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जल संकट बढ़ा:8 साल में भी 44 गांवों के 1.50 लाख लोगों को नहीं मिला पानी, सैंपऊ की चंबल ऑफ्टेक परियोजना अधूरी

सैंपऊ6 दिन पहले
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सैंपऊ. पानी साफ करने को लगा क्लैरी फैक्यूलेटर। - Dainik Bhaskar
सैंपऊ. पानी साफ करने को लगा क्लैरी फैक्यूलेटर।
  • सैंपऊ की चंबल ऑफ्टेक परियोजना 2 साल में होनी थी पूरी, 8 साल बाद भी अधूरी

उपखंड के 44 गांवों की आबादी की पेयजल व्यवस्था के लिए स्वीकृत की गई क्षेत्रीय ऑफ्टेक योजना का काम पूरा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले करीब 8 वर्ष से कछुआ चाल से परियोजना का काम चल रहा है। ऐसे में हजारों ग्रामीणों के कंठ पानी का इंतजार कर रहे हैं।

दूसरी ओर दिन-ब-दिन पेयजल संकट समूचे इलाके में गहराता जा रहा है। पीएचइडी प्रोजेक्ट एवं परियोजना का काम कर रही फर्म की लापरवाही के कारण 24 माह में पूरा होने वाला परियोजना का कार्य 96 माह यानी 8 साल में भी पूरा नहीं हो पा सका है। कंपनी की लेटलतीफी और लापरवाही के चलते क्षेत्रवासियों को चंबल का पानी नहीं मिल पा रहा है तो दूसरी ओर परियोजना के पिछड़ने से लागत बढ़ने के कारण गांवों में टंकी निर्माण सहित कई जरूरी कार्य अधूरे पड़े हुए हैं।

जिसके कारण उपखंड के 44 गांव के ग्रामीणों के कंठ पानी से अभी भी सूखे हैं। इलाके में पड़ रही भीषण गर्मी के समय में ग्रामीण एक एक बूंद पानी की जद्दोजहद कर गुजर बसर कर रहे हैं। लेकिन विभाग, सरकार एवं जिम्मेदार कुंभकरण की नींद में सोए हुए हैं।

उपखंड के 8 गांवों में बननी थी टंकियां, अभी चितौरा गांव में टंकी निर्माण अधूरा

44 गांवों की क्षेत्रीय जल योजना चंबल ऑफ्टेक के अंतर्गत उपखंड के 8 गांवों में पानी की टंकियों का निर्माण होना था जिसमें से कुछ जगह निर्माण पूरा हो चुका है तो परौआ में अभी तक टंकी निर्माण की शुरुआत भी नहीं हुई है। वहीं चितौरा में टंकी का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है इसके अलावा तसीमों, दोनारी, मालोनी पंवार, सैंपऊ, रजौरा खुर्द और सहरौली में पानी भंडारण के लिए टंकीयों का निर्माण हो चुका है। वहीं इलाके में पूर्व में बनी पुरानी चार साथियों सहित कुल 12 टंकियों को योजना के पंप हाउस से भरा जाएगा इन्हीं टंकियों से गांवों को जोड़कर ग्रामीणों तक पानी सप्लाई किया जाएगा।

वर्ष 2013 में शुरू हुई थी परियोजना
वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार ने क्षेत्रीय ऑफ्टेक योजना को 32 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी की थी। परियोजना को पूरा करने का कार्य चेन्नई की फर्म श्रीराम ईपीसी को दिया गया था। लेकिन फर्म की लेटलतीफी के कारण परियोजना अधर में लटक रही है। परियोजना में अब तक 740 किलोलीटर का आरडब्ल्यूआर 400 किलो लीटर क्षमता का स्वच्छ जलाशय साढे 5 एमएलडी क्षमता का फिल्टर प्लांट सहित डेढ़ से साढे तीन लाख लीटर की 8 पेयजल टंकियां प्रस्तावित है।

वहीं करीब 56 किलोमीटर की राइजिंग लाइन 69 किलोमीटर लंबी वितरण लाइन और ग्राम वितरण लाइन करीब 207 किलोमीटर प्रस्तावित है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि परियोजना के हेड वर्कर्स पर बनने वाले रो वाटर रिजर्वायर की भंडारण क्षमता कुल 74 लाख लीटर होगी। इससे चंबल से आने वाला पानी 10 पंपों से फिल्टर होने के बाद गांवों में बनी 12 टंकियों में भरा जाएगा। कई टंकियों में पानी की लीकेज जांचने के लिए ट्रायल भी किया जा चुका है।

जुलाई तक पूरा होगा कार्य
गांवों में लाइन बिछाने का कार्य शेष है पीएसपी कनेक्शन रह गए हैं अभी कार्य बंद पड़ा हुआ है जैसे ही कंपनी कार्य शुरू करेगी तो परियोजना को शुरू होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। लगभग जुलाई तक कार्य पूर्ण हो जाना चाहिए।
-रामेंद्र लोधा सहायक अभियंता पीएचडी प्रोजेक्ट

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