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दस्यु मुकेश की एनकाउंटर:मौत के सदमे में पिता ने भी 7 दिन बाद तोड़ा दम, बड़े भाई का आरोप - मुकेश के नाम पर छुटभैये बदमाश चला रहे थे दुकान

सैंपऊ22 दिन पहले
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मुकेश के पिता के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते लोग। - Dainik Bhaskar
मुकेश के पिता के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते लोग।

तीन प्रदेशों की पुलिस के लिए सरदर्द और 75 हजार रुपए के इनामी डकैत मुकेश ठाकुर की सप्ताह पूर्व उत्तर प्रदेश पुलिस से मुठभेड़ में मौत हो गई थी। बेटे की मौत के सदमें से बीमार चल रहे पिता जारगा निवासी विद्याराम ठाकुर ने सोमवार सुबह दम तोड़ दिया। 7 दिन में परिवार में हुई पिता-पुत्र की मौत से परिजन सदमे में हैं। विद्याराम की मौत की सूचना के बाद आसपास के गांवों से लोग अंतिम संस्कार में शरीक होने पहुंचे। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में मुकेश के सबसे छोटे भाई देवेंद्र ने मुखाग्नि दी।

उल्लेखनीय है कि डकैत मुकेश ठाकुर को उत्तर प्रदेश की आगरा पुलिस द्वारा 29 अगस्त को सैया थाना इलाके के एक गांव से वाहन चैकिंग के दौरान बाइक पर पकड़ना बताया था। इसके बाद पुलिस द्वारा हथियार की बरामदगी के लिए सरकारी जीप से किसी स्थान पर ले जाते समय जीप में बैठे पुलिसकर्मियों पर हमला कर एक पुलिसकर्मी से पिस्टल छीन कर भागते हुए फायरिंग करने पर उसका 30 अगस्त की अलसुबह एनकाउंटर किए जाने का मामला सामने आया था। एनकाउंटर को लेकर लगातार परिजनों द्वारा आगरा पुलिस पर सवाल खड़े किए जा रहे थे। मुकेश की पत्नी काजल और मां ओमवती द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार से मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की थी।

बड़े भाई सुरेश का कहना है कि मुकेश ने 2019 में पैरोल से फरार होने के बाद जिले में एक भी वारदात नहीं की, जबकि पुलिस द्वारा कई मामलों में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। सुरेश ने यह भी कहा कि मुकेश के नाम पर इलाके के कई छोटे-मोटे बदमाश लोगों को धमकाने और वसूली की दुकान चला रहे थे। कुछ लोगों पर पैसा होने और उनके द्वारा उसे वापस न किए जाने की वजह से मुकेश पैरोल से आकर दोबारा जेल नहीं गया।

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