर लोगों की शिकायत है की उनके इलाके में पानी खारा आ रहा है तो पानी की क्वालिटी को चेक किया जाएगा, लेकिन हर 100 मीटर की दूरी के बोरबेल में पानी की क्वालिटी बदल जाती है और सप्लाई देने से पहले पानी की रासायनिक गुड़वत्ता चेक करवाई जाती है उसके बाद ही इलाकों में पानी की सप्लाई दी जाती है।

खबरें और भी हैं...